
(जय लोक)। पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर राकेश सिंह जी ने बेवजह का पंगा ले लिया है अपने डिपार्टमेंट के इंजीनियरों से, एक आदेश कर दिया है कि जो भी काम पीडब्ल्यूडी कर रहा है उन कामों का औचक निरीक्षण किया जाएगा और अगर गड़बड़ी पाई गई तो उन जिम्मेदार इंजीनियर्स पर कार्यवाही की जाएगी। आज तक तो ऐसा कभी हुआ नहीं लेकिन मिनिस्टर साहब ने ऐसा आदेश जारी कर दिया है अब विभाग के इंजीनियर्स को अपनी पोल खुलने का डर सताने लगा है यदि औचक निरीक्षण हुआ तो गड़बड़ी तो निश्चित तौर पर मिलेगी और जब गड़बड़ी मिलेगी तो फिर कार्यवाही भी होगी। कितने मिनिस्टर आए कितने चले गए कभी किसी ने ऐसा पंगा नहीं लिया लेकिन अपने पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर राकेश सिंह जी को पता नहीं क्या सूझा कि ऐसे आदेश जारी कर दिए। मिनिस्टर साहब को ये तो सोचना चाहिए था की जो परिपाटी वर्षों से चल रही है उसमें काहे को विघ्न डालें। न जाने कितने निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी ने करवा डाले आज तक किसी ने उन निर्माण कार्यों का निरीक्षण नहीं किया सीधा-सीधा बिल आया और पास कर दिया ,ठेकेदार ने क्या काम किया, कैसा किया, क्या नहीं किया ये देखने की फुर्सत किसी इंजीनियर को नहीं थी और फुर्सत निकालते भी क्यों बेहतरीन कमीशन जो मिल रहा था ठेकेदारों से, तो किसको जरुरत पड़ी है कि वो जाकर देखे कि ठेकेदार ने ठीक-ठाक काम किया है या नहीं किया। वैसे भी पीडब्ल्यूडी तो बदनाम डिपार्टमेंट माना ही जाता है अगर बदनाम है तो बने रहने देते बदनाम उसको, सुधारने की जरूरत क्या है लेकिन मिनिस्टर साहब ने ठान लिया है कि डिपार्टमेंट को सुधार के रहेंगे अब न केवल इंजीनियर बल्कि ठेकेदार भी भारी परेशान हैं कि जब इंजीनियर पर कार्यवाही होगी तो उसकी जद में वे भी आएंगे, हो सकता है बिल रुक जाए, हो सकता है फिर से उस काम को करना पड़ जाए, ये भी हो सकता है कि पूरा ही काम नया करना पड़ जाए सारी कमाई इसी में चली जाएगी तो बेचारे ठेकेदारों और इंजीनियर्स की रोजी रोटी रोटी चलेगी तो कैसे चलेगी यह तो सोचना चाहिए था मिनिस्टर साहब को। अब इंजीनियर्स ने भी दम दे दी है कि अगर औचक निरीक्षण किया तो हम सब सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। आजकल ये परिपाटी चल गई है कि कोई तहसीलदार भ्रष्टाचार में पकड़ा जाता है तो सारे तहसीलदार आंदोलन करने लगते हैं किसी पटवारी को रंगे हाथ पकड़ लिया जाता है तो सारे पटवारी आंदोलन की राह पकड़ लेते हैं। वैसे यह भी सुना है कि जो चीफ इंजीनियर हैं पीडब्ल्यूडी के उन्होंने सामूहिक अवकाश देने से इनकार कर दिया है लेकिन इंजीनियर्स का सोचना ये है कि ज्यादा से ज्यादा क्या होगा एक दिन की तनख्वाह कट जाएगी। अपना तो नेताजी से एक ही निवेदन है कि क्यों किसी के पेट में लात मार रहे हो जब पूरे ही कुएं में भांग घुली हो तो फिर उसका पानी किसी भी तरफ से निकाल लो नशा तो हो ही जाएगा। बेचारे इंजीनियर्स पर अपने को तो बड़ी दया आ रही है कि कितने सालों से बेहतरीन कमीशन पर काम चल रहा था ना ठेकेदार को काम देखने की फुर्सत थी ना इंजीनियरों को लेकिन अब मिनिस्टर साहब ने अलसेट दे दी है, देखना ये होगा कि इस लड़ाई में मिनिस्टर साहब की जीत होती है या फिर ठेकेदारों और इंजीनियर्स की।

बॉस भी आशिक रहे होंगे
दिल्ली की प्राइवेट कंपनी के एक कर्मचारी ने अपने बॉस को छुट्टी का आवेदन का मेल किया। अक्सर छुट्टी के लिए लोगबाग़ बीमारी का बहाना बनाते हैं लेकिन उस बंदे ने साफ -साफ लिख दिया कि साहब जी मुझे अपनी प्रेमिका के साथ वक्त बिताना है इसलिए मुझे लीव प्रदान की जाए, बॉस ने जैसे ही अपने कर्मचारी की छुट्टी का आवेदन देखा और दूसरे ही पल ‘लीव सैंक्शन’ लिख दिया।
दूसरे कर्मचारियों को बड़ा अचरज हुआ कि आखिर प्रेमिका के संग वक्त बिताने के लिए बॉस ने उस कर्मचारी को लीव कैसे दे दी। अपन को ऐसा लगता है कि इस कर्मचारी की कंपनी के जो बॉस है वे भी कभी ना कभी किसी के आशिक रहे होंगे और उन्हें अपनी प्रेमिका के संग वक्त बिताने का समय नहीं मिला होगा जिसका उनको आज तक रंज रहा होगा शायद इसलिए उन्होंने उस कर्मचारी की लीव एक झटके में सैंक्शन कर दी कि चलो हम अपनी प्रेमिका के संग अगर वक्त नहीं बिता पाए लेकिन अगर कोई हमारा कर्मचारी अपनी महबूबा के साथ वक्त बिताना चाहता है तो कम से कम ये मौका तो उसको मिलना ही चाहिए। वैसे बॉस का कहना ये है कि उसने सच्चाई बयान की थी और उसकी सच्चाई से प्रभावित होकर ही उसकी लीव सैंक्शन की गई है लेकिन सच्चाई क्या है इसका अंदाज अपन ने लगा लिया है जिसका उल्लेख ऊपर कर दिया है बहरहाल ईश्वर ऐसा बॉस सबको मिले जो महबूबा के साथ आशिक को समय बिताने के लिए अवकाश प्रदान करे।

अब कुत्तों को ढूंढो
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आदेश निकाला है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी और तमाम शासकीय, अशासकीय स्कूलों के शिक्षक शिक्षिकाएं आवारा कुत्तों की खोज करेंगे कि उनके इलाके में कितने आवारा कुत्ते घूम रहे हैं उनका पूरा डिटेल्स लेंगे और फिर अपने विभाग के आला अफसरों को भेजेंगे। अपने को तो ये मालूम था कि शिक्षक का काम पढ़ाने का होता है लेकिन सरकारों ने शिक्षकों को ‘पीर बावर्ची भिश्ती घर’ बना दिया है जनगणना वो करवाएं, मतदाता पत्र वो ठीक करवाएं, घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित वो करें, चुनावी ड्यूटी वो करें, पोलियो की ड्रॉप वो पिलाएं लेकिन अब उनको पढ़ाई लिखाई छोडक़र सिर्फ एक ही काम करना है और वो काम है आवारा कुत्तों की खोज खबर लेना। तमाम टीचर्स हाथ में कॉपी पेन लेकर सडक़ सडक़ घूमेंगे और जितने भी आवारा कुत्ते हैं उनकी संख्या गिनेंगे, ये भी पता लगाएंगे उसकी नसबंदी हुई है या नहीं। अपने हिसाब से तो हर शहर में हजारों की तादाद में आवारा कुत्ते घूम रहे हैं अब ये बेचारे टीचर्स इन हजारों आवारा कुत्तों की जानकारी कैसे इक_ी करेंगे ये बहुत बड़ा सवाल है लेकिन अगर नौकरी करना है तो सरकार जो कह रही वो तो करना ही पड़ेगा और अगर आपको कुत्तों की खोज खबर नहीं लेना है तो फिर सरकार आपको घर बैठाने में देर नहीं लगाएगी और सरकारी नौकरी भला कौन छोडऩा चाहेगा वैसे भी इतने काम शिक्षक कर चुके हैं कि अब उन्हें कुत्तों की खोज खबर लेने में भी कोई खास फर्क नहीं पडऩे वाला।

सुपरहिट ऑफ द वीक
श्रीमान जी श्रीमती जी का हाथ पकड़े हुए बाजार में घूम रहे थे उनके दोस्त ने देखा और बोला
‘वाह क्या सीन है शादी के इतने साल बाद भी इतनी मोहब्बत’
‘खाक मोहब्बत जैसे ही हाथ छोड़ता हूं किसी ना किसी साड़ी की दुकान में घुस जाती है’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।
जोहानिसबर्ग में गोलीबारी, शराबखाने में लोगों पर की अंधाधुंध फायरिंग, नौ लोगों की मौत
Author: Jai Lok







