
भोपाल (जयलोक)। आने वाले समय में सत्ता, संगठन और संघ में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भाजपा विधायकों और नेताओं को मंत्रिमंडल विस्तार, संगठन विस्तार, निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है, वहीं आरएसएस के लोगों को भी संगठन में भागीदारी का इंतजार है। इस बीच भाजपा में संगठन महामंत्री की नियुक्ति की चर्चा भी तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि मप्र भाजपा को जल्द ही नया प्रदेश संगठन महामंत्री मिल सकता है। इसी सप्ताह इसका ऐलान हो सकता है। गौरतलब है कि मप्र, राजस्थान सहित कई राज्यों में जहां भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री के पद खाली पड़े हुए है, तो वहीं छत्तीसगढ़ में पिछले 12 वर्षों से इस पद पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की हरियाणा के समालखा में सम्पन्न हुई, जिसमें संघ के मौजूदा स्वरूप में परिवर्तन सहित दूसरे निर्णय हुए। जानकारों की मानें तो संघ की इसी बैठक में भाजपा में विभिन्न दायित्वों के लिए 50 से अधिक स्वयं सेवकों (प्रचारकों) को मुक्त किया गया है। इन्हीं प्रचारकों को भाजपा अपने हिसाब से अलग-अलग दायित्व सौंप सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि संघ के जो प्रचारक भाजपा में आए हैं, उन्हें इन राज्यों में दायित्व दिए जा सकते हैं। इनमें से कुछ ऐसे प्रचारक भी हैं, जो वर्तमान में संघ के विभिन्न अनुषागिक संगठन का दायित्व संभाले हुए थे। इन्हीं में से मध्यप्रदेश सहित दूसरे प्रांतों में भाजपा अपनी संगठनात्मक नियुक्तियों की आश्यकताओं को पूरा करेगी। भाजपा सूत्रों की माने तो प्रदेश भाजपा अपने संभागीय प्रभारियों के तौर पर उन नेताओं की नियुक्ति कर सकती है, जो संभागीय संगठन महामंत्री की व्यवस्था के दौरान कुछ जिलों और संभागों में यह दायित्व संभाल चुके है। हालांकि इनमें से कई नेता अब निगम मंडल की दौड़ में है। इस बार के संभागीय संगठन महामंत्रियों के पहले से ज्यादा अधिकार संपन्न बनाया जाएगा।

कल बड़े फैसले का दिन- जानकारों की मानें तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के अंतिम दिन यानि कि 18 मार्च को बड़े फैसले ले सकता है। जिसमें राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के निर्णय शामिल हैं। चर्चा यह भी है कि संघ की पृष्ठभूमि वाले कुछ भाजपा नेताओं को पदोन्नत किया जा सकता है, तो कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की संघ में वापसी हो सकती है। इसी बैठक में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपनी प्रांतीय ईकाईयों के स्थान पर संभाग कार्यक्षेत्र का स्वरुप देगा। इसे यदि मध्यप्रदेश के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो यहां संघ के मालवा क्षेत्र, मध्य भारत क्षेत्र और महाकौशल क्षेत्र के स्थान पर अब इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर और रीवा संभाग कार्यक्षेत्र स्थापित किए जाएंगे, जहां के प्रमुख अपने-अपने क्षेत्र में संघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी भी संघ के पदचिन्हों पर चलकर एक बार फिर से संभागीय संगठन महामंत्री की नियुक्ति करेगी। जिससे संगठन से जुड़े छोटे-बड़े सभी तरह के निर्णय संभाग स्तर पर ही लिए जा सके और कार्यकर्ताओं को अपनी समस्याओं या संगठनात्मक कार्यों के लिए भोपाल के ज्यादा चक्कर नहीं लगाने पड़े।

और अधिकार संपन्न होंगे क्षेत्रीय संगठन महामंत्री- बताया जा रहा है कि भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के पद को और अधिकार संपन्न बनाएगी। इस पद पर बैठने वाले पदाधिकारी की नजर सरकार और संगठन के समन्वय के अलावा पार्टी के सभी छोटे-बड़े निर्णयों में सीधा हस्तक्षेप रहेगा। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अपने प्रभार के प्रदेशों में ज्यादा से ज्यादा समय देंगे और संगठन को और कैसे मजबूत बनाया जाए, इसकी रणनीति पर काम करेंगे। जानकारों की माने तो पार्टी संगठन अपनी नई व्यवस्था में सरकार के मंत्रियों पर भी नजर बनाने के लिए संघ की पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं को उनके निज स्टाफ में पदस्थ कराएगी। हालांकि अभी भी ये व्यवस्था है, लेकिन कई मंत्रियों के यहां तैनात ऐसे स्टाफ को लेकर शिकायतें भी सामने आई है। पार्टी चाहती है कि अब मंत्रियों के यहां ऐसे कार्यकर्ताओं को बैठाया जाए, जो कम से कम संघ प्रशिक्षित हो और उसके द्वारा पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जाता रहा हो। बताया गया है कि ऐसे कार्यकर्ताओं की पार्टी द्वारा जल्द ही सूची तैयार कराई जाएगी। जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में प्रदेश संगठन द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

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Author: Jai Lok






