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क्या करें बेचारे दरूए, दारू उतरते ही सब कुछ भूल जाते हैं…

(जयलोक)। दारू के बारे में कहा जाता है कि दारू पीकर आदमी सारे गम भुला देता है दारू की बोतल जब वो खोलता है और दो चार पैग जैसे ही उसके भीतर जाते हैं सारे गिले शिकवे, सारे गम हवा हो जाते हैं शायद यही कारण है कि जब कभी इंसान गम में होता है तो उस गम को भुलाने के लिए दारू का सहारा लेता है। फिल्मों में भी आपने देखा होगा जब हीरोइन की शादी हीरो से न होकर किसी और से होने लगती है तो हीरो दारू पीकर पियानो पर बैठकर गम भरा गाना गाता है और महबूबा से पूछता है ‘तू हमारी थी, जान से प्यारी थी, तेरे लिए मैने दुनिया संवारी थी तू औरों की क्यों हो गई’ यानी कुल मिलाकर देखें तो दारू बहुत काम की चीज है और यही कारण है कि सरकार भले ही अहाते बंद कर दे लेकिन दारू बराबर बिकेगी इसका वो पूरा ध्यान रखती है और क्यों न रखें, सरकार का खर्च तो इसी दारू से निकल रहा है ना दारू होती, ना दारू बिकती और ना सरकार को राजस्व मिलता लेकिन अभी पता लगा है कि अब दारुखोर लोग सीएम हेल्पलाइन में भी दारू पी कर कंप्लेंट करने लगे हैं। एक दारुखोर ने सीएम हेल्पलाइन पर कंप्लेंट कर दी की जिस दुकान से वो दारू खरीदता है वो महंगी दारु बेच रहा है रात में कंप्लेंट तो कर दी लेकिन दूसरे दिन जब सीएम हेल्पलाइन से भाई जी को फोन आया कि बताइए कौन सी दुकान से आपने दारू ली थी तो उनका कहना था कि मुझे नहीं मालूम मैंने कौन सी दुकान से दारू ली थी मैं तो जो दुकान सामने दिख जाती है उसी से दारू ले लेता हूं, एक हुजूर तो और भी बढक़र निकले उन्होंने कंप्लेंट करी और दूसरे दिन सीएम हेल्पलाइन से उनके पास फोन आया कि आपने जो कंप्लेंट की है उसका डिटेल बताइए तो बोले ‘कौन सी कंप्लेंट, कहां की कंप्लेंट, मैं काहे के लिए कंप्लेंट करूंगा, भाई जरूर मेरे नाम से किसी ने कंप्लेंट कर दी होगी’ यानी रात में उन्होंने दारू के नशे में चूर होकर कंप्लेंट की और सुबह भूल गए कि उन्होंने किस बात की कंप्लेंट की थी। दारु तो चीज ही ऐसी है जो सब कुछ भुला देती है लोग बाग बेवजह दारू को बदनाम करते हैं दारू यानी सुरापान तो पुरातन काल से चल रहा है देवता भी सुरापान करते थे राजा महाराजा भी सुरा का सेवन करते थे अब उस सुरा को दारू कह कर बदनाम किया जा रहा है और जो पी रहे हैं उन्हें दारुखोर कहा जाता है। अपने को तो सीएम हेल्पलाइन वालों से एक ही बात कहनी है कि जब भी कोई दारू से संबंधित कंप्लेंट करें पहले उससे पूछो कि आपने कितने पैग अंदर कर लिए हैं अगर दो चार पांच पैग की वह बात करता है तो उसकी कंप्लेंट नोट ही ना करो लेकिन दिक्कत तो ये है ना कि पांच पैग पीने के बाद उसको इसी बात का होश नहीं रहेगा कि उसने कितने पैग गले से उतार लिए हैं। बहरहाल दारुखोरों पर ये गजल सबसे सटीक बैठती है ‘हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है, डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है’।

नोरा फतेही सा फिगर
एक खबर आई है कि गाजियाबाद में एक पतिदेव अपनी पत्नी को रोज तीन घंटे एक्सरसाइज करवाते थे उनका कहना था कि उनकी पत्नी का फिगर ‘नोरा फतेही’ जैसा होना चाहिए बेचारी पत्नी तीन-तीन घंटे एक्सरसाइज करके जब हालाकान हो गई तब उसने जाकर पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई कि मेरा पति मुझ पर अत्याचार कर रहा है। अरे भैया दुनिया में सबका फिगर अलग-अलग टाइप का होता है अगर सबका फिगर एक जैसा होने लगे तो फिर बात ही क्या है। कोई मोटा होता है, कोई दुबला होता है, तो कोई लंबा होता है ये बात सही है कि हर कोई बेहतर फिगर चाहता है विशेष कर पति तो ये चाहते हैं कि उनकी पत्नियों का फिगर अच्छा खासा बना रहे लेकिन नोरा फतेही के पास कोई काम थोड़ी है। ना उसे रोटी बनाना है, ना झाड़ू लगाना है, ना बच्चों को पालना है, ना बाजार जाना है, ना अपने पति की सेवा करना है। इंडियन पत्नियों के पास ढेर सारे काम हैं। सास ससुर को भी देखना है घर के सारे काम भी करना है अब वो यह सब देखें कि अपना फिगर सेट करें। गाजियाबाद के उस पति को अपनी एक ही सलाह है कि अगर आप अपनी पत्नी में नोरा फतेही जैसा फिगर देखना चाहते हो तो आपको भी अपने फिगर की तरफ  ध्यान देना होगा वरना अगर आपकी बीवी ने अपना फिगर नोरा फतेही जैसा बना भी लिया और आप, ‘भप्पी लहरी’  जैसे रहे तो फिर जोड़ी कैसे जमेगी यह भी तो सोच लो।

फिर इंतजार शुरू
नेताओं की जिंदगी इंतजार ही इंतजार में गुजर जाती है, किसी का मुकद्दर अच्छा होता है तो उसे कुछ हासिल हो जाता है वरना नब्बे फीसदी नेता और कार्यकर्ता सिर्फ  इंतजार का ही इंतजार करते रहते हैं। बीस महीने हो गए डॉक्टर साहब की सरकार को, कितनी बार निगम, मंडलों, आयोगों, प्राधिकरणों में नियुक्तियां की चर्चा चलती रही तमाम नेता कार्यकर्ता सफेद कुर्ता पजामा पहन के बड़े-बड़े नेताओं की परिक्रमा में जुट गए कि हो सकता है इस बार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, या सदस्य ही बन जाएं लेकिन यह ‘लॉलीपॉप’ ही रहा अब एक बार फिर नेताओं को ऊपर से लॉलीपॉप दिखाया गया है कि बहुत जल्द निगम मंडलों में नियुक्ति कर दी जाएंगी। एक बार फिर उन निराशा नेताओं में उत्साह का वातावरण निर्मित हो गया है, अपने-अपने आकाओं के दरवाजे पर उन्होंने दस्तक देना शुरू कर दी है कि भैया हम सुबह से लेकर रात तक आपके दरवाजे पर तैनात रहते हैं, आपकी जय जयकार करते हैं, आपका झंडा बैनर लगाते हैं, कम से कम कुछ तो दिलवा दो अध्यक्ष ना सही उपाध्यक्ष सदस्य कुछ तो बनवा दो। बड़े नेता भी अपने छुटभैये नेताओं को आश्वासन दे देते हैं कि चिंता मत करो जब तक मैं हूँ कुछ ना कुछ हो ही जाएगा। चर्चा तो फिर शुरू हो गई कि बहुत जल्द नियुक्तियाँ हो जाएंगी लेकिन अभी तक का जो रिकॉर्ड है उसको देखते हुए लगता है कि यह सिर्फ  लॉलीपॉप है जो बीच-बीच में इन नेताओं के मुंह में ठूंस दिए जाते हैं कि चूसो और अपना मुंह बंद रखो।

सुपर हिट ऑफ  द वीक
‘तुम मुझे ऐसी दो बातें बोलकर दिखाओ जिसमें से एक को सुनकर मैं खुश हो जाऊं और दूसरी को सुनकर नाराज’ श्रीमती जी ने श्रीमान जी से कहा
‘पहली बात तुम मेरी जिंदगी हो जानेमन और दूसरी बात लानत है ऐसी जिंदगी पर’ श्रीमान जी ने उत्तर दे दिया।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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