
भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बनने का सौभाग्य भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों और सेनानियों के त्याग और तपस्या और बलिदान से मिला है। 200 वर्षों से अधिक तक भारत को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता ने अपने अधीन रखा और भारत के ही लोगों को उनकी गुलामी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारतीयों को ब्रिटिश शासन के लगातार अन्याय और अत्याचारों को 200 वर्षों तक सहना पड़ा है। 200 वर्षों तक भारतीयों की कई पीढिय़ों ने गुलामी का साम्राज्य देखा है।

वहीं ब्रिटिश शासकों के खिलाफ भारतीयों ने स्वतंत्रता की अलख जगाने और ब्रिटिश शासकों को वापस उनके देश भेजने के लिए जो मशाल जलाई उससे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पूरे देश में गांव गांव तक जागृत होता चला गया। 15 अगस्त 1947 को हमारे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के त्याग और बलिदान से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। स्वतंत्रता को मिले भी अब 78 वर्ष वर्ष पूर्ण हो गए हैं। जब देश को आजादी मिली तब इस देश में सुई तक नहीं बना करती थी इस दौर को देखने वाली पीढिय़ां भी अलविदा हो चुकी हैं अब आज की जो पीढ़ी है वह सक्षम , समर्थ, वैभवशाली और बलशाली समृद्ध भारत देखने का सौभाग्य प्राप्त कर रही है। आज वह दौर है जब भारत लगातार आजादी के बाद से 78 वर्षों की अवधि में हर क्षेत्र में उन्नति कर रहा है। भारत आज दुनिया के शक्तिशाली देशों में भी शुमार हो चुका है। दुनिया आज भारत की ताकत का लोहा मान रही है।

1962 का वह समय भी याद आता है जब भारत को चीन के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा और आज वह समय आया है जब भारत चीन के सामने एक बड़ी ताकत बनकर सीना तानकर खड़ा है और उसे चुनौती भी दे रहा है। आज भारत अमेरिका जैसे देश के आगे भी झुकने के लिए तैयार नहीं है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर चला कर पाकिस्तान को जिस तरह से मुंह तोड़ जवाब दिया है उससे पूरी दुनिया भारत की ताकत को जान चुकी है।भारत पाताल से लेकर जमीन तक और जमीन से लेकर आकाश तक अपनी ताकत पूरी दुनिया को दिखा चुका है। अब तो भारत अंतरिक्ष में भी अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ चुका है। चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन चुका है। भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को सुरक्षा की दृष्टि से आत्मनिर्भर बना रहे हैं तो वहीं वे अब भारत को दुनिया को हथियार बेचने वाला देश भी बनाने जा रहे हैं। लेकिन आज जब हम आजादी का जश्न मना रहे हैं तब इस बात को भी नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं कि आजादी का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं बल्कि सामाजिक सामान्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काफी प्रयास होना बाकी है।

इन प्रयासों को सभी को मिलकर गति देना होगी। आज भी हमारे गांव में रहने वाले किसानों, मजदूरों ,श्रमिकों और आदिवासियों को प्राकृतिक संसाधनों पर हक दिलाने की आवश्यकता है और हमें उम्मीद करना चाहिए की आने वाले समय में उन्हें यह हक प्राप्त होगा। आपरेशन सिंदूर को समर्पित इस बार के स्वाधीनता दिवस के अवसर पर सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।
सच्चिदानंद शेकटकर (समूह संपादक)
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Author: Jai Lok







