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एक बार गई तो घंटों में आती है बिजली: विद्युत की अघोषित कटौती से बढ़ रहा जनआक्रोश

जबलपुर, (जयलोक)।   यूं तो बीते कई महीनों से शहर बिजली गुल होने की समस्या से हलाकान और ग्रामीण क्षेत्र परेशान थे। अभी गर्मी के मौसम में लोड अधिक होने के कारण ट्रिपिंग की समस्या आ रही है। अब बारिश में समस्या फाल्ट आने पर दोगुनी हो जाएगी। फिलहाल मेंटिनेंस के नाम पर अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। उर्जा मंत्री समीक्षा बैठक में साफ कह चुके हैं कि बिना कारण बिजली बंद नहीं होना चाहिये। आवश्यक होने पर संबंधित क्षेत्रों में पूर्व से ही बिजली गुल रहने की सूचना समाचार पत्रों सोशल मीडिया के माध्यम से दी जाए। भीषण गर्मी में विद्युत कटौती से लोग परेशान हैं। आज भी ट्रांस्फार्मर और बिजली लाईनों के पास पेड़ों की डिगाल झूल रही है। जो बारिश में विद्युत फाल्ट का कारण बनेगी।  रही सही कसर विद्युत विभाग में अमले की कमी निकाल रही है, क्योंकि स्टॉफ नहीं होने की वजह से शिकायतों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। शहर हो या ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति और विद्युत के अमले दोनों के बुरे हाल हैं। एक जेई और एक लाईनमैन के भरोसे गांव के गांव की विद्युत व्यवस्था निर्भर है। वहीं संसाधनों का अभाव जान जोखिम में डाल रहा है। हालात इतने बेकाबू हैं कि सिंचाई पंपों को 10 घंटे की बजाए चार घंटे बिजली मिल रही है। बार-बार बिजली की आंखमिचौली से ग्रामीण कुटीर उद्योग और लघु उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार और विद्युत कम्पनियां कितनी ही गुणवत्तापूर्वक बिजली अपूर्ति करने और 24 घंटे सतत् बिजली देने का दावा कर ले, लेकिन हकीकत इससे उलट है। विद्युत सुधार और उपभोक्ता हित के नाम पर करोड़ों रुपये फूंके जा रहे हैं लेकिन धरातल पर इसका कहीं असर नहीं दिख रहा। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में भी विद्युत आपूर्ति के हालात ठीक नहीं है। भीषण गर्मी में बार-बार लाईट गोल हो रही है।  शुक्रवार, शनिवार और रविवार को नेपियर टाउन, राइट टाउन क्षेत्र घंटों अंधेरे में रहा। वहीं गोलबाजार, आगा चौक, बल्देवबाग, गढ़ा फाटक में घंटो विद्युत आपूर्ति ठप्प रही। शुक्रवार, शनिवार को सिविक सेंटर, नागरथ चौक, करमचंद्र चौक, अंधेरदेव, श्रीनाथ की तलैया क्षेत्र में दिन में 1 दो घंटे बिजली गुल होना आम हो चुका है। कोयले की कमी या प्रबंधन का प्रभाव, कारण जो भी हो लेकिन भीषण गर्मी में विद्युत कटौती होने से जनआक्रोश बढ़ रहा हैं। इसी तरह कई तरह ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी 24 घंटों में बामुश्किल 10 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। वहीं हर घंटे दो घंटे में बिजली गोल हो जाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लगे लघु व मध्यम उद्योग, धंधे प्रभावित हो रहे हैं, वहीं बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कहा जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत मेंटेनेंस का काम जीरो है वहीं दूसरी ओर स्टाफ और संसाधन की कमी भी बनी हुई है। लिहाजा, एक फाल्ट सुधारने के लिये पूरे गांव की बिजली बंद की जाती है तब सुधार कार्य हो पाता है और पूरे दिन यही क्रम चलता है। अभी इस घर की बिजली सुधारी और दूसरे घंटे उस घर की बिजली सुधारी और चार घंटे बाद तीसरे घर की। हर बार बिजली सुधारने के लिये पूरी सप्लाई रोक दी जाती है। लिहाजा बार-बार गांव में बिजली जाती है। इसका सबसे बुरा असर लघु उद्योंगों पर पड़ रहा है।  जिले में सबसे बुरे हालात पाटन तहसील के नुनसर, पनागर के सिंगलद्वीप, बम्हनोदा, कुसनेर, मझौली के गांव में है। जहां दिन में कम से कम 15 से 20 बार लाईट जाती है। छोटे-छोटे लघु उद्योग उत्पादन नहीं कर पाते और मजदूरों का क्रम भी टूटता है। घंटे के हिसाब से मजदूरी देना संचालकों को देना महंगा पड़ता है। इस बात की शिकायत कंपनी मुख्यालय में बैठे अधिकारियों से करने पर कोई सुनवाई नहीं होती।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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