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देवी दर्शन के लिए सडक़ों पर उमड़ रहा सैलाब, सप्तमी आज, माँ कालरात्रि का हो रहा पूजन

जबलपुर (जयलोक)। शक्ति की भक्ति के महापर्व शारदेय नवरात्र पर चहुंओर भक्तिभाव का नजारा दिखाई दे रहा है। पर्व की पंचमी तिथि से मां के दरबार सज-धज कर तैयार हो गए थे और इसी के साथ ही भक्तों की भीड़ सडक़ों पर नजर आने लगी है। आज सप्तमी है और आज माँ कालरात्रि का पूजन किया जा रहा है। जहां तहां पूजा पंडालों में साज सज्जा पूरी हो गई है। नगर पथ पर श्रद्धा का सैलाब मां के विविध रूपों के दर्शन के लिए सडक़ों पर दिखाई दे रहा है। आज सोमवार को मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि की आराधना पूरे श्रद्धा भक्ति भाव के साथ की जाएगी। दुर्गोत्सव में इस बार भी एक से बढक़र एक झांकियां बनाई गई हैं। वहीं मां जगदम्बे के विविध स्वरूपों की मनमोहक प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। कुछ दुर्गोत्सव समितियों ने इतनी सुन्दर और नयनाभिराम प्रतिमाएं स्थापित की है कि इनके दर्शन करके श्रद्वालुओं का मन नहीं भरता। कुछ ऐसा ही नजारा श्री वृहत महाकाली महोत्सव समिति गढ़ाफाटक में दिखाई देता है। माता महाकाली की लगभग 15 फीट ऊंची विशालकाय प्रतिमा श्रद्धा का केन्द्र बनी हुई है। पंडाल से भीड़ हटती ही नहीं। इसी तरह श्री सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति, श्रीजाबालि दुर्गोत्सव समिति चेरीताल हरदौल मंदिर, श्री आध्यात्मिक दुर्गोत्सव समिति छोटी देवन दीक्षितपुरा, बेलबाग, कंजड़ मोहल्ला की कंकाली माता, घंटाघर में विराजी मां काली, आजाद चौक सदर, पंजाब बैंक कॉलोनी चेरीताल, सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति पारिजात बिल्डिंग के पीछे, गोंडवाना दुर्गोत्सव समिति गढ़ा बजरिया, रानीदुर्गावती मित्र मंडल द्वारा स्थापित की गई मां भवानी की भव्य प्रतिमाएं इसी तरह गढ़ा फाटक मोची कुंआ के पास श्रीनट बाबा दुर्गोत्सव समिति मां जगदंबा की प्रतिमा, लटकारी के पड़ाव में मां महाकाली की विशाल प्रतिमा, पुराना बस स्टेंड सुपर मार्केट की प्रतिमा लोगों को आकर्षित कर रही है।

बरकरार है नगर सेठानी की रुतबा

गौरवशाली इतिहास को अपने आप में समेटे नगर सेठानी के नाम से विख्यात सुनरहाई की दुर्गा प्रतिमा की भव्यता निराली है। श्री दुर्गोत्सव समिति सुनरहाई की स्थापना आज से 161 साल पहले स्व. मख्खन तेली एवं मुनीर अहमद व उनके उत्साही सहयोगियों द्वारा की गई थी। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 122 साल तक प्रतिमा को कंधों पर उठाकर प्रतिमा को विसजज़्न स्थल हनुमानताल ले जाया जाता था लेकिन वक्त के साथ विसर्जन के तरीके में भी बदलाव आया। अब प्रतिमा चांदी के रथ पर सवार होकर निकलती है।

सोने से लदी नुनहाई की मातारानी

सोने से लदी नुनहाई की मातारानी का भव्य स्वरूप देखते ही बनता है। चमक दमक वाली प्रतिमा की आभामयी छटा निहारते श्रद्धालु खुद को धन्य मान रहे हैं। नुनहाई दुर्गोत्सव समिति द्वारा वर्ष 1878 में पहली बार कलमल लाल सोनी द्वारा प्रतिमा रखी गई थी। तब से यह परंपरा निर्वाध रूप से चली आ रही है।

गढ़ा फाटक की दिव्य महाकाली

गढ़ा फाटक की महाकाली की प्रतिमा का दिव्य स्वरूप देखते ही बनता है। लगभग 127 साल के इतिहास को अपने आप में समेटे वृहद महाकाली की छटा ही अलग है। वक्त के साथ आए बदलाव का असर यहां भी दिखता है। वृहत महाकाली गढ़ा फाटक द्वारा हर साल कुछ न कुछ हटकर आयोजन किया जाता है।

माँ बगलामुखी माता की पंच महा आरती

श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ में सिविक सेंटर मढ़ाताल में नवरात्रि के पावन पर्व पर मां बगलामुखी माता की पंच महा आरती ब्रम्हचारी सुबुद्धानंद, ब्रम्हचारी चैतन्यानंद महाराज के सानिध्य में की गई इस अवसर पर भक्त उपस्थित थे।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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