आया समय बड़ा बेढंगा नाच रहा नर होकर नंगा

अमित चतुर्वेदी (जयलोक)।कुछ पंक्तियाँ ऐसी होती हैं जो किसी एक दौर के लिए नहीं लिखी जातीं। वे समय के माथे पर लिखी जाती हैं। पीढिय़ाँ बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं, सत्ता बदलती है, तकनीक बदलती है, लेकिन वे पंक्तियाँ हर युग में उतनी ही सच्ची लगती हैं जितनी अपने जन्म के दिन थीं।कवि प्रदीप ने … Continue reading आया समय बड़ा बेढंगा नाच रहा नर होकर नंगा