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बिना सामने आए बड़े-बड़े कामों को अंजाम देते हैं बाबू चंद्रमोहन

सच्चिदानंद शेकटकर, प्रधान संपादक,

संदर्भ : आज जन्म दिवस

जबलपुर शहर की राजनीति में हनुमानताल स्थित बखरी राजनीति का एक बड़ा केन्द्र रहा है। आजादी के पहले और आजादी के बाद भी इस बखरी के आकर्षण भारतीय संसद के पितामह सेठ गोविंददास जी हुआ करते थे। वे 50 वर्षों तक संसद के सदस्य रहे। सेठ गोविंद दास जी के पुत्र सेठ मनमोहनदास तथा सेठ जगमोहन दास तथा उनकी पुत्री श्रीमती रत्न कुमारी भी राजनीति में सक्रिय रहे। सेठ गोविंददास जी जबलपुर के सांसद चुने जाते रहे तब कुछ समय पश्चात उनके छोटे पुत्र सेठ जगमोहन दास केेंट विधानसभा से विधानसभा का चुनाव लड़े और जीते, वे मंत्री भी बने। सेठ जगमोहन दास के निधन के बाद उनके बड़े भाई सेठ मनमोहन दास केंट से विधायक चुने गए और मंत्री भी बने। मनमोहनदास जी के निधन के पश्चात उनके सुपुत्र बाबू चंद्रमोहन दास केंट से विधानसभा का चुनाव लड़े और वे भी मंत्री बने। इस तरह सेठ गोविंददास जी का परिवार लगातार राजनीति में सक्रिय रहा।  केंट से जब भारतीय जनता पार्टी ने ईश्वरदास रोहाणी को उम्मीदवार बनाया तो उनका मुकाबला बाबू चंद्रमोहनदास से हुआ। बाबू चंद्रमोहन दास चुनाव जीतने के बाद अपना बर्चस्व बनाए रखेंगे यह बात केंट के कुछ प्रभावी कांगे्रसियों को पसंद नहीं आई और उन्होंने बाबू चंद्रमोहन दास को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाबू चंद्रमोहनदास प्रदेश की सबसे बड़ी निजी शिक्षण संस्था हितकारिणी सभा के शुरू से ही आधार स्तंभ रहे हैं। वे हमेशा बिना सामने आए बड़े-बड़े कामों को अंजाम देते आ रहे हैं। हितकारिणी सभा की ओर से उन्होंने शहर को कई बड़ी बड़ी शिक्षण संस्थाओं की सौगात भी दिलाई है। उन्होंने शहर में पहला निजी इंजीनियरिंग कॉलेज और पहला डेंटल कॉलेज स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है। बाबू चंद्रमोहनदास ने जबलपुर क्लब को नया व्यवसायिक रूप भी दिलवाया। वहीं सिविक सेंटर में शहर के दवा व्यापारियों के लिए एक विशाल दवा बाजार भी निर्मित कराया। वहीं उन्होंने गौरीघाट रोड पर एक विशाल शॉपिंग काम्पलेक्स भी निर्मित कराया है। इसके अलावा उन्होंने अपने परिवार जनों की संपत्तियों का भी बखूबी उपयोग कराने में योगदान दिया है। शहर के मध्य में बना भव्य गोपाल सदन भी उन्हीं के प्रयासों से बना है और इसी तरह का एक भवन उनके प्रयासों से तिलवाराघाट में अभी कुछ समय पूर्व ही बना है। वहीं बाबू चंद्रमोहनदास शहीद स्मारक ट्रस्ट के भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैैं और शहीद स्मारक  भीतर और बाहर कई महत्वपूर्ण काम करवा चुके हैं। आज बाबू चंद्रमोहनदास जी अपने यशस्वी जीवन के 75 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं उन्हें जयलोक परिवार की ओर से जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभमकानाएं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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