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Home » अपराध » नहर के मार्गों को अवैध परिवहन में लगे टनों वजनी हाईवा डम्फर कर रहे क्षतिग्रस्त, ना कोई रोक -ना कोई टोक, मानेगांव तिलवारा, बिलहरी सिहोरा में खनिज व राजस्व की स्थायी चौकी जरूरी

नहर के मार्गों को अवैध परिवहन में लगे टनों वजनी हाईवा डम्फर कर रहे क्षतिग्रस्त, ना कोई रोक -ना कोई टोक, मानेगांव तिलवारा, बिलहरी सिहोरा में खनिज व राजस्व की स्थायी चौकी जरूरी

जबलपुर (जयलोक)। बरगी बाँध से निकलने वाली दाई और बाईं तट की नहर जबलपुर के अलावा आसपास के कई जिलों में किसानों की जीवन रेखा बनी हुई है। विगत दिवस बरगी क्षेत्र के सगड़ा झपनी में नहर फटने की घटना से कई सवाल खड़े हो गए है।
स्थानीय जनों ने बड़ा दावा किया है कि बरगी की नहरें और उनके बाजू से बने रास्ते या फिर उनके ऊपर से गुजर रहे पुल पुलिया इसीलिए क्षतिग्रस्त हो रहे हैं क्योंकि यहां पर रेत, गिट्टी, बोल्डर, मुरम का अवैध उत्खनन चरम पर हो रहा है। भारी भरकम टनों वजन वाले हाईवा डम्पर बेधडक़ मनाही और प्रतिबंध के बावजूद भी नहर के रास्तों पर दौड़ रहे हैं। ना तो अवैध उत्खनन रोकने वाला कोई है और ना ही नहर के रास्तों को पहुंच रही क्षति को रोकने वाला कोई नजर आ रहा है। बिना रोक-टोक के नहर के रास्तों को क्षतिग्रस्त करते यह भारी वाहन धड़ल्ले से आज भी गतिमान है। यह भी एक मुख्य वजह है जिसके कारण बरगी बांध की नहरें और उनके रास्ते क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। यह मार्ग सामान्य रूप से आवागमन के लिए बनाए गए हैं ना कि इतने भारी वाहनों की धमा चौकड़ी के लिए। नहरों का में ना तो लोड बेरिंग की क्षमता है नाही इनका निर्माण इसके भारी वाहनों की आवाजाही के अनुरूप किया गया है।

इसके अलावा एक बहुत बड़ी खामी प्रशासनिक स्तर पर हो रही है जिसका पूरा फायदा अवैध उत्खनन करने वाले उठा रहे हैं। अवैध उत्खनन करने वाले भारी वाहन मंगेली, मानेगांव से होते हुए तिलवारा और बिलहरी के रास्ते शहर में प्रवेश कर रहे हैं। चरगवां की ओर होने वाले अवैध उत्खनन का परिवहन करने वाले भी तिलवारा पुल पार कर ही शहर में प्रवेश कर रहे हैं। यही हाल सिहोरा पाटन क्षेत्र का है। ऐसा नहीं है कि इन सब मार्गों और चली आ रही अवैध व्यवस्था की जानकारी जिला प्रशासन, खनिज विभाग, पुलिस विभाग को नहीं है। लेकिन ना तो कोई रोक लगा पा रहा है और ना ही कोई टोक लगा पा रहा है।

माफिया के दबाव में धरातल पर नहीं आ पा रहा निर्णय

इसकी सबसे बड़ी मुख्य वजह यह है कि पूर्व में भी कई बार जिला प्रशासन ने इस बात पर चर्चा की है कि मानेगांव, तिलवारा और बिलहरी सिहोरा मार्ग पर राजस्व और खनिज विभाग की स्थाई रूप से संयुक्त चौकी बनाई जाएगी। लेकिन यह प्रस्ताव खनिज माफिया के दबाव में धरातल पर नहीं आ पा रहा। चौकियों के निर्माण के बाद वहाँ से गुजरने वाले हर खनिज परिवहन कर रहे वैध-अवैध वाहन की जाँच शुरू हो जाएगी। ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर भी रोक लग सकेगी और राजस्व को लग रहा लाखों करोड़ों का चुना भी रोका जा सकेगा।

राजस्व की खुलेआम चोरी

अवैध खनिज खनन कर खनिज माफिया प्रशासन को लाखों करोड़ों रुपए का चूना लगाकर राजस्व की खुलेआम चोरी कर रहा है। रॉयल्टी के नाम पर ओवरलोडिंग का खेल जमकर हो रहा है। दिखाने के लिए रॉयल्टी में वजन कुछ और रहता है जबकि वास्तविकता में भारी वाहनों में उससे कहीं अधिक मात्रा में खनिज भरा रहता है।

खनिज विभाग को बढ़ाना पड़ेगा काम

यह भी देखने में आया है कि खनिज विभाग के पास आवश्यकता के अनुरूप बहुत ही कम निरीक्षक और अन्य स्टाफ है। जबलपुर बड़ा जिला है ऐसी स्थिति में राजस्व विभाग और खनिज विभाग की संयुक्त रूप से जांच चौकी बन जाने से सीमित स्टाफ में भी शासन के हित में काम हो पायेगा।

बरेला मार्ग पर बन रही बड़ी कॉलोनी में अवैध मुरम से हो रही फीलिंग राजस्व को लग रहा चूना

बरेला मंदिर से लेकर बाईपास हाईवे मार्ग टोल नाके के पास और जबलपुर की ओर निर्मित हो रही बड़ी-बड़ी कॉलोनी में वतज़्मान में बड़ी मात्रा में चोरी की मुरम से फिलिंग का कार्य किया जा रहा है। बड़ी चौंकाने वाली जानकारियां हैं कि इसके लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर स्थित मुरम के पहाड़ों को बेदर्दी से रातों-रात खत्म किया जा रहा है। यहां तक की बरगी मानेगांव निगरी, घाट पिपरिया बढैयाखेड़ा तक से शासकीय भूमि की खुदाई कर चोरी मि मुरम यहां लाई जा रही है।

नहर के मामले में विधायक विश्नोई ने पहले ही किया था आगाह

बरगी नहर में दीवार टूटने के मामले के पूर्व विधायक अजय विश्नोई ने पहले ही जिम्मेदारों और मुख्यमंत्री को इससे आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि बरगी बाँध की दाईं तट एवं बाईं तट दोनों ही नहरें अत्यधिक कमजोर हो चुकी हैं। बाईं तट नहर में क्षमता से आधे से भी कम जल प्रभाहित किया जा रहा है। नंगी आंखों से नहर की दुर्दशा किसी भी स्थान पर देखी जा सकती है। दाईं तट नहर से पानी कटनी, रीवा एवं सतना तक भेजने का सपना है। जिसके लिए नहर से 227 क्यूसेक जल प्रवाहित करना होगा। यह नहर 80 क्यूसेक पानी का भर भी नहीं संभाल सकती है। दाईं तट नहर के टूटने की घटना ने इस सच को उजागर कर दिया है। श्री विश्नोई ने ट्विट करते हुए कहा कि मैने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया है परंतु आज तक नहरों के सुधार की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, सतना एवं रीवा जिलों के लाखों किसानों की इस समस्या को मजबूरन सोशल मीडिया पर उठा रहा हूँ।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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