
जिला प्रशासन के हाथ बंधे, खुलेआम प्रदूषित हो रही माँ नर्मदा
उज्जैन की गोमती ट्रेडिंग कंपनी कर रही माँ नर्मदा में प्रदूषण
जबलपुर (जयलोक)। माँ नर्मदा की सुरक्षा व्यवस्था, उनका संरक्षण, उसमें होने वाले प्रदूषण, माँ नर्मदा के दोहन को रोकने का कार्य हर सरकारी तंत्र से लेकर प्रत्येक नर्मदा भक्त का है। लेकिन जबलपुर में पैसे की लालच में रेलवे विभाग के द्वारा बाहर से आए ठेकेदार को सुविधा पहुँचाने के लिए माँ नर्मदा की छाती पर रोड बनाकर उस पर जेसीबी हाईवा और ट्रक बेधडक़ रूप से चलाए जा रहे हैं।

ऐतिहासिक धरोहर को नष्ट कर रेलवे जमतरा में बने स्टील ब्रिज पुल को पहले ही कबाड़ी को बेच चुका था। कबाडी ने भी आनन फानन में पुल को गैस वेल्डिंग से काटकर गिरा दिया। स्थानीय लोग बताते हैं कि जब पानी में पुल गिराया गया तब बड़ी संख्या में मछली एवं अन्य जीव जंतु मारे गए थे। महीनों तक है कोई नर्मदा नदी में पुल पड़ा हुआ था।

स्टील के पुल को बाहर निकालने के लिए साउथ ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे ने धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए इस कबाडी ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए नर्मदा नदी में मुरम, पत्थर और बोल्डर भरकर रास्ता बना दिया। अब खुले आम नर्मदा नदी की छाती पर क्रेन, जेसीबी, हाईवा बेधडक़ दौड़ रहे हैं। कबाड़ी नदी के बीच में ही गैस वेल्डिंग कर लोहा काट रहा है जिससे माँ नर्मदा दूषित और प्रदूषित हो रही है।

नदी में रहने वाले जीव जंतुओं को भी खतरा उत्पन्न हो गया है क्योंकि यही केमिकल सीधे तौर पर पानी में मिल रहा है। रेलवे ने माँ नर्मदा नदी के प्रदूषण को दरकिनार कर केवल आर्थिक लाभ की दृष्टि से रोड बनवा दी है जिसके कारण जिला प्रशासन के हाथ भी बंध गए हैं। रेलवे की शह पर ठेकेदार की इस मनमानी के कारण सीधा खामियाजा माँ नर्मदा नदी में प्रदूषण के रूप में सामने आ रहा है।
शुरू से की जा रही लापरवाही का नतीजा
जानकारों का कहना है कि ठेकेदार ने आनन फानन में पुल को कबाड़ में बदलने के लिए गैस वेल्डिंग से काटकर नर्मदा नदी में महिनों पहले गिरा दिया था जबकि इतने बड़े कार्य के लिए पहले से सुनियोजित रणनीति के तहत पुल के टुकड़ों को नदी में गिराने के बजाय बड़ी क्रेनों के माध्यम से पहले ही नदी के किनारे पर रखा जाना था और उसके बाद इसकी कटिंग का कार्य होना था लेकिन वर्तमान में नर्मदा नदी के अंदर ही लोहे को गैस वेल्डिंग के माध्यम से काटा जा रहा है।
नगर निगम सीमा में आ चुका है यह घाट
जमतरा का घाट अब नगर निगम सीमा के अंतर्गत आ चुका है। रानी अवंती बाई वार्ड के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में रेलवे और ठेकेदार की मनमानी के कारण माँ नर्मदा कई महीनों से प्रदूषित हो रही हैं।
सडक़ का उपयोग करेगा खनन माफिया
माँ नर्मदा भक्तों की सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि रेलवे ने जो रास्ता बीच नर्मदा तक बना दिया है कबाड़ी ठेकेदार उसमें से लोहा निकाल लेने के बाद उसे ऐसे ही छोड़ देगा। यह रास्ता जिसे वर्तमान में नर्मदा नदी की धारा भी प्रभावित हुई है भविष्य में अवैध खनन माफिया के लिए बहु उपयोगी साबित होगा।
इनका कहना है
मामले के संज्ञान में आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर खिरहनी घाट पर पहुँचकर जाँच पड़ताल की गई थी। उक्त पुल को कबाड़ में खरीदने का काम उज्जैन की गोमती टे्रडिंग कंपनी के द्वारा किया गया है। मौके पर कंपनी के लोगों ने रेलवे की अनुमति और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। कंपनी से इस बात का शपथ पत्र लिया जा रहा है कि वे कार्य के उपरांत नर्मदा नदी में बनाए गए सडक़नुमा रास्ते को हटाएंगे और पूरा माल नदी से बाहर निकालेंगे। कंपनी द्वारा नदी के दूसरे ओर जमतरा घाट पर भी कार्य किया गया है जिसकी जाँच अन्य अधिकारी कर रहे हैं।
रवीन्द्र पटेल,कार्यपालक मजिस्ट्रेट, बरगी
Author: Jai Lok







