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आज और कल भी रंगों की बौछार  ग्रहण-काल में मंदिरों के पट हुए बंद

जबलपुर (जयलोक)। इस साल होली पर खग्रास-चंदग्रहण का साया नजर आ रहा है। आज 3 मार्च धुरेंडी के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ेगा, ग्रहण के कारण यह पहला अवसर है जब धुरेंडी होली जलने के एक दिन बाद होने जा रही है। ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के समय रंग खेलने की मनाही है लेकिन परंपरा अनुसार धुरेंडी के दिन खेलने वालों का मत भी प्रभावी है। कुछ लोग आज तो कुछ लोग कल धुरेंडी मना रहे हैं। पूरे देश सहित मध्य प्रदेश व जबलपुर में भी यह ग्रहण देखा जायेगा। ग्रहण की सूतक वेध सुबह 6 बजकर 23 मिनिट से प्रारंभ हो गया और ग्रहण को मोक्ष शाम 6 बजकर  47 मिनिट पर होगा। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनिट से प्रारंभ होगा ग्रहण का मध्यकाल 4 बजकर 5 मिनिट तक रहेगा, जिसका मोक्ष शाम 6 बजकर 47 मिनिट पर होगा। ग्रहणकाल में मूर्ति स्पर्श और दर्शन दोनों नहीं किये जाते।

लिहाजा आज पडऩे वाला होली धुरेडी का पर्व कल 4 मार्च को मनाया जायेगा। सभी मंदिरों में सुबह 6 बजे से पट बंद हो गए जो शाम 7 बजे तक पट बंद रहेंगे। ग्रहण मोक्ष के बाद रात्रि 8 बजे से हवन पूजन प्रारंभ होंगे। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ग्रहण मघा नक्षत्र सिंह राशि पर प्रभावशाली रहेगा। 1996 में होली पर चंद्रगहण का योग बनने के 30 साल बाद 2026 में फिर होली के दिन ही चंद्रग्रहण पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि राशिवार ग्रहण का प्रभाव इस तरह रहेगा।

कल होगी धुरेड़ी

रंगों का मदमस्त रंग रंगीला त्यौहार होली इस साल चंद्रग्रहण के फेर में फंस गया। पंचाग के मुताबिक धुरेडी आज है तो वहीं ज्योतिषी के मुताबिक धुरेडी कल 4 मार्च बुधवार को मनाई जाएगी। ज्यादातर लोग परंपरानुसार आज धुरेडी मनाने का आतुर हैं, जो लोग ग्रहण को मान रहे है वे कल होली मनायेंगे। बहरहाल होली के रंगों को लेकर लोगों का यह भी तर्क है कि ग्रहण पूजन पाठ भोजन आदि पर निषिद्ध होता है रंग और अबीर समरसता का प्रतीक है उन्हें कभी भी लगाया व खेला जाता है। वैसे भी पिछले कुछ वर्षों से होली का यह मदमस्त त्यौहार अराजक तत्वों ने उत्पात मचाकर बदरंग बनाने की कोशिशें कीं जिससे यह त्यौहार धीरे-धीरे परंपरागत से हटकर औपचारिक होकर रह गया है।

अब नन्हे-मुन्ने बच्चे ही उत्साह और उमंग के साथ रंग गुलाल उड़ाते हैं। बाजारों में पिचकारी और टीशर्ट भी खूब बिकी। होली की हुड़दंग करने की परंपरा पुरानी रही है, लेकिन इस हुड़दंग में आत्मीयता, अपनापन और सद्भावना नहीं रह गई। संस्कारों के इन रंगों में लुच्चे, लफंगों ने राग द्वेष घोल कर होली के रंगों से लोगों के दिमाग पर भय और कुंठा के भाव घोल दिये हैं। यही वजह है कि अब होली के इस मदमस्त त्यौहार पर संभ्रांत परिवारों के लोग घरों से नहीं निकलते। कालोनियों में जरूर लोग टोलियां बनाकर शांत वातावरण में मौज मस्ती के साथ रंगों का त्यौहार मना लेते हैं।

साल का पहला चंद्रग्रहण, चंद्र ग्रहण से पहले बंद हो जाएंगे मंदिरों के पट

 

 

Jai Lok
Author: Jai Lok

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