
ओम प्रकाश मेहता
(जयलोक)। विश्व के आकाश पर फिर एक बार तीसरे विश्व युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके कारण दुनियां दो हिस्सों में विभाजित नजर आ रही है, ईरान और इजरायल की आपसी भिड़ंत के कारण यह स्थिति पैदा हुई है, इजराइल की तरफ से अमेरिका दम भर रहा है, तो ईरान के साथ रूस और चीन खड़े हैं, अब दावा किया जा रहा है कि इसराइल ने यदि ईरान पर हमला किया तो अमेरिका और यूरोप जैसे देश तुरंत बेंजामिन नैतन्याहू के समर्थन में खड़े नजर आएंगे।
दूसरी तरफ ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई इस लड़ाई में अकेले नहीं है बल्कि उनके साथ रूस और चीन खड़े नजर आ रहे हैं। यदि यह स्थिति जमीनी हकीकत में तब्दील होती है तो इससे तीसरे विश्व युद्ध का आगाज़ हो जाएगा, बहरहाल दोनों ही ओर से हमले जारी हैं और इससे स्थिति भयावह होने की आशंका जताई जा रही है।
विश्व को आशंका है कि शक्तिशाली देशों की यह भिड़ंत कहीं परमाणु युद्ध में तब्दील न हो जाए, क्योंकि दोनों ही खेमें परमाणु हथियारों से लैस हैं और इसीलिए विश्व के कई देशों से इस टकराव को रोकने की आवाज आ रही है और विश्व दो गटों में बटा साफ नजर आ रहा है। इस बीच चीन ने कहा है कि वह पूरी मुस्तैदी से ईरान के साथ खड़ा है और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करता है, रूस ने भी इसी तरह का रूख अख्तियार किया है, रूस ने ईरान को शांति का चैंपियन बताया है।
इसी बीच अमेरिका ने अपने समर्थक इसराइल को उन्नत हथियारों के साथ खुफिया सहायता भी उपलब्ध करा दी है, यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनायिक जोसेफ बोरेत्व का कहना है कि इसराइल का आत्मरक्षा का अधिकार है, यद्यपि यू.एन. ने 800 अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने खुले पत्र में सरकारी नीतियों की आलोचना की है जिसमें कहा गया कि यह नीतियां नैतिक स्थिति को कमजोर कर रही है, चीन और रूस का ईरान समर्थन ऐसे समय में आया है, जब ईरान पर इजरायल द्वारा साइबर हमले और लक्ष्यपूर्ण हिंसा के आरोप लगे हैं, ईरान ने जवाबी कार्यवाही की धमकी दी है, जिससे तनाव बढ़ता दिखाई देने लगा है।
ऐसी परस्पर तैयारीयों और घोषणाओं के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपातकालीन बैठक आयोजित कर इस पूरे मामले पर गंभीर विचार विमर्श करने का फैसला लिया है।
यह बैठक आज भारतीय समयानुसार अर्धरात्रि के बाद होगी। जिसे युद्ध की आशंका के बीच अहम माना जा रहा है, स्थिति इसलिए भयावह आशंका से परिपुरित नजर आ रही है, क्योंकि अमेरिका और यूरोप इजरायल के साथ अपने सैन्य बल को साथ लिए खड़े नजर आ रहे हैं, तो चीन और रूस ईरान की हर तरह की मदद की पेशकश कर रहे हैं, इस बीच चीन और रूस ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें ईरान को क्षेत्रीय शांति बनाए रखने को कहा गया है।
इसके लिए आयोजित बैठक में चीन और रूस ईरान के पक्ष में प्रस्ताव पेश करेंगे, जबकि अमेरिका वह यूरोप इजराइल का बचाव करेंगे, क्योंकि यह टकराव वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है भारत जैसे देशों की इस द्वंद्व में पक्षपात विहीन रहने की रणनीति है, ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान और इसराइल दोनों ही भारत के अच्छे दोस्त हैं।
इस प्रकार कुल मिलाकर इस विस्फोटक स्थिति को यदि ठीक से नहीं संभाला गया तो फिर तीसरे विश्व युद्ध की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता इसलिए इस पर पूरे विश्व की नजर है।
(यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है)

Author: Jai Lok







