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सफाई व्यवस्था बिगडऩे का हल्ला मचा रहे नेताप्रतिपक्ष 29 कांग्रेस पार्षद फिर क्यों दे रहे ठेकेदार को संतुष्टि पत्र

यही सवाल भाजपा के पार्षदों से भी पूछ रहे हैं शहर के नागरिक

जबलपुर (जयलोक)। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर आए दिन हंगामा होता रहता है। सफाई व्यवस्था को सुचारू रखने का महापौर और नगर निगम आयुक्त का जिम्मा है। इस जिम्मे को पूरा करने के लिए एक व्यवस्था बनाई गई है कि हर वार्ड के पार्षद को उनके क्षेत्र में हो रही सफाई व्यवस्था का संतुष्टि प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। इस संतुष्टि प्रमाण पत्र के आधार पर सफाई कर्मचारी और उसके ठेकेदारों को नगर निगम भुगतान करता है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि जबलपुर शहर के 79 वार्ड के अंतर्गत जो भी कार्य हो रहे हैं उसका सत्यापन उनके वार्ड के पार्षद करें।
अब यहां बड़ा सवाल उठ रहा है कि नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सफाई व्यवस्था को लेकर आए दिन प्रदर्शन करते हैं, जनता के बीच में वाह वही लूटने की और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आए दिन सडक़ों पर खड़े होकर वीडियो बनाते हैं और पूरे नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगाते हैं। सफाई व्यवस्था इतनी खराब है तो नगर निगम के 29 कांग्रेसी पार्षद जिसमें खुद नेता प्रतिपक्ष भी शामिल है संतुष्टि प्रमाण पत्र सफाई ठेकेदार को जारी क्यों करते हैं। एक तरफ वह वीडियो और बयान देकर यह बात साबित करते हैं कि जबलपुर नगर निगम सफाई व्यवस्था में असफल है तो फिर सफाई ठेकेदार को संतुष्टि का प्रमाण पत्र क्यों दिया जाता है।

बड़ी बात यह भी है कि सत्ता पक्ष में शामिल भाजपा पार्षद भी संतुष्टि प्रमाण पत्र देते हैं क्योंकि बिना उसके सफाई ठेकेदार को और कर्मचारियों को भुगतान होने की स्थिति बन ही नहीं सकती। जब महापौर और आयुक्त ने एक व्यवस्था बनाई है कि संबंधित वार्ड का पार्षद उनके क्षेत्र में हो रही सफाई व्यवस्था से संतुष्ट होगा और उसके बाद संतुष्टि पत्र पर साइन करके देगा तब ही सफाई ठेकेदार का भुगतान होगा। अब जब सभी पार्षद अगर सफाई व्यवस्था से संतुष्ट होने का प्रमाण पत्र हर महीने देते हैं तो विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष सफाई व्यवस्था को लेकर उंगली क्यों उठाते हैं और जब उंगली उठाते हैं तो इस बात का मूल्यांकन क्यों नहीं होता कि उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था बराबर हो रही है कि नहीं। शहर के 79 वार्ड में से 29 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद हैं और यह 29 कांग्रेस के पार्षद अगर अपने यहां वार्डों में चल रही सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है तो फिर वह संतुष्टि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर क्यों करते हैं। यह सारे सवाल अब जनता पूछने लगी है जनता इसलिए पूछ रही है क्योंकि गंदगी में जनता को अधिक समय बिताना पड़ता है। वार्ड पार्षद आते हैं और सत्ता पक्ष को गरिया के उनके ऊपर दोषारोपण करके आम आदमी को और अपने क्षेत्र की जनता को भ्रामक जानकारी दे देते हैं लेकिन उसे महीने की सफाई व्यवस्था या उस हफ्ते की सफाई व्यवस्था को लेकर वही पार्षद संतुष्टि प्रमाण पत्र भी जारी कर देते हैं। जनता स्वयं समझदार है कि किसके कहने पर इसके लाभ और नुकसान पर या कार्य हो रहा है।

बड़ी चोरी का माध्यम बनती है छोटी रजामंदी
अब सफाई ठेकेदारों के काले पीले काम पर बात आती है तो कचरे के टनों के हिसाब पर उंगली उठती है। जबलपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 79 वार्डो से रोजाना टनों की मात्रा में कचरा उठाया जाता है। इसकी लोडिंग अनलोडिंग वाहनों के संग्रहण की संख्या और इस कार्य में लगे कर्मचारियों की संख्या को लेकर आए दिन हाजिरी के खेल के आरोप लगते हैं। उनके बिलों में संख्या भरपूर दिखती है लेकिन जमीनी स्तर पर यह नजर नहीं आती।

आयुक्त ने खुद पकड़ा था 40 की हाजिरी में 13 का खेल
विगत दिवस बिलहरी क्षेत्र में अल सुबह जबलपुर नगर निगम के आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ औचक निरीक्षण पर निकले थे यहां पर इन्होंने जब सफाई कर्मचारी की अटेंडेंस ली तो  सफाई ठेकेदारों द्वारा सबकी मिली भगत से किया जा रहा चोरी का खेल पकड़ में आ गया। इस स्थान पर 40 सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति होना थी लेकिन वास्तव में 13 सफाई कर्मचारी ही पाए गए। यह खेल सालों से चल रहा है। जहां ड्यूटी में लगाए गए सफाई कर्मचारियों की गणना कागज में तो दर्ज होती है लेकिन वास्तविक स्तर पर दर्ज नहीं होती। इनका भुगतान कागजों पर पूरा निकाला जाता है लेकिन कर्मचारियों को पूरा भुगतान नहीं मिलता और उनका भुगतान सफाई के खेल में शामिल लोगों में आपस में बट जाता है।

5 लाख महीने का हल्ला!
पूरे नगर निगम में हल्ला है कि 5 लाख में आवाज उठाने वाले जिम्मेदार महीने की हिस्सेदारी के गुलाम हो गए हैं। चर्चा इस बात की भी है कि यह बंदर बांट का काम इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पैसा खाने वालों को यह भी पता है कि उन्हें दोबारा अवसर नहीं मिलने वाला। इसलिए अधिक से अधिक हराम की कमाई वसूल करने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। जल्दी चर्चाओं के दौर में उनके नाम भी उजागर होकर सामने आ जाएंगे। ठेकेदार मुखर है और सत्ता पक्ष भी। यही लोग जल्द ही इन नामों का खुलासा करेंगे। एक सफाई ठेकेदार किसको कितना पैसा बांट रहा है वह कैमरे पर तो नहीं बोलता लेकिन नगर निगम के हर गलियारे में खड़े होकर छाती ठोक ठोक कर बोलता है कि लाल पीली बत्ती से लेकर सर्टिफिकेट जारी करने वालों तक को वह किस हिसाब से पैसे  बांटता है। सफाई व्यवस्था की बंदरबांट किसी दिन विस्फोटक रूप में सामने आ सकती है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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