
नरसिंहपुर, (जयलोक)।
द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज का 67वां जन्मोत्सव सोमबार को भव्य शोभायात्रा और विविध धार्मिक आयोजनों के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं हर्षोल्लास से मनाया गया । शोभायात्रा में ढोल नगाड़े, बैंड बाजे, शहनाई आगे आगे चल रहे थे। जहां भक्त पूज्य गुरुदेव के जन्म उत्सव पर झूमते नजर आए जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया यह शोभायात्रा त्रिपुरालय से प्रारंभ होकर भगवान सिद्धेश्वर महादेव, लक्ष्मी नारायण मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, समाधि मंदिर होते हुए गंगा- सरोवर पंडाल पहुँची, जहाँ पूज्य महाराज श्री का भक्तों और गणमान्य नागरिकों ने फूलमालाओं व जयघोषों के बीच भव्य स्वागत किया ।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से संत-महात्माओं में आचार्यमहामंडलेश्वर रामकृष्णानंद जी महाराज, पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द् जी, ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी, ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानंद जी, ब्रह्मचारी अचलानंद जी, ब्रह्मचारी विमलानंद जी, ब्रह्मचारी ध्यानानंद जी, ब्रह्मचारी सहजानन्द जी, ब्रह्मचारी विशुद्धानंद जी, ब्रह्मचारी धारानंद जी सहित अनेक दंडी संन्यासी एवं साधु-संत उपस्थित रहे। गणमान्य अतिथियों में मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति, पूर्व विधायक सुनील जायसवाल सहित अनेक सामाजिक-धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया। सुबह से ही मंदिरों में पूजन-अर्चन का क्रम चलता रहा । पूज्य महाराज श्री ने भी सिद्धेश्वर महादेव, लोधेश्वर मंदिर, समाधि मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर में विधिवत पूजन-अर्चन किया।

विशेष अर्पण एवं भक्ति भाव
खरया परिवार की ओर से शंकराचार्य जी को चांदी की रजत पादुका, भगवती का सोने की बजीथी, चांदी का फोटो फ्रेम अर्पित किया गया। महागणपति का अर्चन 2100 शुद्ध घी के लड्डुओं से अजीत, नीरज, पंकज, अमित, अनीस, शुभ, हर्ष और कान्हा खरया द्वारा किया गया।
राजेश पांडे (पप्पू भैया) द्वारा छप्पन भोग अर्पित किए गए । अन्य भक्तों ने भी नृत्य-कीर्तन, भजन- संध्या और भव्य दीप अर्पण जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए ।
प्रवचन एवं आशीर्वचन
आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा,गुरु ही जीवन का सच्चा पथप्रदर्शक है। शंकराचार्य परंपरा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, सत्य और करुणा के मार्ग पर स्थापित करना है । पूज्य सदानंद सरस्वती जी महाराज इस परंपरा के सजीव स्वरूप हैं, जिनके आशीर्वाद से असंख्य जन आध्यात्मिक प्रेरणा पा रहे हैं। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी ने कहा,हम सभी शिष्यों का सौभाग्य है कि हमें ऐसे गुरु मिले, जिन्होंने हमें केवल शास्त्र नहीं पढ़ाए, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाई। गुरुदेव का जीवन सादगी, त्याग और सेवा का प्रतीक है। पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा,बड़े उत्साह के साथ ये कार्यक्रम आप लोगों ने आयोजित किया, और स्वागत भी किया, ये आपने अपनी संस्कृति का और संस्कारों का स्वागत किया है। मनुष्य का जन्म क्यों होता है ये जानने के लिए ही उसका जन्म होता है।
जन्म तो सभी को होता है पशु, पक्षी सभी प्रकार के प्राणियों का जन्म होता है, मनुष्य जन्म की विशेषता क्या है ? जन्मदिन मनाने का फल क्या है कि हम आवागमन के चक्र से मुक्त हो जाए कि अब हमारा जन्म नहीं होना चाहिये – पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनम् । इससे हमें मुक्त होना है, यही मानव जन्म का परमफल है।
शंकराचार्य जी ने कहा कि जब हम सबसे पहले 1973 में यहा आये तो ज्योतिरीश्वर ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय में संस्कृत पढने आये थे। आठवीं का विद्यार्थी क्या पुरुषार्थ करेगा ? एक ही जिज्ञासा थी की पढऩा है। तो वहाँ बहुत बड़े पुरुषार्थ की बात तो सिद्ध नहीं होती है, प्रारब्ध और अनुग्रह के अनुसार ही फ़ल् प्राप्त होता है। ईश्वर का अनुग्रह और सद्गुरु की प्राप्ति, गुरु का उपदेश हमारा ज्ञान, ज्ञान का फल गुरु के चरणों में निष्ठा, उसी का परिणाम ये सिंहासन। इसलिए ये होना चाहिए हमारे अन्दर की हम मनुष्य बनें हैं तो हमें क्या प्राप्त करना है। ऐसी वस्तु प्राप्त करनी है, जो चौरासी लाख में योनियों में कोई दूसरा शरीर प्राप्त नहीं कर सकता। उस वस्तु को मनुष्य ही प्राप्त कर सकता है। हम यहाँ आये बहुत लोगों ने हमारी सहायता की गुरूजी का अनुग्रह तो था ही सब लोगों ने हमे आगे बढ़ाया आगे बढ़ाकर हमे यहाँ तक स्थापित किया। कोई न कोई हमें चलाने वाला होता है आँगन है घर है पर दादा-दादी हमें उंगली पकडक़र हमें चलाते हैं इसी तरह हमारे जो सहयोगी होते हैं वो गुरु रूप में होते हैं मित्र रूप में होते हैं सहपाठी रूप में होते हैं वो चलना सिखाते हैं।
हम चलना सीखते हंै हम चलते हैं। शंकराचार्य की गद्दी कोई आमगद्दी नहीं है, यह धर्म, वेद और संस्कृति की रक्षा का संकल्प है। मुझे आगे बढ़ाने में अनेक गुरु भाइयों का योगदान रहा है— विशेष रूप से ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी, आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद जी, ज्योतिषपीठ के पंडित रविशंकर द्विवेदी जी, वृंदावन के सचिदानंद शास्त्री जी सहित अन्य गुरुभाइयों का सहयोग अमूल्य है । आज जो यह छोटा-सा पौधा वटवृक्ष बन चुका है, उसे परम पूज्य ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने तप, त्याग और आशीर्वाद से सींचा है।

ज्योतिषपीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का संदेश
मुख्य अतिथियों के शुभकामना संदेश
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का जन्मोत्सव पर सन्देश
द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि यह जीवन प्रभु की अमूल्य देन है, इसे धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलकर सार्थक बनाना ही सच्चा उत्सव है । जन्मदिन पर अपने देवस्थान पर घी का दीपक जलाएं गुरु स्थान पर जाकर उनका पूजन करें यही सनातन धर्म सिखाता है।
ज्योतिषपीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का संदेश
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि शंकराचार्य परंपरा केवल एक पदवी नहीं, बल्कि यह वेद, शास्त्र और धर्म की रक्षा का दायित्व है। पूज्य सदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने आचार और विचार से इस दायित्व का निर्वहन उत्कृष्ट ढंग से किया है । उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
मुख्य अतिथियों के शुभकामना संदेश
मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा, पूज्य शंकराचार्य जी महाराज सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को स्थापित करने में अद्वितीय भूमिका निभा रहे हैं। उनका आशीर्वाद हम सभी के लिए अमूल्य है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने कहा, गुरुदेव का जीवन त्याग, सेवा और ज्ञान की जीवंत मिसाल है। जन्मोत्सव पर हम प्रार्थना करते हैं कि उनका आशीर्वाद युगों-युगों तक हम पर बना रहे।पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल ने कहा, गुरुदेव ने न केवल धर्म की पताका को ऊँचा किया है, बल्कि संस्कृति की जड़ों को सींचने का कार्य भी निरंतर किया है। गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश ने कहा, गुरुदेव के मार्गदर्शन से गोटेगांव की धरती और भी पावन हो गई है। भक्तों ने गुरुदेव के जन्मोत्सव पर जयघोष करते हुए पुष्पवर्षा की और दीर्घायु की मंगलकामनाएँ की । पूरे नगर में धार्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण व्याप्त रहा। कार्यक्रम उपरान्त गुरु भक्तों को एवं बाहर से आए हुए लोगों को मिष्ठान का वितरण किया गया लोगों ने आतिशबाजी कर झूमते गाते पूज्य महाराज श्री का जन्मोत्सव मनाया।
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का जन्मोत्सव पर सन्देश
द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि यह जीवन प्रभु की अमूल्य देन है, इसे धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलकर सार्थक बनाना ही सच्चा उत्सव है । जन्मदिन पर अपने देवस्थान पर घी का दीपक जलाएं गुरु स्थान पर जाकर उनका पूजन करें यही सनातन धर्म सिखाता है।
Author: Jai Lok







