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अवैध कॉलोनी में निवेश के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से दिया जा रहा झांसा

प्रशासन के संज्ञान में दिए जा रहे ऑफरों की सामने आ जाएगी सच्चाई, लोग ठगी से बच जाएंगे

जबलपुर (जयलोक)। शहर के लगभग हर दिशा में विशेष करके शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के हिस्सों में जमकर नियम विरुद्ध तरीके से अवैध रूप से प्लाटिंग और कॉलोनियाँ बसाए जाने का खेल चल रहा है। ऐसा नहीं है कि इन सबकी जानकारी प्रशासन को नहीं है या फिर संबंधित अधिकारियों को नहीं है। सबको सब पता है लेकिन बस कार्यवाही करने की बात पर अपने अधीनस्थों को निर्देशित कर जाँच करवाए जाने की बात सामने आ जाती है। इसी परंपरा को तोड़ते हुए जबलपुर जिला प्रशासन ने अब अनुविभागीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अवैधरूप से प्लाटिंग और अवैध कॉलोनी निर्माण के संबंध में सूची तैयार करने के निर्देश दिए है।
वैसे तो कोटवार, पटवारी, आरआई, राजस्व की दृष्टि से जिला प्रशासन के आंख नाक और कान हंै। उनकी जानकारी में उनके क्षेत्र में होने वाली हर छोटी से छोटी गतिविधि रहती हैं। किसकी जमीन पर कौन प्लाटिंग कर रहा है, कौन अपने खेत पर बिना अनुमति लिए कॉलोनी काटने का काम कर रहा है। कौन बिना डायवर्शन वाली जमीन को, बिना टीएनएसपी की अनुमति लिए प्लाटों में विभाजित कर सस्ते दामों का ऑफर देकर लोगों को जाल में फँसा कर ठगने का काम किया जा रहा है। सबको सारी बातों की जानकारी है।
कलेक्टर के निर्देश पर तैयार हो रही सूची- कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर सभी एसडीएम अपने-अपने अनुविभागीय क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग को चिन्हित करने का कार्य करवा रहे हैं जहां पर बिना अनुमतियों के प्लॉटों का विक्रय किया जा रहा है या बड़े फार्म लैंड बिना मानकों के और बिना शासकीय अनुमतियों के बेचे जा रहे हैं।

फेसबुक पर चल रहे जालसाजी के विज्ञापन

जिला प्रशासन के समक्ष सबसे आसान तरीका इस प्रकार के चोरों को पकडऩे का यह है कि वह अपने आईटी सेल के माध्यम से जबलपुर में सक्रिय सोशल मीडिया के विज्ञापनों की जांच करवा लें। फेसबुक में कैसे आधा सैकड़ा से अधिक भ्रमित करने वाले संदिग्ध विज्ञापन आसानी से देखे जाते हैं जो 500, 600, 700 के भाव पर खुद का प्लॉट होने का सपना दिखा रहे हैं और अन्य जानकारियाँ छुपाई जा रही है।
इसी प्रकार के बहुत से विज्ञापन 12 लाख, 14 लाख, 15 लाख में अपने घर का सपना दिखाते हुए खुलेआम लोगों को ठगने और बेवकूफ बनाने की नीयत से यह धंधा चल रहा हैं। इनमें ना तो टीएनएसपी स्वीकृति प्राप्त होने की जानकारी होती है ना ही रेरा रजिस्ट्रेशन का कोई नंबर दिखाया जाता है और ना ही सही तरीके से प्लाटिंग की लोकेशन बताई जाती है। केवल मोबाइल नंबर दे दिए जाते हैं जिन पर फोन लगाने वाला इनकी मीठी-मीठी बातों के जाल में फंस कर कई बार अपने जीवन भर की कमाई दावँ पर लगाकर गंवा देता है।
पाटन, बरगी, बरेला, विजय नगर, पनागर रोड से आ रही कई शिकायतें- जानकारी के अनुसार विजयनगर, पाटन रोड और सूरतलाई के आसपास का क्षेत्र, महाराजपुर रोड, अमखेरा रोड, इसके साथ ही बरगी, तिलवारा, चरगवां, पनागर के आसपास का क्षेत्र अवैध प्लाटिंग और अवैध रूप से बनाए गए मकानों के निर्माण के लिए बदनाम है। गढ़ा क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर इस प्रकार की अवैध प्लाटिंग की शिकायतें प्रशासन के समक्ष पहुँची हैं।

टीएनएसपी, रेरा से स्वीकृति के झूठे दावे भी

सूत्रों के अनुसार शहर की चारों दिशाओं में चल रही अवैध प्लाटिंग के कार्य में बहुत से लोग तो सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी के साथ झूठ भी बोलकर लोगों को फंसाने का कार्य कर रहे हैं। टीएनएसपी और रेरा की स्वीकृति प्राप्त होने की बहुत सारे लोग गलत जानकारी दे रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जो जानकारियां दी जा रही हैं उनको क्रॉस चेक करके इसकी सही जांच प्रशासन कब करेगा। अवैध रूप से हुई प्लॉटिंग में प्लॉट खरीदकर बहुत सारे लोग ठगी का शिकार हो जाने के बाद ये लोग दर-दर भटकने मजबूर हो जाते हैं। आम लोगों की भी जवाबदारी है कि वह किसी भी प्रकार के निवेश से पहले संपूर्ण दस्तावेजों की स्वयं जाँच कर लें। इसके बाद ही खरीदी की कार्यवाही करें।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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