यदि मान लें कि आत्मा जन्मती व मरती है तब

ओम प्रकाश श्रीवास्तव आईएएस अधिकारी तथा धर्म और अध्यात्म के साधक इन्द्रियाँ केवल बाहरी चीजों का अनुभव करती हैं तथा बताती हैं कि उसका शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध कैसी है  जो हम स्वयं हैं वह इन्द्रियों से नहीं जाना जा सकता। जिसका इन्द्रियों से ज्ञान होता है उसी का चिन्तन होता है। जिसे … Continue reading यदि मान लें कि आत्मा जन्मती व मरती है तब