Download Our App

Home » जीवन शैली » अनन्तश्री विभूषित पश्विमाम्न्नाय द्वारकाशारदापीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीसदानंद सरस्वती जी वेद पोथी को नहीं कहते यह ऋषियों के हृदय में निवास करते हैं

अनन्तश्री विभूषित पश्विमाम्न्नाय द्वारकाशारदापीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीसदानंद सरस्वती जी वेद पोथी को नहीं कहते यह ऋषियों के हृदय में निवास करते हैं

नरसिंहपुर (जय लोक)। कार्यक्रम में महाराजश्री जी ने अपने सभी शिष्यों के साथ धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के तैल चित्र का पूजन किये  तत्पश्चात धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज एवं अनंतश्री विभूषित उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीअविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराजश्री के प्राकट्योत्सव पर्व पर ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी, ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानंद जी, ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी एवं ज्योतिषपीठ पंडित रविशंकर द्विवेदी जी ने प्रकाश डाला ।
आगे प्रवचन के क्रम में पूज्य महाराजश्री जी ने बताया कि हमें उज्जैन कुम्भ में धर्मसम्राट स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती जी (करपात्री जी महाराज ) के दर्शन हुये उस समय हम विद्यार्थी थे वहीं उनका प्रवचन सुनने का अवसर प्राप्त हुआ  समय-समय पर धर्मसंस्कृति की ग्लानि दूर करने के लिये महापुरुषों का आविर्भाव होता है । 20वी शताब्दी में स्वामी करपात्री जी महाराज का आविर्भाव हुआ था।
हमारे गुरुदेव ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जी महाराज ने भी उनसे शिक्षा ग्रहण की। श्रीविद्या की विधि प्राप्त की उन्हीं के द्वारा पूज्य द्विपीठाधीश्वर सदगुरुदेव का पूर्णाभिषेक भी हुआ।
धर्मसंघ के माध्यम से उन्होंने धर्म की बहुत सेवा की सनातनधर्म, देश के लिये उन्होंने अपने जीवन को समर्पित कर दिया।
वेदान्त पारिजात ग्रन्थ का उन्होंने प्रणयन किया, शब्दब्रह्म ही वेद हैं। ऐंसे कठिन वेदों का अर्थ उन्होंने किया। किसी भी प्रमाण से जिसकी सिद्धि नहीं होती वह वेद से होती है। शब्दब्रह्म सुदुर्बोधं…. इस लिये वेद के लिये कहा गया है शब्द ब्रह्म।
अनन्ता वै: वेदा: समुद्रवत् वेद का अर्थ करना अत्यन्त कठिन है। भ्रम, प्रमाद, विप्रलिप्सा और कर्णपाटव यह चार दोष किसी के भी द्वारा लिखे गये ग्रंथों में होता है। ब्रह्म, परमात्मा और भगवान् एक ही हैं यह वेद बतायेंगे। वेद पोथी को नहीं कहते यह ऋषियों के ह्रदय में निवास करते हैं।

2 करोड़ की लागत से हनुमानताल तालाब में कराये जा रहे हैं सौन्दर्यीकरण के कार्य, निगम प्रशासन का दावा अभी तक ठेकेदार को मात्र 12 लाख 56 हजार रूपये का भुगतान हुआ, भ्रष्टाचार जैसी कोई बात नहीं

 

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » जीवन शैली » अनन्तश्री विभूषित पश्विमाम्न्नाय द्वारकाशारदापीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीसदानंद सरस्वती जी वेद पोथी को नहीं कहते यह ऋषियों के हृदय में निवास करते हैं