
यशोवर्धन पाठक

बड़ी भली है अम्मा मेरी ताजा दूध पिलाती है
मीठे मीठे फल लेकर मुझको रोज खिलाती है
(जयलोक) अपने समय में स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल उपरोक्त मनमोहक काव्य पंक्तियों के रचयिता , सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं शिक्षाविद स्व श्री इन्द्र बहादुर खरे ने अपनी साहित्य साधना से राष्ट्रीय स्तर पर जबलपुर को गौरवान्वित किया था। खरे जी ने अपने साहित्यिक जीवन में गद्य और पद्य में जो कुछ भी साहित्य सृजन किया उसने उनके समय में तो अपार लोकप्रियता अर्जित की ही बल्कि वह आज भी चर्चित, पठनीय और प्रभावी है ।
हितकारिणी कालेज के प्रारंभिक काल के प्रसिद्ध प्राध्यापक , जबलपुर के माडल हाई स्कूल के प्रतिष्ठित शिक्षक एवं विजन के फूल और भोर के गीत जैसी अनेक काव्य कृतियों के रचियता स्व. श्री इन्द्र बहादुर खरे अपने समय में अनेक साहित्यिक पुस्तकों के प्रतिष्ठित लेखकों के रूप में चर्चित रहे हैं लेकिन यह भी स्मरणीय है कि उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के लिए अपने समय में ऐसी पाठ्य पुस्तकों का लेखन किया जो कि अपने समय में काफी उपयोगी और चर्चित रहीं।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि स्व श्री इन्द्र बहादुर खरे जी की अन्य पठनीय और लोकप्रिय कविताओं को पूर्व में स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था जिनमें बड़ी भली है अम्मा मेरी, ताजा दूध पिलाती है, शिक्षा जगत में काफी लोकप्रिय और प्रभावी मानी जाती थी।
इस पुस्तक के प्रकाशन से आदरणीय स्व. श्री इन्द्र बहादुर खरे का प्रेरक और प्रणम्य व्यक्तित्व और भारत के ऐतिहासिक महत्व की बातें दोनों ही दिल और दिमाग में ताजी हो गईं। रानी दुर्गावती की वीरता और बलिदान पर श्री इन्द्र बहादुर खरे का खंड काव्य अपने समय में काफी चर्चित हुआ और इसकी कवितायें रानी दुर्गावती की वीरता से जनमानस को परिचित कराने में सहायक सिद्ध हुईं। इन कविताओं की पठनीयता और प्रासंगिकता आज भी पाठकों को प्रभावित करती हैं। रानी दुर्गावती की 501वीं जयंती के पावन अवसर पर कविवर श्रद्धेय स्व. श्री इन्द्र बहादुर खरे के 1943 में प्रकाशित खंड काव्य रानी दुर्गावती की दो कविताएं पाठकों के समक्ष अवलोकनार्थ सादर प्रस्तुत हैं ।
सडक़ पर मिला घायल हवेली उल्लू, पंखों से बह रहा था खून, रस्सी से बंधे थे पैर
Author: Jai Lok







