
आमजनों को भी हो रही परेशानी, साफ्टवेयर में शासकीय भूमि निजी भूमि में हो रही दर्ज
जबलपुर (जयलोक)। वेब जीआईएस 2.0 साफ्टवेयर के क्रियान्वयन और तकनीकी समस्याओं को लेकर अब पटवारियों ने नाराजगी जाहिर की है। पटवारियों का कहना है कि प्रदेश भर में वेब जीआईएस 2.0 साफ्टवेयर लागू किया गया है। लेकिन पोर्टल में अनेकों तकनीकी खामियाँ हैं। इन खामियों से पटवारियों के साथ साथ आमजनों को परेशान होना पड़ रहा है। जिसको लेकर पटवारियों ने राजस्व मंत्री, प्रमुख सचिव राजस्व, आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा जिसमें अपनी समस्याओं को रखते हुए उनके समाधान पर ध्यान आकर्षित कराया है।

पटवारियों ने साफ्टवेयर में सुधार की रखी माँग
पटवारियों ने अपनी समस्याओं में बताया कि म.प्र. भू राजस्व संहिता एव भू-अभिलेख नियमावली के अंतर्गत पटवारी के कार्य क्षेत्र में पटवारी का मुख्य कार्य भू अभिलेखों का संधारण करना है तथा अभिलेख के रखरखाव में पटवारी की जिम्मेदारी तय की गई है। किसी भी प्रकार के संशोधन होने पर संबंधित पटवारी को जानकारी प्राप्त होना चाहिए तथा सॉफ्टवेयर में किसी भी प्रकार के प्रयोग से पूर्व पटवारियों का अभिमत लिया जाना चाहिए तथा उचित अवसर प्रदान कर सॉफ्टवेयर संबंधित समस्याओं का समाधान करने के पश्चात ही किसी प्रकार का संशोधन संहिता के अनुसार करना चाहिये। नए सॉफ्टवेयर में आदेश अनुपालन में सभी नए प्रस्तावित आवेदकों का मोबाइल नंबर एवं ओटीपी अनिवार्य किया गया है, जबकि सबके पास पृथक पृथक मोबाइल नंबर होना संभव नहीं है अत: अनुपालन हेतु मोबाइल नंबर अनिवार्य किया जाना गलत है। नक्शा अनुपालन में 5 डेसिमल से छोटे नक्शा भी बनाना अनिवार्य है जो कि एमपीएलआरसी नियम विरुद्ध है। भू-अर्जन यदि किसी निजी भूमि को शासकीय प्रयोजन अंतर्गत अधिग्रहित किया जाता है तो उसके लिए अर्जन वाले भाग में पिता का नाम एवं अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगता है जो कि शासकीय भूमि बनाए जाने पर नहीं मांगी जानी चाहिए।

उक्त सॉफ्टवेयर में भू राजस्व संहिता का पालन नहीं होता है। उक्त सॉफ्टवेयर में कनिष्ठ अधिकारी द्वारा किये गये आदेश का अनुपालन वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाता है। जिसमें अगर कोई आदेश तहसीलदार या एसडीओ द्वारा पारित किया जाता है, उसमें भी नया खसरा जोडऩे या हटाने में कलेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी से अनुमोदन करवाना पड़ता है जिसमे संबंधित पटवारियों के पास आदेश के पश्चात भी प्रकरण लंबित रहता है। साइबर तहसील से प्राप्त राजस्व प्रकरणों में पटवारी लॉग-इन होनी चाहिए ताकि संबंधित पटवारी को यह ज्ञात हो कि किस प्रकरण में क्या रिपोर्ट लगाई है।

नक्शा और बटांकन की जानकारी भी अधूरी
एक बिंदु यह भी है कि नक्शे में जुड़वाना है की अभी किन किन नक्शे का बटांकन शेष है एवं कौन से शाब्दिक सर्वेक्षण शेष है उनकी सूची अभी उपलब्ध नहीं है। नक्शे की आकृति का वास्तविक रकबा और खसरे का वास्तविक रकबा उपलब्ध होना चाहिए अनुपातिक वाला नहीं।
Author: Jai Lok







