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शिक्षा माफिया के सामने प्रशासन ने छोड़े दो विकल्प आत्म सुधार या एफआईआर

बच्चों से लूटी गई फीस हर हाल में करना होगी वापस-कलेक्टर दीपक सक्सेना

बड़ा गिरोह कर रहा योजनाबद्ध साजिश, जाँच में खुलेंगी कई नईं परतें-एसपी आदित्य प्रताप

@परितोष वर्मा
जबलपुर (जयलोक)। देश में पहली बार जबलपुर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने शिक्षा माफिया की जड़ों पर प्रहार किया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन माह पहले जब प्रदेश में हावी होते जा रहे शिक्षा माफिया पर प्रभावी कार्यवाही करने के लिए समस्त कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए थे उस वक्त किसी ने यह अनुमान नहीं लगाया था कि जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना और पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह बड़े ही योजना बंद तरीके से कदम दर कदम ऐसी कार्यवाही को अंजाम देंगे जिससे शिक्षा माफिया की नींव हिल जाएगी। वर्तमान में जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने इस कार्यवाही की अगुवाई करते हुए शहर के 1035 निजी स्कूलों के समक्ष केवल दो ही विकल्प छोड़े हैं। वह यह है कि या तो वह मिली भगत की दुकान बंद कर आत्म सुधार करें या फिर एफआईआर के लिए तैयार रहें। इस पूरे मसले पर       जय लोक ने आगामी कार्यवाही के सम्बंध में  कलेक्टर दीपक सक्सेना एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह से चर्चा की जिन्होंने होने वाली कार्यवाही के बहुत से बिंदुओं पर चर्चा की।
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने शिक्षा माफिया के खिलाफ  चल रही कार्यवाही को और गति देने की बात कहते हुए बताया कि प्रारंभिक तौर पर अभी केवल 11 स्कूलों की जाँच में इतना बड़ा फर्जी वाड़ा और योजनाबद्ध तरीके से किए गए आपराधिक षड्यंत्र के खुलासे हुए हैं। प्रशासन को जाँच के दौरान हर प्रकार के दस्तावेजी प्रमाण प्राप्त हुए हैं। आगे शहर में संचालित होने वाली सभी 1035 निजी शालाओं से हमारा स्पष्ट कहना है कि या तो वे स्वयं उनके द्वारा किए गए गलत कार्यों को सुधार लें, नियम विरुद्ध की गई फीस वृद्धि वापस लें, पुस्तक के संबंध में मनमानी करना और मिलीभगत से अभिभावकों को लूटना बंद करें। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने स्पष्ट कहा कि कोई भी निजी स्कूल उनके खिलाफ शिकायत प्राप्त होने और प्रशासन द्वारा उस पर संज्ञान लेकर जांच प्रकरण बनाने का इंतजार ना करें बल्कि स्वयं ही आत्म सुधार कर शिक्षा जैसे पवित्र कार्य में अपने सामाजिक योगदान की जिम्मेदारी निभाएं। जो निजी स्कूल ऐसा नहीं करेंगे और मिली भगत का हिस्सा पाए जाएंगे ऐसे स्कूल एफआईआर के लिए तैयार रहें।
पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य समाज के बहुत ही महत्वपूर्ण सेवा है इस कार्य में लगे लोगों की नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वह कालाबाजारी या कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर मुनाफाखोरी ना करें। अभी तक की जांच में यह पाया गया है कि बहुत बड़ा रैकिट या गिरोह शिक्षा माफिया के रूप में कार्य कर रहा है। जो लोग हिरासत में हैं उनसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। बहुत से आरोपी अभी पूछताछ के दायरे में आएंगे निश्चित ही इससे नई-नई जानकारियाँ और परतें खुलेंगी। अभी तक की जाँच में भी पुलिस के सामने बहुत से पुख्ता प्रमाण आ चुके हैं, जिससे स्कूल संचालक पुस्तक विके्रता और प्रकाशक के बीच की मिलीभगत साफ  समझ में आ रही है। इनके खिलाफ  और भी ठोस प्रमाण एकत्रित किए जा रहे हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास जारी है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। कुछ लोग विदेश में हैं कुछ अन्य प्रदेश में है उन्हें और उनके परिजनों को सूचित कर दिया है कि वह जल्द ही पुलिस के समक्ष प्रस्तुत हों अन्यथा उन्हें गिरफ्तार करने के लिए टीम रवाना होंगी। बाहर के प्रकाशक भी कार्यवाही की जड़ में है उनके संबंध में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

22 लाख की पैनल्टी लगी, लौटाना पड़ेंगे अधिक वसूले गए 81 करोड़ 30 लाख

जयलोक से चर्चा के दौरान कलेक्टर दीपक सक्सेना ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन स्कूलों ने फीस के नाम पर अनैतिक और अवैध रूप से बिना प्रशासनिक अनुमति के फीस बढ़ाकर बच्चों और अभिभावकों को लूटा है उन्हें हर हाल में यह बढ़ी हुई फीस वापस करना होगी। कलेक्टर श्री सक्सेना ने कहा कि अभी 11 स्कूलों के खिलाफ हुई प्रारंभिक जाँच में 81.30 करोड़ रूपये की राशि अधिक वसूलने का खुलासा हुआ है इन स्कूलों के खिलाफ 22 लाख रूपये की पैनल्टी भी लगाई गई है। कलेक्टर ने कहा है कि अगले 30 दिनों के अंदर अभिभावकों को अतिरिक्त वसूली गई फीस स्कूलों को वापस करना होगी, जिस बैंक खाते से स्कूलों को फीस प्राप्त हुई है अभिभावकों के उसी बैंक खाते में यह फीस लौटाई जाएगी। कलेक्टर ने साफ कहा है कि सभी स्कूल अपने स्तर पर ऑडिट कर फीस वापस करने का कार्य करें। अन्यथा इसके बाद कुर्की जैसी कड़ी कार्रवाही की जाएगी।

छात्र और अभिभावक करें स्कूल मैनेजमेंट से ये सवाल-दीपक सक्सेना, कलेक्टर

1. क्या आपने आडिट रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की है?
2. क्या आपकी वार्षिक प्राप्तियों का आधिक्य कुल प्राप्तियों के 15 प्रतिशत से कम है?
3. क्या आपने औचित्य सहित फीस वृद्धि की सूचना सत्र प्रारंभ होने के 90 दिवस की अवधि में दे दी है?
4. क्या आपने 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि के लिये सक्षम स्वीकृति जिला कलेक्टर या राज्य शासन से प्राप्त कर ली है? यदि नहीं तो किस हक से हमारी जेब हल्की कर रहे हो? 25 जनवरी 2018 से राज्य शासन ने फीस वृद्धि के पैमाने तय कर दिये हैं। अपने हक के लिये करें सवाल किसी को भी अपनी गाढ़ी कमाई पर डाका डालने का मौका न दें।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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