
जबलपुर (जयलोक)।बहुत वर्षों पहले जनमानस में यह चर्चा आम हुआ करती थी कि तिलवारा से लेकर गौरीघाट के बीच में मां नर्मदा की सवारी माने जाने वाले मगरमच्छों का प्रवास है स्थानीय स्तर पर कई बार इन्हें देख जाने के दावे भी हुए हैं। हालांकि लंबे समय से इस क्षेत्र में मगरमच्छों की गतिविधियां नहीं देखी गई है कुछ समय पूर्व भेड़ाघाट के बंदर कूदनी के समीप मगरमच्छ देखे जाने के बाद वन विभाग ने पिंजरा डालकर उसे पकड़ा था और आबादी क्षेत्र से दूर उसके प्राकृतिक आवास में उसे छोड़ा गया था।

अब एक बार फिर गौरीघाट में मगरमच्छ का शव मिलने से पूरे क्षेत्र में तरह तरह की चर्चाएं गर्म है। कोई कह रहा है कि इस वयस्क मगरमच्छ की मौत कहीं और हुई है और यह पानी में बहकर यहां तक आ गया है। वहीं कुछ का दावा है कि तिलवारा घाट और ग्वारीघाट के बीच में मगरमच्छ मौजूद है और मृत मिला मगरमच्छ उन्हें में से एक है। मां नर्मदा नदी के पावन तट धार्मिक स्थल गौरीघाट में एक मगरमच्छ मृत अवस्था में मिलने से हडक़ंप मच गया। प्रथम दृष्टया मगरमच्छ का करंट लगाकर शिकार किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ का शव पोस्टमार्टम के लिए वेटरनरी कॉलेज स्थित फोरेंसिक सेंटर भेजा है। आज करीब तीन-चार फुट लंबा मगरमच्छ का शव सुबह घाट किनारे मिलने पर वन विभाग के स्थानीय अमले को सूचना दी गई। जिसके बाद जबलपुर रेंज से मौके पर पहुंची वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने शव को अपनी सुरक्षा में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए रवाना किया।

Author: Jai Lok






