पश्चाताप का द्वार कभी बंद नहीं होता, जहाँ एक पापी राजा का कोढ़ भी शिव-दर्शन मात्र से धुल गया, उज्जैन के 84 महादेवश्री लुम्पेश्वर महादेव (41वें महादेव)

डॉ. नवीन आनंद जोशी (जयलोक)। उज्जैन की पावन धरा, जिसे साक्षात् महाकाल वन कहा जाता है, केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी भर नहीं — यहाँ चौरासी महादेवों के रूप में देवाधिदेव भगवान शिव के अनगिनत स्वरूप युगों से भक्तों को दर्शन देते आए हैं। इसी पावन शृंखला में 41वें स्थान पर विराजमान हैं श्री लुम्पेश्वर … Continue reading पश्चाताप का द्वार कभी बंद नहीं होता, जहाँ एक पापी राजा का कोढ़ भी शिव-दर्शन मात्र से धुल गया, उज्जैन के 84 महादेवश्री लुम्पेश्वर महादेव (41वें महादेव)