जबलपुर (जयलोक)। शासन के वित्त विभाग के स्थानीय निधि संपरीक्षा कार्यालय में पदस्थ बाबू संदीप शर्मा द्वारा किए गए 7 करोड़ रुपए के गबन का मामला ऐसा लग रहा है कि यह मामला अब ठंडे बस्ते में चला गया है। सात करोड़ की शासन की राशि के गबन हो जाने को जितनी गंभीरता से लिया जाना था वैसा नजर नहीं आ रहा है। कोषालय के अधिकारियों द्वारा विधिवत ओमती पुलिस में इस गबन कांड की रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा चुकी थी। लेकिन इस गबन के 20 दिनों से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद भी गबनकर्ता पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। यह घोटाला आला अधिकारियों की नाक के नीचे होता रहा। बाबू यह घोटाला करीब चार साल से कर रहा था, लेकिन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। फरवरी 2025 में हुई ऑडिट रिपोर्ट में यह फर्जीवाड़ा सामने आया।
संदीप शर्मा ने 7 करोड़ की जिस बड़ी राशि का गबन किया उसने यह राशि 20 से अधिक अपने परिचितों के खातों में जमा कर दी थी। जिन लोगों के खातों में यह राशि जमा हुई है कि उनके नाम पते भी पुलिस में की गई रिपोर्ट में दर्ज हैं। लेकिन अभी तक एक भी ऐसा व्यक्ति पुलिस द्वारा नहीं पकड़ा गया जिसके खाते में संदीप शर्मा ने राशि जमा की है।
सैलरी 44 हजार, निकालता रहा 4 लाख
सिविक सेंटर स्थित स्थानीय निधि संपरीक्षा कार्यालय में संदीप शर्मा सहायक ग्रेड-3 में बाबू के पद पर पदस्थ रहा है। नियमानुसार उसकी मासिक सैलरी 44 हजार रुपए है लेकिन एक साल पहले फरवरी 2024 में उसने सैलरी बिल के पीपी कॉलम में राशि बढ़ाकर चार लाख रुपए कर दी। इसके बाद बाबू संदीप शर्मा ने एक साल तक 44 हजार रुपए के स्थान पर 4 लाख 40 हजार रुपए प्रतिमाह (फरवरी 2024 से जनवरी 2025 तक) वेतन के रूप में 53 लाख 55 हजार रुपए निकाल लिए। लेकिन उसके द्वारा किए गए इस गबन की जानकारी किसी अफसर को नहीं लगी।
संयुक्त संचालक की भूमिका भी संदिग्ध
पुलिस जाँच में सामने आया कि सहायक संचालक प्रिया विश्नोई और ज्येष्ठ संपरीक्षक सीमा अमित तिवारी ने बाबू संदीप को अपनी ईडी का लॉगिन पासवर्ड दे रखा था। जिसके चलते ही उसने इस घोटाले को अंजाम दिया। पुलिस करोड़ों के इस फर्जीवाड़े में संयुक्त संचालक की भी भूमिका संदिग्ध मानकर चल रही है।
बाबू ने फर्जी बिल लगाकर निकाले 7 करोड़
फरार बाबू संदीप शर्मा ने सैलरी के अलावा विभागों से पास होने आए बिलों में हेरफेर कर करोड़ों रुपए का गबन किया है। जानकारी के मुताबिक संयुक्त संचालक ऑडिट जबलपुर संभाग के ऑफिस में नगरीय निकाय सहित कार्यालय में होने वाले काम के बिल पास किए जाते हैं। इसी विभाग का बाबू संदीप शर्मा बड़ी ही चालाकी से ना सिर्फ बीते एक साल में हर माह 4 लाख 40 हजार रुपए निकालता रहा, बल्कि फर्जी बिल लगाकर करीब 7 करोड़ रुपए तक निकाल लिए। फर्जी बिल लगाकर अपने परिचितों के खातों में पैसे ट्रांसफर करने का यह काम संदीप 2012 से कर रहा था। लेकिन संदीप शर्मा की कारगुजारियों को लेकर अभी तक किसी तरह की सख्त कार्रवाही नहीं हो पा रही है।
