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महिलाओं से परेशान पुरूष लगा रहे मौत को गले, महिला सुरक्षा कानून पर उठ रहे सवाल

जबलपुर (जयलोक)।महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून पुरूषों की मौत का कारण बनते जा रहे हैं। शहर में कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी है जिसमें महिलाओं और महिला सुरक्षा कानूनों से परेशान होकर पुरूषों ने मौत को गले लगा लिया। ऐसे मामलों में समानता यह नजर आई कि इन मामलों में कोर्ट कचहरी और थानों के चक्कर काटकर पुरूष परेशान हो चुके थे। जब सभी जगहों से निराशा हाथ लगी तो उन्होंने मौत का रास्ता चुना। 2025 में भी कुछ इसी तरह के मामले सामने आए जिन्हें देखकर महिला संबंधी सुरक्षा कानून पर अब सवाल उठने लगे हैं।
अब तक घरेलू हिंसा के मामले में महिलाओं का नाम सुर्खियों में था लेकिन अब ऐसे मामले में पुरूषों की संख्या भी बढ़ गई है। शहर मेंं लगातार सामने आ रहे मामले बता रहे हैं कि पत्नी की बेवफाई, मायके पक्ष की प्रताडऩा और झूठे आरोपों से टूटकर पुरूष अपनी जिंदगी से परेशान हो गए। समाज को झकझोर देने वाली इन घटनाओं ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि पुरुषों के दर्द और आत्मसमान की रक्षा कौन करेगा?

पत्नी की प्रताडऩा से पति ने लगाई फाँसी

इसी तरह का एक मामला 15 मई को सामने आया था जहां माढ़ोताल निवासी 40 वर्षीय अरुण दुबे ने पत्नी और ससुराल वालों से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अरूण की पत्नी प्रिया और मायके पक्ष (तीन साले व सास) लगातार 20 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। प्रताडऩा, अपमान और मानसिक दबाव ने अरुण को तोड़ दिया। अरूण के पास पत्नी को देने के लिए 20 लाख रूपये नहीं थे वहीं उसकी पत्नी प्रिया कानून का सहारा लेकर अरूण पर दबाव बना रही थी। जिससे तंग आकर उसने फाँसी        लगा ली।
15 अगस्त को पति ने खाया जहर
इसी तरह का एक और मामला शहर में सामने आया जहाँ 25 वर्षीय कार्तिक पटेल ने पत्नी करिश्मा से और उसके मायके वालों से परेशान होकर जहर खाकर जान दे दी। पत्नी और उसके परिवार वालों ने लगातार उसके साथ मारपीट की और मानसिक प्रताडऩा दी। विरोध करने पर उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जिसके कारण उसने जहर खा लिया। पुलिस ने जांच के बाद केस दर्ज किया, लेकिन क्या यह न्याय दिलाने के लिए काफी है।

घमापुर में पत्नी के प्रेम प्रसंग से दुखी पति ने दी जान

घमापुर में 28 जून को पत्नी के प्रेम प्रसंग से परेशान होकर पति ने फांसी लगा ली। मरने से पहले मयंक ने सुसाइड नोट लिखा और उसमें पत्नी के प्रेम प्रसंग और उसके परिवार वालों द्वारा फँसाने का उल्लेख किया। मयंक ने जब पत्नी के प्रेम प्रसंग का विरोध किया तो उसके परिवार वालों ने उसे घरेलू हिंसा के झूठे मामले में फंसा दिया।

जुलाई में दो पतियों ने तोड़ा दम

जुलाई में अरुण नामक एक अन्य व्यक्ति ने भी अपनी पत्नी और ससुराल वालों की वित्तीय मांगों और उत्पीडऩ से तंग आकर आत्महत्या कर ली। उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था। एक अन्य मामले में, महेश विंजुडा नामक व्यक्ति ने भी पत्नी द्वारा गुजारा भत्ता के लिए परेशान किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली।

झूठे मामलों में फंसाने की धमकी

कुछ पतियों ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नियाँ उन्हें छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती हैं, गालियाँ देती हैं और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती हैं, जिससे वे मानसिक तनाव में रहते हैं।
महेश पटेल, शुभम साहू ने भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर इसकी शिकायतें की है जिसकी जाँच की जा रही है।

पति का लापता होना

एक मामले में, आनंद दुबे नामक एक पति ने पत्नी की प्रताडऩा का जिक्र करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया और उसके बाद से वह लापता हो गया।

जमीन और संपत्ति विवाद

कुछ मामलों में विवाद की जड़ में जमीन या संपत्ति का लालच भी पाया गया, जहाँ पत्नियों ने कथित तौर पर पति की संपत्ति हड़पने के लिए उन्हें प्रताडि़त किया या धोखे से शादी की।

मारपीट और घरेलू हिंसा

घरेलू विवादों और संपत्ति के दबाव के चलते पति-पत्नी के बीच मारपीट की घटनाएँ भी सामने आई हैं।
इन मामलों को लेकर पति पीडि़त पति से जुड़े संगठनों ने पुरुषों के खिलाफ  घरेलू हिंसा के मुद्दों पर चिंता जताई है और न्याय की मांग की है।

 

Jai Lok
Author: Jai Lok

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