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काशीनाथ होते तो वे मुरारी बापू को सुनते और लिखते

रवींद्र दुबे, (जय लोक)। वरिष्ठ पत्रकार काशीनाथ शर्मा ‘गुरु’ को हम सब से बिछड़े एक वर्ष हो गया इस एक साल में शायद ही कोई दिन ऐसा रहा होगा, जब काशीनाथ जी की चर्चा न हुई हो। कोई भी आयोजन हो, दुख का हो, या सुख का जब भी सब मिलते किसी न किसी बहाने उनकी चर्चा निकल आती थी। रविवार को ही गौरीघाट में हितकारिणी सभा से जुड़े सदस्य आदरणीय रम्मू श्रीवास्तव की पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल होने शहर के अनेक गणमान्य नागरिक गए थे। तभी वहां पप्पू ओबेरॉय मिले और अचानक बोल पड़े ‘तुमको देखकर पूछने वाला था कहां हैं ‘पंडितजी’…. फिर याद आया अरे वो नहीं रहे। मैंने उनको बताया कि सोमवार को एक साल हो जाएंगे तो वे भरोसा ही नहीं कर सके। उनके कम उम्र में चले जाने का सबको दुख है। पीड़ा है।….लेकिन यह भी नियति ने तय कर रखा है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका जाना बहुत बड़ा नुकसान है। काशीनाथ शर्मा अपनी युवावस्था में युवक कांग्रेस से भी जुड़े रहे और वह कांग्रेस के प्रचार प्रसार में भी अपना योगदान देते रहे। जब जबलपुर से दैनिक नव भास्कर प्रकाशित हुआ तब इसके स्थानीय संपादक अजित वर्मा जी से उनके कार्यालय में काशीनाथ जी की भेंट हुई। तब अजित वर्मा जी ने काशीनाथ जी को नव भास्कर ज्वाइन करने के लिए कहा और वे मान भी गए इस तरह काशीनाथ जी की पत्रकारिता की शुरुआत अल्पजीवी नव भास्कर से हुई। शहर के कई समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं देने के बाद काशीनाथ जी इंदौर के दैनिक अग्निबाण को जबलपुर लेकर आए और बहुत दिनों तक उसका संपादन भी किया। काशीनाथ जी इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता में भी सक्रिय हुए जबलपुर में कुछ समय काम करने के बाद में प्रदेश की राजधानी भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक चैनल में काम करने चले गए। काशीनाथ जी का पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ा योगदान यह रहा है कि उन्होंने कई युवा पत्रकारों को पत्रकारिता के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया और उनका मार्गदर्शन भी करते रहे।

काशीनाथ जी ज्ञान के अथाह सागर थे। शहर में ओशो जयंती पर कथा वाचक मुरारी बापू कथा कर रहे हैं। काशीनाथ जी आज होते तो वे मुरारी बापू को सुनने जरूर जाते और ‘दोनों पक्ष’ से हम सबको अवगत कराते। ओशो ने कथा वाचन और राम पर कब क्या क्या कहा… क्या सही है क्या गलत है। वह भी प्रसंग सहित बताते…..! गुरु का ओशो पर गहन अध्ययन भी था। हम सब आज उनकी कमी को महसूस करते हैं और हमेशा करते रहेंगे।
सादर नमन। जयलोक परिवार की ओर विनम्र श्रद्धांजलि

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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