
जबलपुर (जयलोक)। नगर निगम अब अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ ही अपनी संपत्ति के सही उपयोग के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने जा रही है। महापौर जगत बहादुर ङ्क्षसह अन्नू लगातार इस बात पर ध्यान केन्द्रित कर निर्देश दे रहे हैं कि नगर निगम अर्थव्यवस्था के मामले में आत्म स्वाबलंबी बने। आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने भी अपनी प्राथमिकताओं में नगर निगम की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत करने का लक्ष्य शामिल कर लिया है।
इसी के तहत विगत दिवस राजस्व वसूली को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में निगमायुक्त श्री अहिरवार ने बड़े बकायादारों पर कार्रवाही करने के साथ-साथ संपदा विभाग को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि नगर निगम द्वारा आवंटित भूखंड चाहे वो चंडालभाटा ट्रांसपोर्ट नगर के हों, राइट टाउन, नेपियर टाउन, गोलबाजार और मदन महल क्षेत्र के हों, इन सभी की बारिकी से जाँच की जाए।

जिन प्लॉटों पर लीज नियमों का उल्लंघन कर व्यवसायिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं या फिर सालों पहले भूखंडों का आवंटन कराकर उन्हें खाली रखा गया है ऐसे भूखंडों की लीज तत्काल निरस्त की जाएगी। चंडालभाटा ट्रांसपोर्ट नगर में ऐसे 92 भूखंडों की सूची पहले ही नगर निगम प्रशासन के पास जाँच में है इसके अलावा अन्य क्षेत्रों के भूखंडों की भी जाँच तेजी से शुरू कर दी गई है।

50 करोड़ की संपत्ति अधिग्रहित कर महापौर, आयुक्त ने बढ़ाया टीम का हौसला, अब और भी भूखंडों पर होगी कार्यवाही, नगर विकास के लिए राजस्व की सही वसूली आवश्यक
(जय लोक)। विगत दिवस राइट टाउन क्षेत्र में डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की 50 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्ति पर भू-माफियाओं की नजर गढ़ गई थी। एक डॉक्टर दंपति भी कई करोड़ रुपये इस भूमि की लालच में फंसा चुका है और उसके खिलाफ पुलिस में प्रकरण भी दर्ज है। वर्तमान में यह डॉक्टर दंपति जमानत पर हैं। उक्त भूमि का मूल स्वामी नगर निगम है। जब यह भूमि माफियाओं के चंगुल में फंसती नजर आने लगी तो नगर निगम ने आगे आकर मोर्चा संभाला और रातों-रात हर प्रकार की दावे आपत्तियों को समाप्त करते हुए उक्त 50 करोड़ से अधिक मूल्य के भूखंड को वापस अपने अधिपत्य में ले लिया।

महापौर और आयुक्त के निर्देश पर की गई इस सनसनीखेज और सख्त कार्यवाही जहां एक और नगर निगम की संपत्ति को हड़प करने की मंशा रखने वालों में हडक़ंप मच गया वहीं दूसरी ओर नगर निगम के राजस्व विभाग बाजार विभाग एवं संपदा साखा के लोगों का मनोबल भी बढ़ा।
इस कार्रवाई के बाद नगर निगम प्रशासन को भी यह स्पष्ट एहसास हो गया कि उसकी लाखों करोड़ों रुपए की कई ऐसी संपत्तियां हैं जो वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी हुई हैं या फिर जिस उद्देश्य से उन भूखंडों का आवंटन हुआ था वह उद्देश्य पूर्ण नहीं हुए हैं। इनमें से कई ऐसे भूखंड हंै जिन्हें रहवासी उद्देश्य से दिया गया था लेकिन आज उन पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और नगर निगम को राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है।
ऐसा ही कुछ मामले व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवंटित किए गए भूखंडों के साथ भी नजर आ रहा है। जहां पर लोगों ने अपने प्रभाव दिखाते हुए भूखंड तो प्राप्त कर लिए लेकिन वर्षों बाद भी इन पर ना तो कोई निर्माण किया है और ना ही अनुमति के अनुसार कोई व्यवसायिक गतिविधि संचालित कर रहे हैं। यह खाली पड़े भूखंड नगर निगम को राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं। नियम विरुद्ध तरीके से कब्जे में लिए गए ऐसे भूखंडों को अब नगर निगम वापस अपनी संपत्ति का हिस्सा बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने का निर्णय कर इस दिशा में कार्य कर रहा है।
Author: Jai Lok







