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अब तो जेल की दीवारें भी सुना रही शराब पार्टी की दास्तान, जेल की राइटर जाली में तय हुआ था कौन-कौन आएगा पार्टी में

चर्चा में कैदी और जेल कर्मियों की शराब पार्टी

जबलपुर (जयलोक)। जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और जेल के कैदियों की यारी विवादों में घिर गई है। जेल अधिकारी कुलदीप सिंह के जन्मदिन की पार्टी कुछ समय पहले ही जेल से छूटे कुछ कैदियों द्वारा दिए जाने का मामला उजागर होने के बाद अब इस मामले को दबाने के भी प्रयास किए जाने लगे हैं। हालांकि जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर इस पूरे मामले की जांच भी करवा रहे और कार्यवाही की बात भी कह रहे है।
जेल प्रशासन की छवि को दाग लगाने वाली इस घटना के बारे में जेल की दीवारें ही दबी जुबान में पूरी कहानी सुना रही हैं।  जेल कर्मचारी ही अब यह कहने लगे हैं कि पार्टी में जेल के अधिकारी और उनके खास कर्मचारी शामिल थे जिससे की  कार्रवाही की खानापूर्ति ही की जाएगी। जबकि यह बात भी सब जानते हैं यह पार्टी जेल से छूटे कैदियों ने ही दी थी।

वहीं यह बात भी सामने आ रही है कि इस पार्टी की पूरी योजना जेल के बाहर स्थित राइटर जाली में बैठकर बनाई गई थी। यहीं पर किस किसको बुलाना है तय किया गया था फिर आते जाते लोगों को समय और स्थान की सूचना दी गई थी। मेजबानी छूट कर निकले कैदियों ने की थी।
यहाँ अपने चहेते जेल प्रहरियों को पार्टी में बुलाने के लिए बकायदा कुछ कर्मचारियों ने लिस्ट तैयार की और फिर जेल प्रहरियों को पार्टी के लिए आमंत्रित किया गया।जेल के बाहर राइटर जाली जेल का वह मुख्य कार्यालय है जिसमें जेल प्रहरियों की ड्यूटी का चार्ट तैयार किया जाता है। यहीं से यह बात भी तय होती है कि किस प्रहरी को ड्यूटी में कितनी रियायत मिलती है और किसे अपनी पूरी ड्यूटी करनी होगी। यहां बाहरी व्यक्ति के प्रवेश वर्जित रहता है और यह भी कहा जा सकता है इस राइटर जाली  पर कब कौन सी मीटिंग चल रही है इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। इसी का फायदा उठाकर राइटर जाली में बैठकर जन्मदिन पार्टी में आने वालों की लिस्ट तैयार की गई।

जेल अधिकारियों और कैदियों का मिलना अजीब इत्तेफाक-

जिस होटल में जेल अधिकारी की जन्मदिन पार्टी आयोजित की गई थी। उसी होटल में जेल से छूटे कैदी भी पहुँचे थे। जिसमें जेल अधिकारियों का कहना है कि यह इत्तेफाक था कि जेल से छूटे कैदी भी वहां पहुँच गए। लेकिन उनकी पार्टी अलग हुई थी।  लेकिन यह अजीब इत्तेफाक है कि इस पार्टी में ना तो कोई  वकील था ना जिला बल का पुलिस कर्मी , ना कोर्ट का कर्मचारी ना फोटोग्राफर ना रिपोर्टर लेकिन जेल से छूटे कैदी जरूर थे ।  जेल अधिकारियों का यह इत्तेफाक सवालों के घेरे में आ गया है। जिसका जवाब उन्हेंं अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देना है।
कैदियों से पुराना याराना- जानकारी मिली है कि जो कैदी पार्टी में पहुँचे थे उनकी जेल अधिकारियों और प्रहरियों से अच्छीखासी यारी है। जेल में बंद रहने के साथ साथ जेल के बाहर रहने वाले ये कैदी एक दूसरे के मददगार रहते हैं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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