
जबलपुर (जयलोक)। बिजली कंपनियों द्वारा शहर भर में पुराने मीटरों को बदलकर नए स्मार्ट मीटर लगाने का काम कराया जा रहा है। इन मीटरों को लेकर लगातार शिकायतों का दौर भी चल रहा है। अब जनसंगठनों ने भी स्मार्ट मीटरों के एक्यूरेसी याने उनके सही होने पर संदेह जाहिर किया है। जनसंगठनों का कहना है कि यह संदेह इस कारण किया जा रहा है क्योंकि बिजली कंपनियों ने स्मार्ट मीटरों की टेक्रिकल रिपोर्ट का अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।
उक्त आरोप नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, महिला समिति, सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन, मानव अधिकार क्रांति संगठन, पेंशनर समाज आदि संगठनों ने बिजली कम्पनियों पर लगाया है। डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व में मैकेनिकल मीटरों को अलग कर उनके जगह इलेक्ट्रॉनिक मीटर इसलिए लगाये थे, क्योंकि मैकेनिकल मीटरों में मार्जिन ऑफ एरर 3 से 5 प्रतिशत था, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीटरों में वह केवल 1 प्रतिशल था।

किंतु अब जब इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं तो इन नये मीटरों की एक्यूरेसी तथा मार्जिन ऑफ एरर बताया नहीं जा रहा है। इन मीटरों की टेक्निकल रिपोर्ट को यदि सार्वजनिक किया जाता है तो यह सभी बिंदु उपभोक्ताओं के सामने आ जाते लेकिन बिजली कम्पनियों की चुप्पी से संदेह पैदा हुआ है।

विद्युत सप्लाय कोड का उल्लंघन – डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि विद्युत प्रदाय संहिता के क्लॉज 8.14 में स्पष्ट निर्देश हैं कि मीटरों के एक्यूरेसी की जिम्मेदारी पूर्णत: बिजली कम्पनियों की है। लेकिन बिजली कम्पनियों न बिजली सप्लाय कोड का उल्लंघन किया, अत: इसकी शिकायत नियामक आयोग को ई-मेल भेजकर की गई है।

जनसंगठनों की बैठक में रजत भार्गव, टी. के. रायघटक, डी. के. सिंह, संतोष श्रीवास्त, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, सुभाष चन्द्रा, डी. आर. लखेरा, पी.एस. राजपूत, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, एड. जी.एस. सोनकर, दिलीप कुंडे, हरजीवन विश्वकर्मा, के.सी. सोनी, अशोक नामेदव, मोहन श्रीवास्तव, अर्जुन कुमार, उमा दाहिया, माया कुशवाह, नंदकिशोर सोनकर, एड. बृजेश साहू, लखनलाल प्रजापति, राममिलन शर्मा आदि उपस्थित थे।
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Author: Jai Lok







