
जबलपुर (जयलोक) । अपनी प्राकृतिक वन संपदा से परिपूर्ण जबलपुर जिला विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों की गतिविधियों के लिए जाना जाता है। हमारे जिले में मगर भी अधिक पाए जाते हैं मगरमच्छ भी अधिक पाए जाते हैं और बहुत ही शर्मीले किस्म का जानवर माने जाने वाला तेंदुआ भी बड़ी संख्या में पाया जाता है।
अब जबलपुर जिले के सीमा क्षेत्र के अंतर्गत कितने तेंदुए वास्तविक संख्या में विचरण कर रहे हैं इसकी गणना करने का कार्य प्रारंभ करने की रूपरेखा तय की जा रही है। इसके लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक से अनुमति मांगी गई है। अनुमति इस बात की माँगी गई है कि जिले की सीमा के अंतर्गत आने वाले वन मंडलों में कितने तेंदुए विचरण कर रहे हैं उनकी गणना हो सके। यह सर्वे वन विभाग और राज्य वन अनुसंधान के विशेषज्ञों के द्वारा मिलकर किए जाने की बात कही जा रही है। अगर इस सर्वे की अनुमति मिल जाती है तो इस सर्वे के पूर्ण होने के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि जबलपुर के शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुओं की संख्या कितनी है और इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है या कमी आई है। हालांकि वन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जबलपुर का वन परिक्षेत्र तेंदुए के विचरण के लिए बहुत उपयुक्त है और विगत एक दशक में यहां पर तेंदुओं के कुनबा काफी बढ़ा है। जबलपुर में मानव वन्य जीव संघर्ष न के बराबर है।
सूत्रों का कहना है कि पिछला सर्वे 2023 में हुआ था। उस सर्वे में जो जानकारियां सामने आई थी उसे कई बार चुनौतियां दी जा चुकी हैं क्योंकि उस सर्वे में यह कहा गया था कि केवल 15 तेंदुए पाए गए हैं। जबकि वन जीवन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इतने तेंदुए की संख्या तो केवल डुमना नेचर पार्क में ही है। इससे कहीं अधिक संख्या में खमरिया और आसपास के जंगलों में तेंदुओं की उपस्थिति है। सामान्य रूप से ऐसे सर्वे में इस बात की जानकारी एकत्रित की जाती है कि तेंदुए किस क्षेत्र में अधिक पाए जाते हैं शहरी क्षेत्र से ऐसे कौन से लगे हुए क्षेत्र हैं जहां पर तेंदुए की गतिविधियां अधिक हैं। इसके साथ ही तेंदुओं को अपने विचारण के लिए कौन सा क्षेत्र अधिक पसंद है यह इस प्रकार के सभी बिंदु सर्वे में शामिल किए जाते हैं। इस सर्वे से मिलने वाले आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जिससे वन विभाग और सरकार अपनी रणनीति आगे की तैयार करती हैं। जबलपुर में तेंदुओं के लिए कई अनुकूल स्थान हैं जिनमें संग्राम सागर, ठाकुरताल, बामेंरहा गांव खमरिया सहित सैन्य क्षेत्र भी शामिल हैं। यह पूरा सर्वे होगा या नहीं यह प्रधान मुख्य वन संरक्षण से मांगी गई अनुमति पर निर्भर करता है।

Author: Jai Lok







