
जबलपुर (जयलोक)। भारतीय जनता पार्टी के नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर भाजपा के सभी दिग्गजों से पदाधिकारी के मनोनयन के लिए उनसे चर्चा कर रहे हैं और उनकी राय भी ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ विधानसभा क्षेत्रों से संगठन में शामिल करने हेतु आगे आए नामों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। जो नाम सामने आए हैं उन पर किस नेता विशेष का ठप्पा लगा हुआ था वर्तमान में वो किस उद्देश्य के साथ किस नेता से जुड़े हुए हैं कुछ ऐसे हैं जो केवल अर्थबल के आधार पर ही संगठन में जगह बनाना चाहते हैं जमीनी स्तर पर उनका कोई मुकाम नहीं हैं। कुछ ऐसे हैं जो केवल अपना व्यापारिक सामराज्य बचाने और बढ़ाने के लिए संगठन में पद पाना चाहते हैं। कुछ ऐसे हैं जो भोपाल के नेताओं का कुर्ता पकडक़र लटके हैं और जिला संगठन में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे हैं।
कुछ ऐसे नाम भी संगठन विस्तार में जगह बनाना चाहते हैं जो इन दिनों संगठन अध्यक्ष के इर्दगिर्द तन मन धन से सेवाएं देने में लगे हुए हैं। रायुशुमारी में सबसे बड़ी बाधा विधायकों की राय ली जाना बनी हुई है। अभी भी कई विधायकों ने अपनी राय भाजपा के पदाधिकारियों के मनोनयन के लिए नहीं दी है। इसीलिए अभी तक भाजपा की कार्यकारिणी की घोषणा अटकी हुई है। नगर भाजपा में कुछ ऐसे पदाधिकारी भी बन सकते हैं जिनके विरुद्ध दिग्गज अपनी राय दे चुके हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि रायशुमारी के पश्चात नगर भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारिणी की बहु प्रतीक्षित घोषणा कभी भी हो सकती है।

भारतीय जनता पार्टी के संगठन के चुनाव का काम अभी कार्यकारिणी के गठन ना होने से अधूरा रह गया है। अब जब भाजपा की कार्यकारिणी का गठन हो जाएगा तब संगठन के चुनाव का काम भी पूरा हो जाएगा। भाजपा की कार्यकारिणी में करीब 21 पदाधिकारी बन सकते हैं। इन पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री तथा अन्य पदाधिकारी शामिल रहेंगे। महामंत्री के पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचातानी मची हुई है। कुछ भाजपा के विधायक महामंत्री के लिए नामों पर सहमत भी नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा के कुछ पदाधिकारी दिग्गजों की राय के खिलाफ भी बनाए जा सकते हैं।

नगर भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने कुछ दिग्गजों से जब चर्चा की तो उन दिग्गजों ने सीधे तौर पर कुछ नामों पर अपनी असहमति जता दी और उनको पदाधिकारी ना बनाए जाने के लिए अपना जोर भी लगा रहे हैं। अब यह देखना है कि भाजपा के दिग्गजों द्वारा बनाया गया दबाव काम आता है या नहीं।

जैकेट वाले नेता जोरो पर
दावेदारों में शामिल एक जैकेट वाले नेता काफी चर्चा में हैं। भाजपा संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इन्हें जैकेट वाला नेता इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इन्होंने एक कद्दावर नेता को खुश करने के लिए उन्हें एक जैकेट भेंट की थी और फिर इस भेंट का जमकर गाना गाया था। यह बात जब स्वाभिमानी नेताजी को पता चली जो किसी की चाय पीना पसंद नहीं करते उन्होंने एक दिन अपने दरबार में कई लोगों के सामने उक्त जैकेट की कीमत लिफाफे में रख इस व्यापारी से नेता बन रहे व्यक्ति को पकड़ाकर सबके सामने अपनी हरकत के लिए शर्मशार होने के लिए मजबूर कर दिया था। अब ये नेता स्थानीय स्तर पर अपनी दाल गलती ना देख भोपाल के एक नेताजी का कुर्ता पकडक़र लटके हैं।
Author: Jai Lok







