
स्थानीय जहरीले सांपों के विष से बनेगा असरदार एंटीवेनम
गांधीनगर। गुजरात में सर्पदंश से होने वाली मानव मृत्यु को कम करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब प्रदेश में पाए जाने वाले जहरीले सांपों के विष से ही एंटीवेनम तैयार किया जाएगा, जिससे उपचार अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर में स्थापित स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआरआई) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। यहां गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए लगभग 460 जहरीले सांपों को संरक्षित रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइंस के अनुरूप सांपों की देखभाल और विष निष्कर्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। आधुनिक तकनीक से निकाले गए विष को प्रोसेस कर पाउडर (लायोफिलाइज्ड) रूप में तैयार किया जाता है।
इस पाउडर की ई-नीलामी कर लाइसेंसधारी एंटीवेनम निर्माताओं को उपलब्ध कराया जाता है। निर्मित एंटीवेनम को गुजरात सरकार खरीदकर राज्य की विभिन्न अस्पतालों में सर्पदंश उपचार के लिए उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह पहल सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। चार प्रमुख जहरीले सांपों के विष की ई-नीलामी, उम्मीद से अधिक मिला मूल्य एसआरआई द्वारा गुजरात में पाई जाने वाली चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों—इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर—के विष की ई-नीलामी की गई। उच्च गुणवत्ता के कारण इनकी कीमत आधार मूल्य से भी अधिक मिली।
संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इंडियन कोबरा के विष की आधार कीमत 40,000 रुपये प्रति ग्राम तय की गई थी, लेकिन 44,000 रुपये प्रति ग्राम प्राप्त हुए। सॉ-स्केल्ड वाइपर के लिए 50,000 रुपये प्रति ग्राम के मुकाबले 56,500 रुपये प्रति ग्राम की बोली लगी। अन्य प्रजातियों को भी अच्छा प्रतिसाद मिला।
संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. डी.सी. पटेल ने बताया कि सर्प विष का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार बदलता है। दूरस्थ क्षेत्रों के विष से बना एंटीवेनम कई बार कम प्रभावी साबित होता है। इसलिए स्थानीय विष से एंटीवेनम तैयार करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गुजरात में पकड़े गए सांपों के विष से बना एंटीवेनम उपचार में अधिक कारगर होगा।
एसआरआई को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने की तैयारी
स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआरआई) गांधीनगर स्थित गुजरात फॉरेस्ट्री रिसर्च फाउंडेशन (जीएफआरएफ) के अंतर्गत कार्य करता है, जो राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग की स्वायत्त संस्था है।
संस्थान को विश्वस्तरीय केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। वलसाड कलेक्टर द्वारा 2.25 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 11.68 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष रखा गया है।
वर्तमान में देश में सांपों से विष निकालने का कार्य मुख्यत: तमिलनाडु स्थित इरुला स्नेक कैचर्स इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड द्वारा किया जाता है। धरमपुर का एसआरआई इस क्षेत्र में देश की दूसरी संस्था बन गया है।
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Author: Jai Lok






