असंगघोष : दलित कविता का तेजस्वी स्वर –जगदीश जटिया

राजेंद्र चंद्रकांत राय जयलोक वह सत्तर का दशक था, जब एकाएक हम लोगों ने मराठी भाषा के विद्रोही दलित कवि नामदेव ढसाल की मशाल की तरह समाज की विरूपताओं को जलाकर खाक कर देने वाली कविताओं के अंधड़ को महसूस किया था। फिर दलित कवियों की एक पूरी नई पीढ़ी ही सामने आई, और उसने … Continue reading असंगघोष : दलित कविता का तेजस्वी स्वर –जगदीश जटिया