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ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में देश में आठवें नंबर पर प्रदेश

फर्जी सिम गिरोह का विदेशी सिंडिकेट से कनेक्शन
टेलीकॉम कंपनियाँ भी रडार पर
भोपाल (जयलोक)। साइबर सेल ऑपरेशन फास्ट (फोर्ड एक्टिवेटेड सिम टर्मिनेशन) के तहत फर्जी सिम कार्ड गिरोह का भंडाफोड़ किए जाने के बाद टेलीकॉम कंपनियों से भी पूछताछ करेगी। साइबर सेल को संदेह है कि बगैर टेलिकॉम कंपनियों (टीएसपी) की मदद के हजारों सिमों की बिक्री और फर्जी दस्तावेजों पर एक्टिवेशन संभव नहीं है। ऐसे में फर्जीवाड़ा कर इन सिमों को चालू कराने की जानकारी लेने के लिए टीएसपी से जुड़े अफसरों को तलब किया जाएगा। इसके साथ ही अब साइबर सेल फर्जी नंबरों को खोजने के लिए गृह मंत्रालय के आईफोरसी (इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर) पर ही निर्भर नहीं रहेगी। अब सेल सीधे डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम (डीओटी) की हेल्पलाइन 1930 पर आने वालीं शिकायतों पर संज्ञान लेगी। साइबर सेल के एसपी प्रणय नागवंशी के मुताबिक गिरोह के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चार माह पहले जानकारी मिली थी, जिसके बाद प्लान बनाकर रैकेट को बेनकाब किया गया।
एमपी में एक लाख से ज्यादा घटनाएं
केंद्रीय गृह मंत्रालय की नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (एनसीटीएयू) की स्टेट-वाइज रिपोर्ट 2025 के तहत 28 फरवरी 2025 तक एमपी में साइबर फ्रॉड के 1 लाख 5 हजार 991 केस दर्ज किए गए थे। एमपी देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में आठवें नंबर पर है। देश में महाराष्ट्र में सर्वाधिक 4 लाख 27 हजार 607, गुजरात में 3 लाख 67 हजार 754, कर्नाटक में 2 लाख 52 हजार 487, हरियाणा में 2 लाख 12 हजार 1, दिल्ली में 2 लाख 5 हजार 464, बिहार में 1 लाख 49 हजार 857, आंध्रप्रदेश में 1 लाख 13 हजार 439, केरल में 83 हजार 945 और छत्तीसगढ़ में 63 हजार 941 मामले दर्ज हुए थे। रिपोर्ट में साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में पहले नंबर पर मेवात है, इसके बाद जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापट्टनम और गुवाहाटी के नाम हैं। साइबर सेल के अनुसार एमपी के लोगों से होने वाली ज्यादातर धोखाधड़ी एमपी के बाहर बैठे गिरोह ने की है।
51 हिरासत में, टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच
20 जिलों में छापेमारी कर कुल 51 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इन सभी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए हजारों सिम कार्ड जारी करने के आरोप हैं, जिनसे उपयोग देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। सिम रैकेट में सीधी, छतरपुर, दतिया, सीधी और शिवपुरी हॉट स्पॉट के रूप में मिले थे जबकि ग्वालियर, इंदौर, दमोह, मुरैना और जबलपुर भी प्रमुख केंद्र के रूप में उजागर हुए थे। साइबर सेल पुलिस को गृह मंत्रालय से जानकारी मिली थी कि एमपी में 3824 सिम विक्रेताओं ने 7500 से अधिक फर्जी सिम जारी की हैं, जो लोन ऐप फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, और फाइनेंशियल फ्रॉड में उपयोग की गई। फर्जीवाड़े में शामिल सिम विक्रेता और एजेंट गिरोह बनाकर झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अलावा कंबोडिया, लाओस, वियतनाम और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों में सिम किट सप्लाई कर रहे थे। साइबर सेल इस गिरोह के खुलासे के बाद टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच कर रही है।्र ऑपरेशन फास्ट के पहले चरण में पुलिस ने 20 जिलों के विभिन्न थानों में 94 संदिग्धों के खिलाफ 50 एफआईआर दर्ज कर कुल 51 आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनके पास से 24 लापू सिम कार्ड, 33 मोबाइल और लैपटॉप, 9 थंब इम्प्रेशन मशीनों समेत बड़ी संख्या में डेबिट कार्ड, पासबुक और फेक सिमें भी मिली हैं।
साइबर सेल अब विदेशी लिंक की तलाश में
साइबर सेल अब इस गिरोह के विदेशी लिंक की खोजबीन में जुटी है, जिनकी मदद से सिमें कंबोडिया, लाओस, वियतनाम और थाईलैंड भेजी गई हैं। साइबर सेल का दावा है कि यह इंटरनेशनल ऑनलाइन फ्रॉड सिंडिकेट के बगैर संभव नहीं है। इन सिमों को एक्टिव कर इनसे न केवल डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया बल्कि इंस्टाग्राम पर फर्जी विज्ञापन के पेज बनाकर भी लोगों से साड़ी, कॉस्मेटिक्स और जेवर कम दाम पर बेचने केनाम पर करोड़ों रूपए ठगे गए। साइबर सेल के अनुसार जल्द ही इस गिरोह के विदेशी लिंक के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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