
जबलपुर (जयलोक)। कल नगर निगम के समक्ष कांग्रेस पार्षद दल के नेता प्रतिपक्ष के आवाहन पर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ एक सांकेतिक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मुख्य रूप से कांग्रेस पार्षद दल में नेता प्रतिपक्ष को लेकर पनप रहा असंतोष साफ नजर आया। जबलपुर नगर निगम के 79 वार्डों के अंतर्गत 29 वार्ड में कांग्रेस के पार्षद जनता द्वारा निर्वाचित कर सदन में भेजे गए हैं। इन 29 कांग्रेस पार्षदों में से 17 पार्षदों ने कल के सांकेतिक धरना प्रदर्शन से दूरी बनाई और उसकी मुख्य वजह नेता प्रतिपक्ष की कार्यप्रणाली और सभी पार्षद साथियों को बराबर से महत्व ना दिए जाना निकल कर सामने आ रहा है।

कुछ वरिष्ठ पार्षदों ने किया था माना
सूत्रों के अनुसार कल के सांकेतिक धरना प्रदर्शन को लेकर मनमाने तरीके से लिए गए निर्णय पर नेता प्रतिपक्ष को सीधे तौर पर कुछ वरिष्ठ पार्षदों सहित अन्य पार्षदों ने भी इस आंदोलन धरना प्रदर्शन के लिए मना किया था। लेकिन मनमानी का रवैया अख्तियार कर लिए गए निर्णय के आगे किसी भी साथी पार्षद की नहीं सुनी गई।
भाजपा नेताओं की हितों की चिंता कर रहे नेता प्रतिपक्ष
एक वरिष्ठ पार्षद ने नाम उल्लेखित न करने की शर्त पर इस बात पर भी अपनी नाराजगी व्यक्ति की कि कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष सदन में अपने दल के वरिष्ठ नेताओं को छोडक़र सत्ता पक्ष के नेताओं की प्रतिमाओं को लगाने के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। दलगत राजनीति से ऊपर उठने की मंशा अच्छी बात है लेकिन अपने दल के वरिष्ठ नेताओं की चिंता करना और उनके मान सम्मान की रक्षा करना भी नेता प्रतिपक्ष का काम है आखिर क्यों इतने सालों में कभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिमा स्थापना की बात नहीं उठाई गई।

मुद्दों को लेकर किसी से नहीं होता विमर्श
कांग्रेस के पार्षद ने वरिष्ठ नेताओं द्वारा मनमानी कर थोपे गए नेता प्रतिपक्ष के निर्णय को अब अस्वीकार करना शुरू कर दिया है। पहली बार के और वरिष्ठ पार्षदों से चर्चा करने पर यह बात भी निकल कर सामने आई कि कांग्रेस पार्षद दल की बैठक सिर्फ औपचारिकता के लिए बुलाई जाती है। इनमें साथी पार्षदों के द्वारा जनता से जुड़े जो ज्वलंत मुद्दे बताए जाते हैं या सदन में जिन विषयों को प्रमुखता से उठाना है उसकी मांग की जाती है ऐसी मांगों को दरकिनार कर मनमाने निर्णय लिए जाते हैं।
इसलिए सदन में उपस्थित नहीं होते पूरे कांग्रेसी पार्षद
एक बात यह भी निकल कर सामने आई है कि जब जनता द्वारा चुने गए कांग्रेस के 29 पार्षदों में से अधिकांश पार्षदों की बातें कांग्रेस पार्षद दल की बैठक में या सदन में आयोजित होने वाली बैठक के पूर्व होने वाली पार्षदों की बैठकों में इन लोगों के मुद्दे शामिल नहीं किए जाते, इनको अपनी बात कहने का अवसर नहीं मिलता ये लोग भी ऐसी मनमानी के खिलाफ अपनी अनुपस्थिति से अपना असंतोष और नाराजगी व्यक्त करते हैं। यह संदेश कांग्रेस के प्रदेश संगठन तक भी पहुंचा है।
किसी भी प्रकार के आंदोलन प्रदर्शन से पूर्व कांग्रेस के पार्षदों की आम राय नहीं बनती बल्कि मनमाने तरीके से मुद्दे तय कर बिना सबकी सहमति के तारीख और समय तय कर लिया जाता है। अन्य पार्षदों को सिर्फ औपचारिकता के तहत सामान्य रूप से मोबाइल पर एक संदेश भेज कर बता दिया जाता है कि फला तारीख को प्रदर्शन होना है जिसे आना हो आ जाए। वर्तमान की स्थिति स्पष्ट है कि नेता प्रतिपक्ष की कार्य प्रणाली से कांग्रेस के अधिकांश पार्षदों में असंतोष व्याप्त है।
पार्टी से ज्यादा केवल अपनी ब्रांडिंग पर लगा रहे ध्यान
कुछ कांग्रेसी पार्षदों ने नाम ना उल्लेखित करने की बात पर तर्क संगत रूप से यह बात बताई की वर्तमान नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस पार्टी की रीति नीति के बजाय अपनी खुद की ब्रांडिंग पर और अपनी राजनीतिक भूमि मजबूत करने में लगे हुए है। तर्क दिया गया कि पिछले कुछ महीनों से केवल एक क्षेत्र विशेष में नेता प्रतिपक्ष के सारे आंदोलन प्रदर्शन हो रहे हैं। अपने क्षेत्र के पार्षद समय मांगने पर भी मोहताज रह जाते हैं।
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Author: Jai Lok







