
पुलिस अधीक्षक के नाम रेप का आरोप लगाने वाली युवती ने दिया नया आवेदन
जबलपुर (जयलोक)। जिस प्रकार गुड़ के ढेर पर मधुमक्खियां टूट पड़ती हैं इसी प्रकार मधुमक्खियाँ बनकर कांग्रेस नेता बड़े खनन कारोबारी विनोद श्रीवास्तव और उनके युवा कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष पुत्र शुभम उर्फ राजा श्रीवास्तव के ऊपर ब्लैकमेलिंग गैंग में शामिल कुछ पत्रकार और कुछ वकील टूट पड़े हैं। पैसे के लेनदेन के विवाद पर विनोद श्रीवास्तव की खदान में डंपर चलाने वाले व्यक्ति की सतना निवासी लडक़ी ने शुभम श्रीवास्तव पर दैहिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए। पुलिस में एक लिखित शिकायत दी और यह सब एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया। इस बात का खुलासा पुलिस अधीक्षक जबलपुर के नाम से सतना निवासी युवती ने कल दिए आवेदन में किया है।

दबाव बनाने ब्लैकमेलिंग गैंग ने लडक़ी से करवाई थी शोषण की शिकायत
पुलिस अधीक्षक के नाम दिए गए आवेदन में आरोप लगाने वाली लडक़ी ने इस बात का उल्लेख किया है कि मुझे शादी के लिए पैसे की जरूरत थी विनोद और उनके पुत्र शुभम श्रीवास्तव मुझे पैसे नहीं दे रहे थे। इस संबंध में मैंने कुछ वकील और पत्रकार साथियों से मदद मांगी। मैं मानसिक दबाव में थी मदद मांगने वालों के कहने पर ही मैंने दबाव बनाने के लिए वीडियो बनाकर कर आरोप लगाए और पुलिस में एक लिखित शिकायत दी। मैं यह शिकायत नहीं करना चाहती थी लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बहुत अधिक मानसिक दबाव में थी। जिससे मदद मांगी उन्होंने वीडियो बनवाया उसमें आरोप लगवाए और कहा कि यह वीडियो रिकॉर्ड के लिए अपने पास रखेंगे। इससे उन पर दबाव बनेगा तुम्हारा पैसा मिल जाएगा।

पुराने बिल का पैसा मिला तो कर लिया शिकायत पर समझौता
मूल रूप से यह प्रकरण पैसे के लेनदेन के विवाद का है लेकिन दबाव बनाने के लिए इसमें दैहिक शोषण की जानबूझकर शिकायत ब्लैक मेलिंग गैंग के द्वारा करवाई गई। डंपर के संचालन के संबंध बिल पास होने के बाद लडक़ी के पिता को 2016 की बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया इसके बाद इन्होंने समझौता कर लिया और थाने में लडक़ी ने स्वयं जाकर किसी भी प्रकार की कार्यवाही न करने एवं दबाव में आकर शिकायत करने की बात का शपथ पत्र दिया और शिकायत वापस ले ली।

लडक़ी की शादी पास आ रही थी और पैसे की थी सख्त जरूरत
पुलिस अधीक्षक के नाम दिए गए आवेदन में पीडि़त लडक़ी ने उल्लेख किया है कि उसने यह आरोप इसलिए लगाए गए थे क्योंकि उनका जो पैसा खनिज कारोबार के दौरान हिसाब किताब न मिलने पर 2016 से अटका हुआ था वह उस रकम को प्राप्त करना चाहते थे। लडक़ी की शादी तय हो गई थी और तारीख पास आ रही थी इसलिए वह बहुत दबाव में थी फिर मदद मांगने के चक्कर में वह ब्लैकमेलिंग गैंग के चक्कर में फंस गई। इनका तो समझौता हो गया पैसे मिल गए लेकिन ब्लैकमेलिंग गैंग ने पैसे उगाही करने के लिए अपना काम शुरू कर दिया।
50 हजार में खरीदा है वीडियो
इसी ब्लैकमेंलिंग गैंग के कुछ सदस्यों ने पिता पुत्र पक्ष को फोन लगाया और कहां की उनके पास लडक़ी के बयान का एक वीडियो है जिसमें उसने स्पष्ट आरोप लगाए हैं। यह वीडियो उन्होंने 50 हजार की राशि खर्च कर प्राप्त किया है। जब पिता पुत्र पक्ष ने बताया कि समझौता हो चुका है तो उन्होंने वीडियो के बदले खर्च किए गए पैसे की माँग की और नहीं देने पर इसी गैंग ने इस पुराने वीडियो को भ्रम फैलाने के लिए जारी कर वायरल करवा दिया।
दैहिक शोषण का विषय नहीं था पैसे नहीं दे रहे थे
आवेदन में पीडि़त लडक़ी ने यह भी लिखा है कि वह दैहिक शोषण से संबंधित शिकायत नहीं करना चाहती थी लेकिन पत्रकारों और वकीलों की गैंग ने उसे शिकायत करने पर मजबूर किया और कहा कि बिना इसके दबाव नहीं बनेगा और तुम्हें पैसे नहीं मिल पाएंगे मानसिक रूप से परेशान युवती तैयार हुई। लडक़ी ने कहा कि वह समझौते के बाद स्वयं विजयनगर थाना प्रभारी के पास गई और बताया कि मामला आर्थिक लेनदेन का था दैहिक शोषण का विषय नहीं था उसका पैसा मिल गया है और वह शिकायत वापस लेकर कोई कार्रवाई नहीं चाहती है। जो वीडियो वायरल किया गया है वह शिकायत दिए जाने के पूर्व में इन्हीं ब्लैकमेलिंग गैंग के सदस्यों ने एक नोटरी के घर में बैठकर बनवाया था और कहा था इसे जारी नहीं करेंगे दबाव बनाने के लिए रिकॉर्ड में रखेंगे। सूत्रों के अनुसार कुछ तथा कथित ब्लैकमेलिंग के सदस्य पिता पुत्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का झांसा देकर इनसे कुछ रकम मांग कर भी ले जा चुके हैं।
अब ब्लैकमेलिंग गैंग कर रही परेशान
ब्लैकमेलिंग गैंग के सदस्यों को समझौता होने के बाद खुद भी पैसा कमाने की लालच जाग गई और अब पीडि़त लडक़ी उसके पिता और दूसरी ओर कांग्रेस नेता पिता पुत्र शुभम श्रीवास्तव और उनके पिता विनोद श्रीवास्तव को बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। ब्लैकमेलिंग गैंग के सदस्यों के नाम लडक़ी ने स्वयं पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर प्रत्यक्ष रूप से बताने की बात आवेदन में कही है ताकि उसके ऊपर दबाव न बनाया जा सके।
Author: Jai Lok







