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ना नक्शा पास, ना फायर एनओसी, मुस्कान पार्क के बिल्डर शंकर मंछानी को 15 दिन का अल्टीमेटम

नेचुरल, बरिस्ता, बीकानेर वाला जैसे कंपनियों को क्या बिल्डर ने दिया धोखा? पार्किंग सडक़ पर

जबलपुर (जयलोक)। शहर के चर्चित और विवादित बिल्डरों में शुमार रहने वाले बिल्डर शंकर मंछानी का एक और कारनामा फिर सुर्खियों में है। इस बार नियम कानून को ताक पर रखने की हमेशा की आदत और हरकतों के साथ-साथ देश विदेश की नामी कंपनियों की फ्रेंचाइजी के साथ भी धोखाधड़ी की बात सामने उजागर होती दिख रही है।
विगत दिवस नगर निगम आयुक्त प्रीति यादव ने लगातार प्राप्त हो रही शिकायत और स्वयं यहां पार्किंग की फैली व्यवस्थाओं को देखते हुए नगर निगम के अतिक्रमण विभाग को कार्यवाही करने के लिए भेजा था। लेकिन बिल्डर की हरकत के आगे फ्रेंचाइजी लेने वालों व्यापारियों ने नगर निगम से कुछ समय अवधि प्रदान करने की दरखास्त कर दी।

 

3 बार पहले दिया था नोटिस
नगर निगम के नोटिस को हल्के में लेने की गलती करने वालों लोगों के लिए यह एक बड़ी सीख बनेगी। नगर निगम प्रशासन की ओर से मुस्कान पार्क के बिल्डर शंकर मनछानी को बिल्डिंग का नक्शा स्वीकृत कराने, फायर एनओसी प्राप्त करने और पार्किंग की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तीन बार नोटिस दिया गया था। लेकिन जब नोटिस की कार्यवाही के परिपालन में बिल्डर द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई तो फिर नगर निगम एक्शन मोड में आ गया।

 

लिखित में ली सहमति
नगर निगम प्रशासन ने मुस्कान पार्क के बिल्डर शंकर मनछानी से लिखित में इस बात की सहमति ली है कि वह 15 दिन की समय अवधि के अंदर सभी जरूरी दस्तावेज और अनुमतियां प्राप्त करेंगे। नहीं करने की दिशा में 15 दिन के बाद उन्हें परिणाम भुगतना होगा।

 

पार्किंग बंद रखते हैं
बिल्डर द्वारा पार्किंग के लिए चिह्नित की गई जगह को खाली प्लॉट के रूप में रखा गया है। शायद यह पार्किंग सिर्फ  कागजों पर दिखाने के लिए है और भविष्य में इस पर अवैध रूप से निर्माण की रणनीति अपनाई जा सकती है। यह पार्किंग के रूप में सर्वसाधारण के बीच में चिन्हित ना हो सके इसीलिए इस पर ताला लटकाए रखा जाता है और जो भी लोग इन बड़ी फ्रेंचाइजी में खरीदारी करने आते हैं उन्हें मजबूरी में अपने वाहन सडक़ पर खड़े करने पड़ते हैं।

 

न्याय जगत की ओर से भी आ चुकी है आपत्ति
बिल्डर शंकर मनछानी का जो निर्माण कार्य हुआ है यह एक मुख्य मार्ग है यहां यातायात का बहुत अधिक दबाव रहता है। जहां से न्यायालय जाने वाला रास्ता, कलेक्टे्रट, सिविल लाइन, रेलवे स्टेशन जाने के लिए बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। न्याय जगत की भी कुछ वरिष्ठ विभूतियों की ओर से इस पूरे मामले को लेकर आपत्ति वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष दर्ज करवाई जा चुकी है।

 

जयंती कंपलेक्स बना नासूर, शहर की ऐसी तैसी करने की इजाजत किसी को नहीं मिलनी चाहिए
शहर के मध्य में स्थित पुरानी जयंती टॉकीज को तोडक़र यहां पर जयंती काम्पलेक्स बनाया गया जिसमें सैकड़ों की संख्या में दुकानें हैं। इसे बनाने वाले बिल्डर ने भी केवल पैसे कमाने की सोची और इस पूरे रास्ते को गुजरने वालों के लिए नर्क बना दिया। यह इस क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के लिए नासूर बन चुका है। बेसमेंट में पार्किंग का प्रावधान ही नहीं है जबकि दर्जनों दुकानें हैं। यह बिल्डिंग आज भी विवादों में है और इस पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। लेकिन नगर निगम को अपने द्वारा की गई इस गलती से सबक भी लेना चाहिए और ऐसे नए बिल्डरों को शहर की ऐसी तैसी करने की स्वतंत्रता और इजाजत नहीं देनी चाहिए।

 

बेसमेंट में दुकान तो पार्किंग कहां?
एक बड़ी बात यह भी है कि इस मुस्कान पार्क में बिल्डर के द्वारा बेसमेंट में भी दुकानों का निर्माण किया गया है ऐसे में इतने बड़े व्यावसायिक परिसर में बड़े-बड़े व्यावसायिक केंद्र खुलने के बाद यहां जो लोगों की भीड़ आएगी वह वाहन कहां खड़े करेंगे।

 

इनका कहना है
बिल्डर ने लिखित सहमति दी है कि वो जो भी अधूरे दस्तावेज़ और अनुमतियां है उनको 15 दिन में पूर्ण कर नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। समय अवधि के बाद नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
प्रीति यादव, निगमायुक्त

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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