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कहो तो कह दूँ -तुम्हें तो वाया ‘इटारसी’ आना था उधर ‘बालाघाट’ कहाँ पहुंच रहे हो..

(जय लोक) , गमी, गर्मी, गर्मी, हाय गर्मी लोग मरे जा रहे है गर्मी से, सूर्य देवता भी अपनी पूरी ताकत लगाए पड़े हैं कि कितनी गर्मी धरती पर बरसा दें, जनता पसीने से भीग चुकी है, कूलर, एसी सब फेल हो चुके हैं नदियों तालाबों का पानी सूख गया है बस इंतजार है तो मानसून के बादलों का लोगों को, लेकिन एक खबर मिली है कि इस बार मानसून जो जबलपुर में आने वाला है बालाघाट के थ्रू जबलपुर पंहुचेगा, खबर ये भी है कि मानसून बिफोर टाइम मुंबई पहुँच चुका है अब मुंबई से जबलपुर सीधे-सीधे आने का रास्ता इटारसी होकर आता है लेकिन ये मानसून बालाघाट काहे के लिए जा रहा है यह समझ से बाहर है, सीधे-सीधे रास्ते से आओ भैया मानसून, टेढ़े रास्ते से आओगे तो भटक जाओगे और वैसे भी तुम्हारा पुराना रिकॉर्ड भटकने का रहा है अपने को तो एक बात आज तक समझ में नहीं आई कि जो मानसून हर साल आता है वो एक साल में अपना रास्ता कैसे भूल जाता है। तुम्हारे इंतजार में लोग काला चश्मा लगाकर आसमान की तरफ  देख रहे लेकिन अभी दूर-दूर तक तुम्हारे बादलों का पता नहीं है अब जब बालाघाट होकर आओगे तो टाइम तो बर्बाद होगा क्योंकि अगर सीधे-सीधे मुंबई से गरीब रथ में बैठ जाते या और किसी मुंबई से जबलपुर आने वाली और किसी ट्रेन से आ जाते तो दूसरे दिन ही पहुंच जाते लेकिन तुम्हें तो पता नहीं ऐसा बालाघाट में क्या दिखाई दे गया कि पहले बालाघाट जाओगे फिर उसके बाद जबलपुर आओगे। आना तो ही तो सीधे-सीधे फ्लाइट से नागपुर आ जाते, आजकल तो नागपुर से चार घंटे में जबलपुर पहुंच जाते हैं रोड भी बहुत शानदार हो गई है पहले सात आठ घंटे लगते थे नागपुर के लिए अब चार घंटे में नागपुर से जबलपुर और जबलपुर  से नागपुर पहुंचा जा सकता है आने के तो बहुत से रास्ते थे लेकिन लगता है तुम भी नेता टाइप हो गए कहते कुछ हो और करते कुछ हो, जनता परेशान है लेकिन करना तुमको वही है जो तुम्हारे मन में आता है जितना इंतजार तुम्हारा हो रहा है उतना इंतजार तो आशिक अपनी महबूबा का भी नहीं करता तुम तो उनसे भी बढक़र हो गए हो खैर अब सब कुछ तुम पर ही डिपेंड है तुम्हें जिस भी रूट से आना है आ जाओ तुम्हें फ्लाइट से आना है ट्रेन से आना है या अपनी खुद की गाड़ी से बाय रोड आना है ये तुम डिसाइड कर लो लेकिन आ जरूर जाओ भैया, वरना गर्मी सबकी लाई लूट लेगी अब तो तुम्हारे इंतजार में बस यही गाना तमाम लोग गा रहे हैं।
‘इंतहा हो गई इंतजार की आई ना  कुछ खबर मानसून की’ जलवा मंत्रियों विधायकों का
लोग बाग राजनीति में आने के लिए क्यों पूरी ताकत लगा लेते हैं क्योंकि एक बार विधायक बन जाओ एक बार मंत्री बन जाओ फिर देखो जलवा। जो जनता के सामने हाथ जोडक़र वोट के लिए भिखारी बनते थे वही जनता उनके दरवाजे पर उनके जीतने के बाद भिखारी बनकर खड़ी रहती है। अभी पता लगा है कि भोपाल में मंत्रियों विधायकों के लिए नए बंगले बनने वाले हैं इधर सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है उधर मंत्रियों विधायकों के लिए 300 करोड़ से नए बंगले बनने वाले हैं जबकि जितने मंत्री और जितने विधायक हैं उससे ज्यादा बंगले अभी भोपाल में बने हुए लेकिन मंत्री तो मंत्री हैं इन पुराने बंगलो से उनका मोह भंग हो चुका है,उन्हें चाहिए टनाटन नए बंगले, ये भी पता लगा है कि मंत्रियों विधायकों के लिए जो बंगले बनने वाले हैं उसके लिए उनतीस हजार बड़े पेड़ काटे जाएंगे। एक तरफ  वृक्ष लगाओ की योजना चल रही है पर्यावरण को सुधारने के लिए पेड़ लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा हैं लेकिन यहां तो उल्टी बयार बह रही है  हजारों पेड़ काट दिए जाएंगे इससे न मंत्रियों को कोई फर्क पडऩे वाला है ना विधायक को, उन्हें तो एसी ऑफिस में एसी कार में एसी बंगले में रहना है,उन्हें गर्मी से क्या लेना देना, पर्यावरण के बारे में भाषण दे दो अपना काम खत्म, गर्मी से मरेगी तो आम जनता लेकिन कोई कुछ नहीं कर सकता क्योंकि वे मंत्री हैं, विधायक है उन्हें जनता ने चुन के भेजा है और जब उनको भेजा है तो वे अपनी मर्जी से काम करेंगे और एक बार जब आपने उनको चुन लिया है तो 5 साल तक आप उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते इसलिए चुपचाप देखते चलो पेड़ कटे या तालाब सूखे उनका क्या?
एग्जिट पोल की पोल
बड़े-बड़े मीडिया हाउस, बड़ी-बड़ी एग्जिट पोल करने वाली कंपनियां  कह रही थी कि इस बार भी ‘एनडीए’ चार सौ पार भले ही ना सही लेकिन तीन सौ पचास से लेकर पौने चार सौ सीटें लेकर आएगी, हर कंपनी का सर्वे यही बतला रहा था कि इस बार भी एनडीए और भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना लेगी बीजेपी का तो हर नेता एक ही गाना गा रहा था इस बार चार सौ पार यानी बीजेपी अकेली तीन सौ सत्तर और एनडीए चार सौ पार। बेचारे इंडिया गठबंधन वाले इनके चक्कर में अपना कोई आंकड़ा ही नहीं दे पाए कि  वे कितने पार होने वाले लेकिन जब रिजल्ट आए तो सारे  एग्जिट पोल जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़े क्योंकि इंडिया गठबंधन ने अंदर ही अंदर जो सुरंग बिछाई थी वो रिजल्ट के दिन ऐसी फूटी कि जो बीजेपी जो तीन सौ सत्तर की बात कर रही थी वो दो सौ चालीस पर सिमट कर रह गई और जो एनडीए इस बार चार सौ पार का नारा लगा रही थी वो तीन सौ तक भी नहीं पहुंच पाई अपने को तो लगता है कि ये जो एग्जिट पोल करने वाले हैं पता नहीं कौन सी भांग खा कर बैठते हैं हाल तो ये हो गया कि एक एग्जिट पोल करने की कंपनी के कर्ताधर्ता अपना एग्जिट पोल गलत होने से इतनी दुखी हुए कि टीवी के लाइव प्रोग्राम में रोने लगे। भैया रोने से क्या होगा, ईमानदारी से काम करते, सचमुच का एग्जिट पोल बनाते तो आज रोना ना पड़ता लेकिन आप लोगों को तो एक ही आंख से सब कुछ दिखाई पड़ता है दूसरी आंख पर अपने पर्दा डाल लिया है लेकिन मतदाता इतना बेवकूफ  नहीं है जितना आप लोगों ने समझ लिया है, वो हर चीज को देखा परखता है और फिर राजनीतिक दलों और नेताओं को ऐसी बत्ती देता है जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी ना की होगी। जिस इंडिया गठबंधन को डेढ़ सौ तक सीमित कर रहे थे ये एग्जिट पोल वाले वो दो सौ चौतीस सीटों के आसपास पहुंच गया, अपने को तो लगता है कि अब एक एग्जिट पोल इन तमाम एग्जिट पोल करने वालों पर भी होना चाहिए कि वास्तव में ये एग्जिट पोल कितने सही उतरेंगे और कितने गलत। अब सरकार भी दो ‘एन’ के भरोसे चलेगी एक नायडू और दूसरे नीतीश कुमार, और इनका पुराना रिकॉड कोई भरोसे लायक तो है नहीं कब टांग के नीचे से अपनी बैसाखी खिसका लें कोई नहीं कह सकता बहरहाल नई सरकार को शुभकामनाएं, लेकिन एग्जिट पोल वालों को अब यह समझना चाहिए कि जिस देश में नब्बे करोड़ से ज्यादा मतदाता अपना वोट देते हो उसमें दस बीस हजार या लाख दो लाख लोगों के विचारों से हार जीत का फैसला नहीं हो सकता।

सुपर हिट ऑफ  द वीक
‘कौन कहता है कि बीवियां अपनी गलती नहीं मानती’ श्रीमान जी ने अपने दोस्त से कहा
‘आपकी पत्नी ने ऐसी कौन सी गलती मान ली’ दोस्त ने पूछा
‘कल उसने साफ -साफ  कह दिया कि तुमसे शादी करके सचमुच मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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