
बेवजह धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश को शब्दों के हेर फेर की समझदारी से निपटाया
जबलपुर (जयलोक)।संभाग में शायद यह पहला अवसर था जब जबलपुर में पदस्थ अतिरिक्त जिलाध्यक्ष आईएएस अधिकारी मिशा सिंह को जबलपुर जिले से लगे अन्य संभाग के दमोह जिले का प्रभारी कलेक्टर बनाकर पदस्थ किया गया। उनका यह 10 दिन का कार्यकाल चुनौती पूर्ण रहा है। पूरे प्रभार के साथ दमोह जिले की व्यवस्था संभालने आईएएस अधिकारी मिशा सिंह ने 10 सितंबर को कलेक्टर के पद का कार्यभार ग्रहण किया था। प्रभार ग्रहण करने के दूसरे दिन ही एक बड़े ही गंभीर मामले की शिकायत उनके समक्ष आई।
मामला यह था कि तेंदूखेड़ा में कुछ लोगों ने एकत्रित होकर गैंग बना लिया था और उन्होंने फर्जी सील, हस्ताक्षर और टोकन बनाकर खाद्य बोरी डबल लॉक मंडी में एक दो करके प्राप्त कर रहे थे। वो लोग 18 अगस्त से इस प्रकार की गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे और खाद की बोरी चोरी कर रहे थे।
खाद के वितरण की इस समय पूरे प्रदेश में काफी किल्लत है और शासन प्रशासन इस ओर बहुत गंभीरता से ध्यान देकर वितरण कार्य करवा रहा है। इस मामले में आरोपी सजल साहू ने अपने साथियों के साथ मिलकर यह पूरी योजना बनाई थी और पूनम लोधी नामक महिला से उक्त शासकीय सील फर्जी तरीके से बनवाई गई थी। यह लोग बिना पैसा जमा किए सीधे नकली टोकन बनाकर वितरण की लाइन में लग जाते थे और एक दो बोरी करके यह घोटाला कर रहे थे। इस मामले की पूरी तहकीकात करने के बाद दमोह कलेक्टर के रूप में मिशा सिंह ने तत्काल इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई और आरोपितों को गिरफ्तार करवाया।
बेवजह की बात को नहीं बनाने दिया मुद्दा प्रभावित नहीं होने दी बच्चों की शिक्षा
मिशा सिंह के इन 10 दिनों के कार्यकाल के दौरान एक और चुनौती पूर्ण समस्या दमोह जिले में उत्पन्न हुई। धार्मिक सौहार्द को बिगाडऩे वाले कुछ लोग सक्रिय हुए और एक शासकीय शाला को निशाना बनाते हुए उसके नाम को लेकर आपत्ती कर विरोध दर्ज करने एवं जिले की फिजा खराब करने का कार्य होने लगा। मामला बेवजह बेफिजूल का था जिसमें सालों पुराने नाम को धार्मिक राजनीति से प्रेरित होकर कुछ लोग मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे थे। मामला तूल पकड़ता इसके पूर्व ही प्रभारी कलेक्टर मीशा सिंह ने मौके का जायजा लिया और पूरे मामले को समझा। ग्राम खमरिया पंचायत के अंतर्गत एक शासकीय स्कूल था जिसमें तकरीबन 40-45 बच्चे पढ़ते हैं।

उस स्कूल के नाम के बोर्ड पर कई सालों से टोला इस्लाम पूरा लिखा हुआ था। इस बात को ही आपत्ति का केंद्र बनाया गया और कई तरह के आरोप लगाए जाने लगे। शासकीय स्कूल में सभी धर्म के सम्मान स्वरूप हर धर्म से जुड़े नारे दीवारों पर अंकित थे। लेकिन मुद्दे में सिफ एक धर्म विशेष के नारों पर आपत्ति व्यक्त कर विरोध दर्ज कराया गया।
बतौर कलेक्टर आईएएस अधिकारी मीशा सिंह ने बेहद ही समझदारी से त्वरित निर्णय लेते हुए बिना कोई अधिक बदलाव किए सिर्फ शब्दों का हेरफेर करवाया और उन्हें आगे पीछे कर पूरी समस्या का निराकरण कर दिया। आपत्ति के अनुसार बोर्ड में टोला इस्लाम पुरा पहले खिला हुआ था। जिसे सुधार करवा के शासकीय नवीन प्राथमिक शाला खमरिया पहले और बड़े शब्दों में अंकित करवा दिया गया और कोष्टक में इस्लामपुरा लिखवा दिया गया। सिर्फ इस छोटी से समझदारी पूर्ण लिए गए निर्णय से यह बेमतलब के मुद्दे धार्मिक फिज़ा बिगडऩे का विषय नहीं बन पाया और स्थिति सामान्य हुई। ना ही बच्चों की पढ़ाई पर इसका असर हुआ और ना ही विघ्न संतोषी तत्व इस मामले को गरमा पाए।

Author: Jai Lok







