
जबलपुर (जयलोक)
सनातन धर्म में नदियों, तालाबों का बहुत ही महत्व है। हर धार्मिक कार्य में इनकी उपयोगिता बताई गई है। कल से पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है। इस दिन लोग अपने पितरों को घर बुलाने के लिए नदियों के किनारे जाते हैं। नदियों के किनारे पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा सनातन काल से ही चली आ रही है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि पवित्र नदियों के किनारे तर्पण या पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रतिवर्ष लाखों लोग विदेशों से केवल पिंडदान करने के लिए भारत पहुंचते हैं।

गया जी का महत्व
ज्योतिषाचार्य डॉ पीएल गौतमाचार्य के अनुसार वैसे तो नर्मदा समेत सभी नदियों में इस क्रिया को किया जा सकता है, लेकिन सबसे अधिक पुण्य या मान्यता गया जी घाट की है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने पिता दशरथ की आत्म शांति के लिए यहां पिंडदान किया था तभी से यह मान्यता चली आ रही है। गरुड़ पुराण में वर्णित है कि पिंडदान करने गया जाने के लिए जो लोग घर से निकलते हैं, उनके एक एक कदम पितरों को स्वर्ग के द्वार जाने वाली सीढ़ी बन जाते है। स्वयं विष्णु यहां पितृ देवता के रूप में मौजूद हैं, इसलिए इसे पितृ तीथ भी कहा जाता है। फल्गु नदी के तट पर पिंडदान किए बिना पिंडदान हो ही नहीं सकता।

नर्मदा तटों पर हो रहे पिंडदान
पितृपक्ष कल से शुरू हो रहे हैं लेकिन लोगों में आज यह दुविधा रही कि पितृ पक्ष आज से शुरू हुए। जिसके कारण आज से ही नर्मदा तट गौरीघाट, तिलवारा, भेड़ाघाट में पितृों का याद कर पिंडदान करने वालों की भीड़ उमडऩे लगी। कल से भीड़ बढ़ेगी और यह 15 दिनों तक यह सिलसिला जारी रहेगा।

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Author: Jai Lok







