
जबलपुर (जयलोक)। डिजिटल अरेस्ट के मामले इन दिनों तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए भी कदम उठाए गए, लेकिन इसके बाद भी लोग ठगों के झांसे में आकर अपने खाते खाली कर रहे हैं। इसी तरह का एक मामला शनिवार को फिर सामने आया जिसमें एक रिटायर्ड एडमिनिटस्टे्रशन अधिकारी के साथ 32 लाख रूपयों की ठगी की गई। आरोपी ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर यह ठगी की। यह मामला बताता है कि लगातार जागरूकता के बाद भी पढ़े लिखे लोग डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार एक रिटायर्ड अधिकारी ही ठग के झांसे में आ गया। डिजिटल अरेस्ट मामलों में पुलिस लगातार एडवाइजरी जारी कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में तत्काल संबंधित थानों को सूचित करें। लेकिन पुलिस की एडवाइजरी भी पढ़े लिखे लोगों के दिमाग में नहीं बैठ पा रही। इसके साथ ही टीवी विज्ञापनों के माध्यम से भी प्रदेश और केन्द्र सरकार लोगों को डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में जागरूक कर बचाने का प्रयास कर रही है।

पाँच दिनों तक रखा डिजिटल अरेस्ट
इस मामले में चौकाने वाली बात यह है कि शातिर ठग ने अधिकारी को पाँच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 32 लाख रूपये ट्रांसफर करवा लिए। जब 5 दिसंबर की रात उनकी हालत को देखकर बेटे ने दबाव बनाया तो पूरी घटना का खुलासा हुआ। अविनाश चंद्र ने पुलिस को बताया कि वे घर पर थे तभी एक कॉल आया, सामने से आवाज आई कि मैं एटीएस अधिकारी पुणे से बोल रहा हूँ। कॉलर ने दावा किया कि आतंकियों की पूछताछ में उनका नाम आया है और उनके बैंक खाते तथा आधार नंबर का उपयोग टेरर फंडिंग में हुआ है। बुजुर्ग घबरा गए, जिसके बाद ठगों ने उन्हें झूठे दस्तावेज दिखाकर भयभीत करना शुरू किया। कॉलर ने धमकाते हुए कहा कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया जाएगा, साथ ही पूरी संपत्ति सीज हो सकती है। इसके बाद रोजाना 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर निगरानी रखते हुए उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया। सुबह 9 बजे से रात 7 बजे तक ठग पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल में मौजूद रहते और बुजुर्ग की हर गतिविधि पर नजर रखते। ठगों ने बैंक जाते समय भी वीडियो कॉल चालू रखने को कहा ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि बुजुर्ग किसी से बात न करें।

Author: Jai Lok







