
जबलपुर (जयलोक)। महाराजश्री श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ सिविक सेंटर मढ़ाताल में भाद्रपद शुक्ल तृतीया मंगलवार ( तीजा) पर प्रात: स्मरणीय परम पूज्यनीय गुरुदेव भगवान अनन्त श्रीविभूषित ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज श्री का 101 वॉं प्राकट्योत्सव महामहोत्सव मनाया गया।

जिसके क्रम में भगवान श्री हरिहरेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक, गणेश पूजन,सहस्रार्चन, गुरु पादुका पूजन एवं रात्रि 8:00 बजे महाआरती ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानन्द जी महाराज श्री के करकमलों से किया गया। जिसमें सभी भक्त सम्मिलित होकर पूजन किया एवं प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ अर्जित किया। ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानन्द जी महाराज श्री ने बताया कि प्रात: स्मरणीय परम पूज्यनीय गुरुदेव भगवान अनन्त श्रीविभूषित ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज श्री उन महापुरुषों में से थे जिनके विषय में श्रीमद्भागवद्गीता में- भगवान् श्रीकृष्ण का उद्घोष है-धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।
पूज्य महाराजश्री, भगवत्पाद आद्यशङ्कराचार्य द्वारा प्रवर्तित महान वैदिक सनातनसंस्कृति के ध्वजवाहक युगपुरुष थे, जो मानव को पशुता से ऊपर उठाकर उसके ऐहलौकिक एवं पारलौकिक विकास का पथ प्रशस्त करते थे। राष्ट्र और धर्मरक्षण की अनन्तऊर्जा पूज्य महाराजश्री में विद्यमान थी। महाराजश्री 100 वर्ष की बयोवृद्धता में भी पूर्णरूपेण सक्रिय रहकर वैदिक सनातनसंस्कृति और राष्ट्रधर्म का सम्यक् निर्वहन कर कोटि-कोटि जनों के प्रेरणास्त्रोत बने रहे। पूज्य महाराजश्री के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर दृष्टिपात् करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि, वे भगवान् शिव के सर्वज्ञअवतार भगवत्पाद आद्यशङ्कराचार्य के अवतार थे जो उनके अपूर्ण कार्यों को पूर्णता प्रदान करने अवतरित हुए थे।

पादुका पूजन में उपस्थित भारत सिंह यादव, मनीष पाण्डेय, संजय मिश्रा, ठाकुर रामजियन सिंह, मधु यादव, मनोज खरे , वंदना खरे , चन्द्रशेखर पटेल, मनोज सेन आदि।

Author: Jai Lok







