
जबलपुर (जयलोक)
कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई खौफनाक वारदात देशभर में लोगों में आक्रोश और नाराजगी देखी जा रही है। इसी कड़ी में डॉक्टरों ने भी इस वारदात को लेकर अपनी आवाज उठाई है। जिसके तहत प्रदेशभर के जूनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गये। शहर में भी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने हड़ताल का समर्थन किया और काम बंद कर हड़ताल शुरू की। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सभी जिला ब्रांचों को आज 24 घंटे की हड़ताल पर रहने का आव्हान किया है। इस हड़ताल में सरकारी और निजी अस्पताल भी शामिल हैं। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर सुब्बा राव, सचिव डॉ. पुष्पराज भटेले, कोषाध्यक्ष डॉक्टर दीपक साहू ने जानकारी दी है कि आईएमए के आव्हान पर आज 24 घंटे हड़ताल रहेगी। इधर जूडा की हड़ताल से मेडिकल अस्पताल की अस्पताल की व्यवस्था ठप्प हो गई।
डॉक्टर्स का कहना है कि जब तक सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता है, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। फिलहाल राहत की बात यह है कि जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी की सर्विसेज दे रहे हैं। लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आकस्मिक सेवाओं को भी बंद कर दिया जाएगाा। मध्य प्रदेश आयु विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर और मेडिकल कालेज अस्पताल जबलपुर दोनों जगह जूनियर डॉक्टर्स ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। वहीं मेडिकल परिसर में मार्च निकाल कर विरोध दर्ज कराया गया। हड़ताल कर रहे डॉक्टर्स का कहना है कोलकाता में जो हुआ, एक डॉक्टर अस्पताल में काम कर रही थी। इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म और हत्या होती है और जब आरोपियों को पकडऩे की बात आती है तो उपद्रवी अस्पताल में तोडफ़ोड़ कर देते हैं.। डॉक्टर्स का कहना है कि ये कितने खतरनाक हालात हैं, ऐसी स्थिति में डॉक्टर कैसे कम करें, यह काम करने की स्थिति नहीं है। डॉ. आदिति का कहना है सरकार को तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, तभी डॉक्टर में काम करने की हिम्मत आ पाएगी। सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट तुरंत लागू होना चाहिए, नहीं तो डॉक्टर इसी डर में रहेगा कि कहीं उस पर हमला न हो जाए। डॉक्टर्स का कहना है कि सरकार को इस मामले में कड़ा फैसला लेना चाहिए और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रभावित हुई सेवाएँ
हड़ताल के बाद महाकौशल के सबसे बड़े सार्वजनिक अस्पताल मेडिकल कालेज अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। हड़ताल कर रहे डॉक्टर्स वार्डों में ड्यूटी देने नहीं पहुंचे। वहीं ओपीडी में डॉक्टर्स की कमी हो गई। पूरे दिन मरीज भटकते नजर आए। हालांकी वरिष्ठ डॉक्टर्स और सीनियर नर्सों के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। अस्पताल की व्यवस्थाओं की रीढ माने जाने वाले डॉक्टर्स यदि जल्द काम पर नहीं लौटे तो यहां स्थिति कुछ दिनों हाहाकार का रूप ले लेगी।
रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
आज सुबह डॉक्टरों ने सिविक सेंटर से एक बड़ी रैली निकाली, जो घंटाघर पहुंची। रैली के अंत में डॉक्टरों ने कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोपी को फांसी देने की मांग की। शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित इस रैली में डॉक्टर एक लाइन में चल रहे थे और न्याय तथा डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए नारे लगा रहे थे। इस हड़ताल को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, मध्य प्रदेश डॉक्टर एसोसिएशन और जबलपुर डॉक्टर एसोसिएशन सहित अन्य संगठनों का भी पूरा समर्थन प्राप्त हुआ। जबलपुर के डॉक्टरों ने एक दिन के लिए अपनी सेवाएं स्थगित कर दीं, हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया। पूरे देश के डॉक्टरों ने इस हड़ताल में भाग लेकर अपने गहरे आक्रोश और एकता का प्रदर्शन किया।

Author: Jai Lok







