
परितोष वर्मा
जबलपुर (जयलोक)। अवैध कॉलोनियों के जाल से जबलपुर का हर क्षेत्र प्रभावित है। लगभग 150-175 के बीच इस प्रकार की अवैध कॉलोनियों की संख्या चिन्हित हुई हैं। अब ऐसी कॉलोनी के खिलाफ जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बड़ी मुहिम प्रारंभ करने का आगाज कर दिया है। कलेक्टर के द्वारा कल जारी किया आदेश पटवारियों तक पहुँच गया है। कलेक्टर ने एक प्रकार से अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाही करने के निर्देश दिए हैं लेकिन इस आदेश के बाद कई ऐसे व्यवहारिक सवाल भी खड़े हो गए हैं जिनका अधिकारी वर्ग से लेकर आम जनता तक जवाब तलाश रही है।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जय लोक से चर्चा करते हुए बताया कि आदेश में स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख किया गया है कि मध्य प्रदेश नगर पालिका कॉलोनी विकास निगम 2021, एवं मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत कॉलोनी का विकास नियम 2014 के प्रावधानों के तहत नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर परिषद एवं समस्त ग्राम पंचायत क्षेत्र में कॉलोनियों का विकास और निर्माण हेतु विस्तृत नियम जारी किए गए हैं।
समाचार पत्रों के माध्यम से लगातार यह खबरें प्रकाश में आई हैं कि जबलपुर के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत अनाधिकृत रूप से कॉलोनी का निर्माण एवं भूखंडों का विक्रय गैरकानूनी तरीके से किया जा रहा है। ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ प्रस्तुत करने एवं दिए गए प्रावधानों के अनुसार एफआईआर करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट है कि कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, कॉलोनी के विकास अनुज्ञा के लिए आवेदन तथा विभिन्न अनुग्रह के संबंध में दिए गए स्पष्ट निदेर्शों का परिपालन अगर नहीं हुआ है तो ऐसी कॉलोनी को अवैध माना जाएगा। बिना रेरा में पंजीयन के कॉलोनी के भूखंडों का क्रय विक्रय किया जा रहा है जो कि नियम विरुद्ध है।
जिसमें कई बार गलत जानकारी देकर के साथ धोखाधड़ी की जा रही है या फिर फर्जी बिल्डरों द्वारा अवैध काम कर पैसा वसूल करने के बाद कॉलोनी का विकास कार्य आधा अधूरा छोडकऱ बिल्डर भाग जाते हैं। ऐसी अवैध कॉलोनी को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी, जो अतिक्रमण के रूप में शासकीय भूमि पर बनाए गए निर्माण है उन्हें भी तोड़ा जाएगा।
आदेश में स्पष्ट रूप से नियमों का हवाला देते हुए यह उल्लेख किया गया है कि प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धाराओं के अंतर्गत अवैध कॉलोनी निर्माण के किसी भी क्षेत्र में किए गए भूखंड का आंतरण या अवैध कॉलोनी निर्माण के किसी क्षेत्र में किए गए भूखंड का अंतरण या फिर अंतरण का कोई भी करार-अनुबंध शून्य माना जायेगा।
इसके साथ ही ऐसे प्रकरणों में नियमों के विरूद्ध निर्मित की गई अवैध कॉलोनी निर्माण के अपराध पर कानूनी रूप से पुलिस में प्रकरण दर्ज करवाया जाएगा। जिसमें जेल और जुर्माना दोनों के प्रावधान है। साथ ही उपरोक्त अधिनियम अंतर्गत कॉलोनी निर्माण करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से निर्मित की गई अवैध कॉलोनी निर्माण के किसी भी क्षेत्र में किए गए भूखंड के अंतरण को शून्य प्रावधानित किया गया है। आने वाले समय में इन्हीं नियमों के आधार पर तहसीलदारों के कार्यालयों से यह कार्रवाहियाँ प्रचलित होंगी।

सामने मौजूद व्यावहारिक परेशानियाँ और सवाल : जवाब की तलाश
(जयलोक)। कलेक्टर द्वारा जारी उक्त आदेश में स्पष्ट रूप से मंशा साफ है कि किसी भी हाल में जिले में अवैध कॉलोनी को पनपने नहीं दिया जाएगा। अवैध कॉलोनी का निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज होंगे उन्हें जेल जाना पड़ेगा। जारी आदेश में कुछ कमी देखते हुए जिले के अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदारों के साथ भटक रहे आवेदकों के समक्ष बहुत सारे व्यवहारिक सवाल और परेशानियां खड़ी हुई है जिनके जवाब तलाशे जा रहे हैं। संभवत इस विषय पर जल्द ही अधिकारीगण कलेक्टर से मुलाकात कर उनसे आगे का मार्गदर्शन मांग सकते हैं। सामने आ रही समस्याओं में बड़ा सवाल यह है कि
1. जो नामांतरण जिले के अंतर्गत आने वाली तहसीलों में होल्ड पर- लंबित रखे हुए हैं उनका क्या होगा? इस बारे में आदेश में स्पष्टता नहीं है।
2.अनुविभागीय अधिकारी तहसीलदार असमंजस में है की 5-6 हजार की संख्या में लंबित नामांतरण के प्रकारणों को एक साथ खारिज किस आधार पर किया जाए। इसका जनता को क्या लाभ होगा?
3.आम जनता जिसने खून पसीने की कमाई से जीवन भर पैसा जोडक़र भूखंड खरीदा, बिल्डर की गलती के कारण वो उलझ गया है, उसको प्रशासनिक राहत कैसे मिल पाएगी।
4. नामांतरण के प्रकरणों में लगातार सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें बढ़ती जा रही है। इनका निराकरण कैसे होगा।
5. टीएनसीपी और रेरा वाली कॉलोनी के भूखंडों के नामांतरण तो हो रहे हैं लेकिन जो लोग अवैध कॉलोनी बनाने वाले बिल्डरों के चक्कर में फंस गए हैं सस्ती कच्ची प्लॉटिंग खरीदने के चक्कर में फंस गए ऐसे हजारों की संख्या में लोग नामांतरण के लिए भटक रहे उनके समक्ष क्या रास्ता है।
6. तहसीलदार प्रकरण खारिज भी करेगा तो अनुविभागीय अधिकारी भी उस पर स्वीकृत की मोहर नहीं लगाएगा,फिर कलेक्टर कोर्ट, कमिश्नरी कोर्ट और राजस्व न्यायालय फिर सिविल न्यायालय लेकिन इंसाफ की कोई गारंटी नहीं है।
7. कई अवैध कॉलोनी के बिल्डरों ने नाली और आम रास्ते की भूमि पर भी लोगों को पजेशन दे दिया है, कई स्थानों पर बिल्डर ने बाजू की लगी सरकारी भूमि पर लोगों को रजिस्ट्री कर फर्जी तरीके से पजेशन देकर निर्माण करवा दिया है।
8. अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री भूखंड की हुई है लेकिन इनके ना तो बटांक है,ना ही किसी प्रकार का ले आउट है ना ही कोई कॉलोनी का नक्शा स्वीकृत है यहां तक की स्थान पर फर्जी बिल्डरों ने उपलब्ध भूमि से अधिक भूमि को भूखंड बना-बनाकर बेच दिया है और अब लोग अपने भूखंड तलाशते फिर रहे हैं। जो वास्तव में हैं ही नहीं।
9. एसडीम, तहसीलदार, पटवारी सभी एक असमंजस में है। आदेश की स्पष्टता को लेकर हर अधिकारी एक दूसरे से बात कर रहा है । सब समझाना चाह रहे हैं कि आगे का एक्शन कैसे करना है।
10. नामांतरण नहीं होने के कारण अवैध बिल्डर इसका फायदा उठाकर एक ही भूखंड को कई लोगों को बेचकर रजिस्ट्री कर रहे हैं और दीवानी मुकदमें
लगातार न्यायालयों में बढ़ते जा रहे हैं। फर्जी बिल्डरों के इस फर्जीवाड़े को कैसे रोका जाए। बिल्डरों से राशि वसूल कर समय सीमा में क्या धोखाधड़ी के शिकार लोगों को वापस दिलवाने में प्रशासन कदम उठाएगा।

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Author: Jai Lok







