
राजेंद्र चंद्रकांत राय
जबलपुर, (जयलोक )
पुनीत चतुर्वेदी आज कारपोरेट लॉ के देश के प्रसिद्ध वकील हैं। मुंबई में रहवास और ऑफिस है। सत्तर लोगों का स्टाफ है। महीने में दो सप्ताह मुंबई हाईकोर्ट में, एक सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में और एक सप्ताह जबलपुर हाईकोर्ट में वकालत करते हैं। कार्पोरेट जगत की नामचीन हस्तियां उनकी क्लाइंट हैं। फिल्मों के फायनेंसरों, प्रोड्यूसरों और अभिनेताओं के वे पहली पसंद वाले वकील बन चुके हैं।
सैनिक स्कूल रीवा सहित कई स्कूलों में पढ़ते हुए जबलपुर के मॉडल हाई स्कूल के सबसे ज्यादा प्रतिभावान विद्यार्थी माने जाने का गौरव भी उन्हें हासिल है। भाषण और वाद विवाद प्रतियोगिताओं में झंडे गाडऩे के बाद उन्हें जबलपुर की स्टेज कलाकार और अध्यापिका श्रीमती मेरेलिन खुशाल ने स्कूल में हर साल आयोजित होने वाले विज्ञान मेला में प्रदर्शित की जाने वाली विज्ञान नाटिका के लिए चुना था। वजह थी, पुनीत का उम्दा उच्चारण कौशल। वे गैलीलियों की भूमिका में स्टेज पर उतरे और पीएसएम कॉलेज के सभागार में श्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पाया। तालियों की गडग़ड़ाहट और अपने को अपने से भिन्न बना कर प्रस्तुत करने की कला की दुनिया में प्रवेश कर सदा के लिए उसी के हो गए।
स्टेज पर भाषण, वाद विवाद और सम्भाषण सहित अभिनय का संयोग भी था। लिहाजा मंचन रास आ गया। पुनीत बाबू ने स्कूल के सीमित दायरे से छलांग लगाई और विवेचना तथा रचना जैसी नाट्य संस्थाओं के व्यापक परिसर में जा पहुंचे। संस्कृत के मृच्छकटिकम् नाटक में चारुदत्त की भूमिका अदा की। हरिशंकर परसाई की कहानी ‘इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर’ का नाट्य रूपांतर और अभिनय किया। यूथ फैस्टिवल में जबलपुर विश्वविद्यालय का नेतृत्व किया। माइम कला में बेस्ट एक्टर का अवार्ड पाया।
वे नाटक लेखक भी हैं। उनके नाटक विडंबना को अंतर-विश्वविद्यालयीन राष्ट्रीय नाटक स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरुस्कार मिला था। जबलपुर में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर भी उन्होंने कई नाटकों एवं नृत्य-नाटकों का निर्देशन किया है। जबलपुर की प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी श्रीमती साधना उपाध्याय द्वारा आयोजित आओ पकड़ें टोंटी चोर शीर्षक पर मेरे द्वारा लिखित और पुनीत भाई द्वारा निर्देशित नाटक को श्रेष्ठ नाटक, श्रेष्ठ निर्देशन के लिए पुनीत को और श्रेष्ठ अभिनय के लिए 10 साल के बाल कलाकार राहुल को पुरस्कृत किया गया था।
पुनीत की मेधा ने कई नए आयामों में प्रवेश किया। उन्होंने गैंडी नृत्य सीखा, प्रदर्शन किया और नृत्य नाटिकाओं में भी अपनी मेधा की ध्वजा फहराई। फिर कानून की पढ़ाई के लिए मुंबई गए और अध्ययन के साथ-साथ अभिनय की नई पारी शुरु करने के प्रति उत्साहित हुए। जब वे चर्चगेट के पास एक हॉस्टल में रह कर पढ़ रहे थे, तभी मैं एक सेमिनार में भाग लेने मुंबई गया था। तब मैं उन्हें ‘संवाद’ प्रोडक्शन के डॉयरेक्टर-प्रोड्यूसर राकेश चौधरी से मिलवाने ले गया था। उन दिनों उनके धारावाहिकों की दूददर्शन पर धूम मची हुई थी। मुजरिम हाजिर हो, संन्यासी, बनते-बिगड़ते, बाज़ार जैसे धारावाहिकों ने सम्मोहित कर रखा था। राकेश जी ने पुनीत को टिप्स दिए थे और सबसे पहले अपना एक पोर्टफोलियो बनवाने को कहा था। उन्होंने फिल्म ‘वजीर’ में अभिनय किया और मराठी धारावाहिक से भी जुड़े।
अमिताभ बच्चन का पोर्टफोलियो बनाने वाले विख्यात फोटोग्राफर गौतम राजाध्यक्ष ने उनका पोर्टफोलियो बनाया और धारावाहिकों ने उनके लिए अपने दरवाजे खोल दिए। ‘हसरतें’ में उन्होंने रोमांटिक रोल किया। सिद्धार्थ नागर द्वारा निर्देशित लंबे धारावाहिक ‘रघुकुल रीति सदा चलि आई’ में उन्हें अपने प्रोफेशन वकील का ही किरदार मिला और वे अपने जमाने के सुपर स्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना के वकील बन कर सामने आए। सचिन पिलगांवकर के हास्य धारावाहिक ‘तूतू-मैंमैं’ में दारासिंह भी थे, उसमें अभिनय करने के दौरान पुनीत की उनसे गहरी दोस्ती हो गई थी।
पुनीत के अनुसार कोर्ट भी अभिनय-लीला का ही एक और स्थान है, जहां पर आप वकील वाले कास्ट्यूम में अपने क्लाइंट की काया में कायान्तरण करते हैं और उसकी कहानी को पूरी अभिनयशीलता के साथ जजों के सामने प्रस्तुत करते हैं।
पुनीत के व्यक्तितव को बड़ा बनाने वाले बहुत से कारनामे हैं, जैसे कि रोट्रेक्ट की तरफ से ऑस्ट्रेलिया का दौरा और वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री बॉब हॉक के हाथों सम्मानित होना, एलएलएम कीने के लिए विदेश प्रवास हेतु बार कौंसिल ऑफ इंडिया का प्रमाण पत्र मिलना, एलएलएम करने के दौरान ही कोर्ट में मुकदमे की पैरवी करना, ताज होटल का लॉ ऑफिसर नियुक्त होना और आकाशवाणी मुंबई का अनाउंसर होना।
मुंबई गवर्नमेंट लॉ कॉलेज , जिसके डॉ आंबेडकर प्राचार्य रहे हैं और जहां लोकमान्य तिलक, नानी पालखीवाला और नरीमन जैसे प्रसिद्ध वकीलों ने शिक्षा ग्रहण की थी, के डेढ़ सौ साल पूरे होने पर कॉलेज की गतिविधियों को दर्शाने वाले वृत्त चित्र का निर्देशन करने का मौका पुनीत को ही मिला था।
हाल में ही पुनीत की पुस्तक मीडिया लॉज़ प्रकाशित हुई है और एक अन्य पुस्तक मेडिकल लॉज़् ऑफ इंडिया प्रकाशनाधीन है। इधर उन्होंने वेदों और उपनिषदों का अध्ययन कर उन पर व्याख्यान देना आरंभ किया है। व्याख्यान विधा में भी उन्होंने श्रोताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
संतोष की बात यह है कि उनकी चतुर्दिक सफलताओं ने उनकी मासूमियत का आखेट नहीं किया है। वे अब भी सरल, मिलनसार और बैठकबाज हैं। बतकही में रस लेते हैं। उन्होंने जबलपुर की तासीर का जलवा बिखेरा है। पुनीत, जबलपुर भी तुम्हें भूलनेवाला नहीं है।

Author: Jai Lok







