
नगर निगम के राजस्व में आना है 40 करोड़ न हो पा रही वसूली न टूट पा रहे अतिक्रमण
जबलपुर (जयलोक)। मालवीय चौक से लेकर सुपर बाजार तक नगर निगम का सबसे चर्चित नया बाजार है। इस नया बाजार का निर्माण बाहर से आए शरणार्थियों के लिए किया गया था। लेकिन आज एक भी शरणार्थी इन दुकानों का उपयोग करने वाला नहीं बचा है और अधिकांश दुकानें कई बार बिक चुकी हैं। इस नया बाजार में 65 दुकानदार अपना कारोबार कर रहे हैं। यहां के अधिकांश दुकानदारों ने नगर निगम की दुकानों पर अपनी बड़ी ताकत दिखाते हुए बलपूर्वक अवैध निर्माण कर लिए हैं। इन अवैध निर्माण के विरुद्ध नगर निगम कई वर्षों से कार्यवाही करने में बौना साबित हो रहा है और नगर निगम की नया बाजार के कारोबारियों के सामने घुटने टेकने की लाचारी भी स्पष्ट नजर आ रही है।
नया बाजार के दुकानदारों ने अपनी दुकानों का हिस्सा दोगुना से ज्यादा कर लिया है। इन दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने 20 फुट से ज्यादा की जमीन पर कब्जा करके अपनी दुकानों को आगे बढ़ा लिया। वहीं हर दुकानदार ने दुकानों के पीछे की ओर भी 10 फुट का अवैध निर्माण कर लिया है। इस तरह हर दूकानदार ने 30-30 फुट ज्यादा दूकानों को बढ़ा लिया है। वहीं बहुत सारे दुकानदारों ने नगर निगम की बिना मंजूरी के डंके की चोट पर बहु मंजिला निर्माण भी अवैध रूप से नगर निगम की नाक के नीचे कर लिए हैं और अवैध निर्माण करके इन दुकानदारों ने अपना रुतबा भी साबित कर दिया है। यदि कोई आम नागरिक एक कमरा भी बिना मंजूरी के बनाता है तो नगर निगम उसको अवैध मानकर तोड़ देती है। लेकिन नगर निगम अपने ही बाजार के दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध निमार्णों के विरुद्ध कार्रवाई करने में लाचार साबित हो रही है। नगर निगम को इन दुकानदारों से उन्होंने जो क्षेत्र बढ़ाया है उसका भी किराया इन दुकानदारों से नहीं मिल रहा है। इन दुकानदारों ने नगर निगम की स्वीकृति के बिना जो निर्माण कार्य किए हैं उस पर इन व्यापारियों को अपने निर्माण बचाने के लिए कंपाउंडिंग की राशि भी चुकाना है। नया बाजार के व्यापारियों से नगर निगम की जो वसूली होना है वह करीब 40 करोड़ से अधिक की बतलाई जा रही है। आज तक नगर निगम ना तो व्यापारियों के अवैध निमार्णों को तोड़ पाया है और ना ही उनसे कोई राशि वसूल कर पाया है।

व्यापारियों के दांव पेंच में उलझी है नगर निगम
नया बाजार के व्यापारी इतने प्रभावशाली और रुतबे वाले हैं कि वह नगर निगम को दशकों से उलझ कर रखे हैं। कुछ न्यायालय में प्रकरण दायर कर चुके हैं तो कुछ व्यापारी शहर के प्रभावित लोगों के माध्यम से शासन तक इस मामले को उलझा कर रखे हैं।

प्रमुख सचिव भी नहीं करवा पाए कार्यवाही
मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव संजय दुबे भी कुछ वर्ष पूर्व जब शहर आए थे तब उन्होंने भी नया बाजार के व्यापारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश नगर निगम को दिए थे। लेकिन नगर निगम व्यापारियों के खौफ से इतना आतंकित हैं कि प्रमुख सचिव के आदेश को भी आज तक नहीं माना गया है।

अवैध निमार्णों को तोडऩा ही बेहतर विकल्प है
जानकारों का यह कहना है कि नया बाजार के 65 के करीब जिन व्यापारियों ने अवैध निर्माण किए हैं नगर निगम को सीधे तौर पर उनके अवैध निमार्णों को तोडऩे की कार्यवाही ही एक बेहतर विकल्प है। क्योंकि अवैध निर्माण को तोडऩे से कोई भी नहीं रोक सकता यहां तक की न्यायालय भी इस तरह की रोक नहीं लग सकता है। नगर निगम को चाहिए कि वह 40 करोड़ की राशि का मोह छोड़ दे और नया बाजार के अवैध निमार्णों को तोडक़र एक बड़ी कार्यवाही को अंजाम देकर शहर एक श्री नज़ीर पेश करें ऐसा जरूरी माना जा रहा है।
तीन-तीन करोड़ में बिकी हैं दुकानें नया बाजार की दुकानें है कितनी कीमती हैं इसका नमूना उन बड़े शोरूमों से देखा जा सकता है जो बहु मंजिला बन गए हैं। जानकार बताते हैं कि यह बड़े-बड़े बहु मंजिला शो रूम वाली दुकानें दो तीन करोड़ रुपए में कारोबारियों द्वारा पूर्व में काबिज व्यापारियों से खरीदी गई हैं। नया बाजार के कारोबारी खुद तो करोड़ों रुपए में अपनी दुकानें बेच रहे हैं और नगर निगम को कुछ भी देने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि नगर निगम को नया बाजार में कोई निर्णायक कार्रवाई करने आगे आना चाहिए।
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Author: Jai Lok







