परमात्मा ही जगत् के रूप में अभिव्यक्त हुआ है
अद्भुत बात है कि जो इन्द्रियों से जानने में आता है वह परिवर्तनशील है, नष्ट होता है इसलिए असत् है और जो इन्द्रियों की क्षमता से परे अस्तित्व है वह अविनाशी, अपरिवर्तनशील व नित्य है वही सत् है। ओम प्रकाश श्रीवास्तव आईएएस अधिकारी तथा धर्म और अध्यात्म के साधक ‘ गीता को जानें’ लेखमाला- (22) … Continue reading परमात्मा ही जगत् के रूप में अभिव्यक्त हुआ है
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