
जबलपुर (जय लोक)। 5 जनवरी 2024 को जबलपुर में कलेक्टर का पदभार ग्रहण करने वाले आईएएस अधिकारी दीपक सक्सेना ने अपने कार्यकाल और अपनी सख्त कार्य शैली कार्यप्रणाली से प्रशासनिक हल्के में अमित छाप छोड़ दी है। शिक्षा माफिया और खाद्यान्न चोरों के खिलाफ उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए लंबी मुहिम चलाई। शायद ही यह पहला मामला था जब जबलपुर जिले में किसी कलेक्टर के निर्देश पर और उनके द्वारा संज्ञान लेने के बाद 70 से अधिक मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग, शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, खनिज विभाग, वेयरहाउस राजस्व विभाग, जिला पंचायत, लॉ एंड ऑर्डर से संबंधित मामलों में यह शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। यहाँ तक कि कल उनके प्रमोशन के आदेश वाले दिनांक को भी उनके निर्देश पर 10 लोगों के खिलाफ मूंग और उड़द की खरीदी में अनियमिताएँ करने पर फिर एफआईआर दर्ज हुई है।
स्कूल फीस वृद्धि वाले प्रकरण में कलेक्टर न्यायालय से जारी हुए आदेशों को विभिन्न स्कूल संचालकों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। लेकिन जो जाँच, जो तथ्यात्मक बिंदु और जो अनियमिताएं कलेक्टर की जाँच के दौरान शिक्षा माफिया का रूप ले चुके कुछ स्कूल संचालकों और प्रबंधन के खिलाफ निकलकर सामने आई थी उसे दूसरे पक्ष के वकील भी उच्च न्यायालय में खारिज नहीं करवा पाए। जिला प्रशासन की जाँच को तगड़ा ही माना जाएगा क्योंकि जिनके खिलाफ भी मामले दर्ज हुए उनको जमानत लेने में दो-तीन महीने लग गए। कलेक्टर द्वारा फीस वापसी के जो आदेश जारी किए गए थे वह आज भी लागू हैं लेकिन उच्च न्यायालय ने अग्रिम सुनवाई हेतु उन आदेशों के परिपालन पर रोक लगाकर रखी है। इसकी मुख्य वजह थी कि जो टीमें शिक्षा घोटाले और फीस की मुनाफाखोरी के संबंध में जाँच कर रही थी उसकी प्रतिदिन दो बार मॉनिटरिंग का कार्य स्वयं कलेक्टर रहते हुए दीपक सक्सेना करते थे। किस दिशा में कैसी जाँच करना है किन दस्तावेजों की जाँच पड़ताल करना है इस सब की रूपरेखा उन्होंने बनाई थी।
इसके बाद खाद्यान्न चोरी से जुड़े मामलों में भी उन्होंने ताबड़तोड़ कार्रवाई करवाई वेयरहाउस संचालकों से लेकर ट्रांसपोर्ट करने वाले लोग और शासन स्तर पर इन अनियमितताओं में शामिल अधिकारी कर्मचारी किसी को भी नहीं बख्शा गया सबके खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज करवाए गए। अवैध खनन करने वालों पर भी बड़ी कार्यवाही उनके द्वारा की गई।

रिकॉर्ड रूम का नवीनीकरण प्रदेश में बना मॉडल
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने अपने कार्यकाल के दौरान जबलपुर कलेक्टरेट में स्थित सालों पुराने रिकॉर्ड रूम को नया जीवन दिया। यह रिकॉर्ड रूम अब अगले 100 साल के लिए जीवित हो गया। मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश के कई बड़े नेता और कई बड़े अधिकारी इसका अवलोकन करने आए उन्होंने इस नवाचार की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के सभी जिला कार्यालय में लागू करने के लिए रोल मॉडल बताया।
कलेक्टर दीपक सक्सेना की कार्यवाही से जहाँ पर मुनाफाखोरी और गड़बड़ी कर प्रशासन से चोरी करने वाले लोगों के बीच में हडक़ंप मचा हुआ था वही इन सख्त कार्यवाहियों का पूरे प्रदेश और देश में सकारात्मक समाचार प्रवाहित हुए। फीस वसूली के संबंध में स्कूल माफिया के खिलाफ की गई कलेक्टर की कार्यवाही को पूरे देश में सराहना मिली।

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Author: Jai Lok







