
भोपाल (जयलोक)। आगामी वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के संबंध में कहा गया है कि निर्यात को बढ़ावा देने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को ध्यान में रखते हुए मदिरा के विनिर्माताओं को पूर्व वर्षों की तरह अपने उत्पाद की कीमत के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। अब वे विनिर्माता पोर्टल पर निर्धारित व्यवस्था अनुसार अपने उत्पाद की कीमत घोषित कर सकेंगे। स्वयं कीमत घोषित कर सकेंगे।
नर्मदा तट से 5 किलोमीटर की दूरी तक मदिरा दुकानों पर लागू प्रतिबंध को यथावत रखा है। इसी प्रकार पवित्र नगरों में मदिरा दुकानों पर प्रतिबंध पूर्ववत जारी रहेगा। राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कोई नई मदिरा दुकान नहीं खोली जाएगी और दुकानों के अहाते पूर्ववत बंद रहेंगे। साथ ही, मदिरा दुकानों के नवीनीकरण की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य की सभी 3553 मदिरा दुकानों का निष्पादन अब ई-टेंडर एवं ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों के आरक्षित मूल्य में वर्तमान वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए दुकानों के समूह बनाये जाएंगे,अधिकतम पांच दुकानों का एक समूह निर्धारित किया जाएगा और आरक्षित मूल्य के आधार पर जिले के समूह तीन चार बैच में वर्गीकृत कर चरणबद्ध तरीके से ई-टेंडर एवं ई-ऑक्शन की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। जालसाजी की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए प्रतिभूति राशि के रूप में केवल ई-चालान या ई-बैंक गारंटी ही मान्य होगी। साधारण बैंक गारंटी और सावधि जमा स्वीकार नहीं किए जाएंगे। मदिरा की ड्यूटी दरें, विनिर्माण इकाइयों एवं बार की लाइसेंस फीस यथावत रखी गई हैं। निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए फीस संरचना में संशोधन और लेबल पंजीयन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के जनजातीय स्व-सहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने की दिशा में पहल की गई है। इसके लिए संबंधित राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री करने का प्रावधान किया गया है।
Author: Jai Lok






