
10 वर्षों में खोले गये संस्थाओं ने कृषि विश्वविद्यालय से एफीलिएशन नहीं लिया
जबलपुर (जयलोक)। प्रदेश का इकलौता रहा जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि लगातार सिकुड़ता जा रहा है। इस कृषि विवि को तोडक़र ग्वालियर में भी कृषि विवि बना दिया गया है। जबलपुर के कृषि विवि की दुर्दशा ऐसी है कि पिछले दस वर्षों में प्रदेश में खोले गए संस्थाओं ने कृषि विवि से एफिलेशन नहीं लिया है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाज पांडे ने बताया है कि 3 सितम्बर 2015 को 10 वर्ष पूर्व में ही जे.एन. कृषि विश्वविद्यालय के कुल सचिव ने नोटीफिकेशन जारी कर सभी कृषि शिक्षण संस्थानों को विश्वविद्यालय के साथ सम्बद्धता (एफीलिएशन) करने के निर्देश जारी किये थे। इसके पूर्व में 16 मई 2011 को मध्यप्रदेश राजपत्र में संशोधन प्रकाशित कर राज्यपाल द्वारा प्रत्येक कृषि महाविद्यालय को कृषि वि.वि. से सम्बद्ध होने के निर्देश जारी किये गये थे।

किंतु इन निदेर्शों के बावजूद भी प्रदेश में जहां तहां खोले गये कृषि शिक्षण संस्थाओं ने कृषि विश्वविद्यालय से एफीलिएशन नहीं लिया है। नतीजन शिक्षण अर्हताओं में फर्क आ गया, गुणवत्ता घटी, कृषि वि.वि. का विस्तार घट गया, वह अब निरंतर सिकुड़ रहा है। यह जानकारी देकर डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने प्रदेश के राज्यपाल को हस्तक्षेप करने हेतु आज पत्र भेजा है।

दोनों कृषि वि.वि. में चिंता व्याप्त है
अर्हताओं में शिथिलता लाकर खोले जा रहे कृषि शिक्षा संस्थाओं से न केवल कृषि शिक्षा के गुणवत्ता बल्कि कृषि वि.वि. के अस्तित्व को ही खतरा निर्मित हो रहा है। इस बाबद् प्रदेश के दोनों कृषि वि.वि. (जबलपुर तथा ग्वालियर) में चिंता व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि डॉ. पी.जी. नाजपांडे के सुझाव पर विगत दिनों जबलपुर कृषि वि. वि. में बैठक भी आयोजित कर चर्चा की गई थी। बैठक में कुलपति डॉ. पी. के. मिश्रा, डॉ. धीरेन्द्र खरे, डॉ.जी. के. कोतु, डॉ. दिनकर शर्मा, डॉ. अभिषेक शुक्ला, डॉ. अनीता बब्बर, डॉ. अश्विनी जैन, डॉ. अतुल श्रीवास्तव, डॉ. बंटी शर्मा, डॉ. शरद जैन, डॉ. अमित शर्मा उपस्थित थे।
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Author: Jai Lok







