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कई मायनों में देश दुनिया में  मिसाल बनेगा ये फ्लाई ओवर, कुछ मामलों में देश का और कुछ में प्रदेश का पहला बड़ा फ्लाई ओवर होने का बनाया है रिकार्ड

राकेश सिंह की मेहनत का प्रतिफल, कल केन्द्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री करेंगे जनता को समर्पित

जबलपुर (जयलोक)। कल लोकार्पित होने जा रहा फ्लाई ओवर ना सिर्फ प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाई ओवर है बल्कि कई मायनों में यह देश और दुनिया में एक मिसाल के रूप में भी दर्ज हो गया है। उसकी मुख्य वजह यह है कि इस फ्लाई ओवर के कई आकर्षक और महत्वपूर्ण निर्माण के बिंदु है जिन्होंने अलग अलग दायरों में प्रदेश, देश और दुनिया में अपने उच्चतम मानक दर्ज कर अलग स्थान बना लिया है। @rakesh singh

फ्लाई ओवर के लोकार्पण के लिए कल मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शहर आगमन होने जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी का शनिवार 23 अगस्त को सुबह 11.25 बजे विशेष विमान द्वारा नागपुर से जबलपुर आगमन होगा। श्री गडकरी सुबह 11.30 बजे डुमना एयरपोर्ट से कार द्वारा मदनमहल प्रस्थान करेंगे तथा यहाँ दोपहर 12 बजे मदनमहल-दमोहनाका फ्लाईओवर एवं राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे। @nitin gadkari@cm mohan yadav@mpgovernment

केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी दोपहर 1.30 बजे कार्यक्रम स्थल से प्रस्थान कर दोपहर 1.40 बजे लोक निर्माण मंत्री से राकेश सिंह के साउथ सिविल लाइन स्थित निवास पहुँचेंगे तथा दोपहर 2.30 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक सिविक सेंटर स्थित दैनिक भास्कर के विशंभर भवन में आयोजित समारोह में शामिल होंगे। केंद्रीय सडक़ एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शाम 4 बजे विशेष विमान द्वारा डुमना एयरपोर्ट से नागपुर प्रस्थान करेंगे।#nitin gadkari #flyoverjabalpur#jabalpurflyover

तो छिन जाता जबलपुर से यह फ्लाई ओवर

2016 में मंत्री नितिन गडकरी का जबलपुर प्रवास हुआ था उस दौरान सांसद राकेश सिंह के निवास पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस फ्लाई ओवर की माँग श्री गडकरी से की गई थी। फिर यह कागजों पर जीवित हुआ और कई अड़चने आईं। पहली अड़चन थी कि इस रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग मानते हुए फ्लाई ओवर निर्माण की घोषणा कर दी गई थी। बाद में पता चला कि यह सडक़ राष्ट्रीय राजमार्ग से हट चुकी है। राकेश सिंह ने पुन: केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी से संपर्क साधा और स्थिति बताई जिसके  बाद उन्होंने केन्द्रीय सडक़ निधि से इस फ्लाई ओवर को बनाने की घोषणा कर दी। केन्द्र सरकार से मिलने वाली पूरी राशि सिर्फ जबलपुर के इस फ्लाई ओवर पर खर्च ना हो जाए इसको लेकर भी कुछ लोगों ने अड़ंगेबाजी करने का प्रयास किया। लेकिन सांसद और लोकसभा के मुख्य सचेतक रहते हुए राकेश सिंह ने अपने प्रभाव का पूरा उपयोग किया और जबलपुर के खाते में इस सौगात को छिनने नहीं दिया।

जब नाले के बदले माँगे गए 56 करोड़

फ्लाई ओवर निर्माण के दौरान जब संबंधित विभागों से उनकी अनापत्ति और सहमति ली जा रही थी तब मदन महल स्टेशन के पास स्थित नाला जो कि रेलवे की भूमि पर है को उपयोग में लेने की बात आई। जिस पर रेल विभाग ने उक्त जमीन के बदले 56 करोड़ रूपये राशि की माँग रख दी। यह बड़ी अड़चन थी राकेश सिंह फिर सक्रिय हुए और पहले रेलवे के महाप्रबंधक से मिले और जमीन के बदले जमीन की पेशकश रखी। लेकिन यहां बात नहीं बनी तो राकेश सिंह ने दिल्ली का कूच किया और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर रेलवे के नाले के बदले नाले की जमीन दिए जाने की बात पर सहमति बनवाई और 56 करोड़ रूपये का उपयोग फ्लाई ओवर निर्माण में जुड़ सका।

कुछ बातें जो बनाती  हैं इसे खास

इ 385.5 मीटर का एक्स्ट्रा डोज केबल स्टे ब्रिज फ्रांस के इंजीनियरों की निगरानी में बना।
इ देश का पहला ऐसा फ्लाई ओवर है जिसका केबल स्टे ब्रिज किसी पूरे के पूरे रेलवे स्टेशन को एक ओर से दूसरे ओर तक पार कर रहा है। 17 मीटर की ऊँचाई से यह मदन महल स्टेशन के ऊपर से गुजर रहा है। इसकी लागत में सौ करोड़ रूपये खर्च हुए हैं।
इ सांसद के रूप में राकेश सिंह के प्रयासों को केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की व्यक्तिगत रूचि से बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।
इ यह अगले 100 सालों तक शहरवासियों को पूरी सुरक्षा के साथ अपनी सेवा देगा।
इ केन्द्रीय रिजर्व फंड से 11 सौ करोड़ की बड़ी राशि से बनने वाला यह प्रदेश का पहला और देश का दूसरा सबसे बड़ा फ्लाई ओवर है।
इ 7 किमी लंबे इस फ्लाई ओवर में तीन बो स्ट्रिंग ब्रिज बनाए गए हैं। 50 हजार पौंधे फ्लाई ओवर के नीचे पर्यावरण संरक्षण हेतु लगाए गए हैं।
इ फ्लाई ओवर के नीचे की खाली जगह का सदुपयोग करते हुए अलग अलग स्थानों पर बास्केट बॉल कोट, ओपन जिम, बच्चों के लिए पार्क बनाए गए हैं।
इ जबलपुर की जनता के अलावा यहां से गुजरकर देश के विभिन्न हिस्सों में जाने वाले वाहन चालकों को इस सबसे बड़े फ्लाई ओवर का लाभ मिलेगा।
इ 45 मिनट की दूरी को अब बिना यातायात दबाव के 8 से 10 मिनट में तय किया जा सकेगा।
इ इस सबसे बड़े फ्लाई ओवर के साथ डुमना एयरपोर्ट का नामकरण वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम से किया गया है।
इ कई राज्यों की सरकारें इस पुल को देखने समझने के लिए संपर्क कर चुकी हैं जल्द ही उनके प्रतिनिधि मंडल इस पुल का अवलोकन करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से बने इस फ्लाई ओवर की खासियत को देखने के लिए आएंगे।

 

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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